मम्मी पापा की चुदाई देखी 2
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६९ पोजीशन में दोनों काफी देर तक एक-दूसरे को मुँह से सहलाते रहे। मम्मी का सिर पापा के लंड पर ऊपर-नीचे हो रहा था और पापा की जीभ मम्मी की चूत पर घूम रही थी। मम्मी की साँसें तेज थीं और उनके शरीर में हल्की कंपकंपी दौड़ रही थी। पापा के हाथ मम्मी के कूल्हों को कसकर पकड़े हुए थे। दोनों पूरी तरह उस पल में खोए हुए थे।
अचानक मम्मी ने लंड को मुँह से बाहर निकाला। उनकी साँसें हाँफ रही थीं। उन्होंने अपना शरीर थोड़ा सा ऊपर उठाया और पापा की तरफ मुड़ीं। उनकी आँखों में प्यास साफ दिख रही थी। उन्होंने धीमी लेकिन साफ आवाज में कहा,
“अब… डाल दो।”
पापा की आँखें खुलीं। उन्होंने मम्मी को देखा। मम्मी अभी भी उनके ऊपर उल्टी दिशा में थीं। पापा ने हल्के से सिर हिलाया और बोले,
“बिना कंडोम के ही मुझे मजा आता है… और वो भी अंदर निकालने का।”
मम्मी कुछ पल चुप रहीं। उनकी साँसें अभी भी तेज चल रही थीं। फिर उन्होंने धीरे से सिर हिलाया और बोलीं,
“ठीक है।”
पापा ने मम्मी को धीरे से अपने ऊपर से हटाया। मम्मी बेड पर करवट लेकर लेट गईं। पापा उठकर बैठ गए। उन्होंने अपने लंड से कंडोम को धीरे से खींचकर निकाल दिया और बेड के किनारे फेंक दिया। अब उनका लंड नंगा था — चमकदार, नसों से भरा और पूरी तरह खड़ा। मम्मी की नजर उस पर गई। उन्होंने कुछ नहीं कहा, बस अपनी जाँघें थोड़ी सी फैलाईं।
पापा ने मम्मी के कूल्हों को पकड़ा और उन्हें धीरे से घुटनों के बल कर दिया। मम्मी चारों हाथ-पैरों पर आ गईं। उनकी पीठ थोड़ी मुड़ी हुई थी और गांड पीछे की तरफ उठी हुई थी। पापा उनके पीछे घुटनों के बल बैठ गए। उन्होंने एक हाथ से अपना लंड पकड़ा और दूसरे हाथ से मम्मी की कमर को स्थिर किया। लंड के सिर को मम्मी की गीली चूत पर लगाया। हल्के से रगड़ा। मम्मी की कमर में एक सिहरन दौड़ गई।
पापा ने धीरे से धक्का दिया। लंड का सिर अंदर चला गया। मम्मी की साँस एकदम से रुक गई। उन्होंने चादर को कसकर पकड़ लिया। पापा ने और धक्का दिया। आधा लंड अंदर चला गया। मम्मी के मुँह से एक लंबी सी आवाज निकली —
“आह्ह्ह…”
पापा रुक गए। उन्होंने मम्मी की कमर सहलाई और पूछा, “दर्द तो नहीं हो रहा?”
मम्मी ने सिर हिलाया, “नहीं… और अंदर करो।”
पापा ने दोनों हाथों से मम्मी की कमर पकड़ी और एक लंबा धक्का दिया। पूरा ७ इंच लंड एक साथ मम्मी की चूत में समा गया। मम्मी की पीठ झुक गई और उनके मुँह से जोरदार आवाज निकली —
“आआह्ह्ह… पूरा अंदर… उफ्फ…”
पापा कुछ पल वहीं रुके रहे। पूरा लंड मम्मी के अंदर धंसा हुआ था। मम्मी की चूत लंड को कसकर जकड़े हुए थी। पापा ने धीरे-धीरे बाहर खींचा — लगभग पूरा लंड बाहर आ गया, सिर्फ सिर अंदर बचा — फिर जोर से अंदर धकेल दिया। मम्मी की गांड काँप उठी।
अब पापा ने रफ्तार पकड़ ली। वो नियमित गति से मम्मी को पीछे से चोदने लगे। हर धक्के के साथ मम्मी की गांड पापा की जाँघों से टकरा रही थी। आवाज साफ आ रही थी — “थप… थप… थप…”। मम्मी का सिर नीचे झुका हुआ था और उनके बाल चेहरे पर बिखर गए थे। हर जोरदार धक्के पर उनके मुँह से आवाजें निकल रही थीं —
“आह… आह… हाँ… ऐसे… जोर से…”
पापा ने मम्मी के बालों को एक हाथ से पकड़ लिया और हल्के से पीछे खींचा। मम्मी का चेहरा ऊपर उठ गया। उनकी आँखें बंद थीं और मुँह आधा खुला था। पापा अब और जोर से धक्के मार रहे थे। पूरा लंड हर बार जड़ तक अंदर जा रहा था और बाहर निकलते समय मम्मी की चूत लंड को कसकर पकड़ने की कोशिश कर रही थी।
मम्मी की आवाजें अब और तेज हो गई थीं।
“आह्ह्ह… राहुल… बहुत गहरा… उफ्फ… और जोर से मारो…”
पापा ने मम्मी की कमर को और कसकर पकड़ा। उनकी उँगलियों के निशान मम्मी की त्वचा पर पड़ रहे थे। वो अब तेजी से धक्के मार रहे थे। बेड हल्के-हल्के हिल रहा था। मम्मी के स्तन हर धक्के के साथ आगे-पीछे झूल रहे थे। उनके निप्पल अभी भी सख्त थे।
पापा ने एक हाथ मम्मी की गांड पर मारा — हल्के से। मम्मी की चूत ने लंड को और कस लिया। पापा की साँसें अब हाँफने लगी थीं। वो लगातार मम्मी को पीछे से चोद रहे थे। कभी धीरे, कभी बहुत जोर से। कभी पूरा लंड अंदर रोककर घुमाते, कभी तेजी से अंदर-बाहर करते।
मम्मी अब और नहीं संभाल पा रही थीं। उनके हाथ काँप रहे थे। वो बार-बार कह रही थीं —
“आह… मुझे भी… और अंदर… हाँ… वहीं… उफ्फ…”
पापा ने मम्मी के बाल छोड़ दिए और दोनों हाथों से उनकी गांड के दोनों हिस्सों को फैला लिया। लंड और भी गहराई तक जाने लगा। मम्मी की आवाज टूट गई। वो बस सिसकियाँ और आहें भर रही थीं। पापा की रफ्तार अब चरम पर थी। हर धक्का जोरदार था। मम्मी की चूत से हल्की गीली आवाजें आ रही थीं।
मैं खिड़की के पास खड़ा यह सब देख रहा था। मेरी अपनी साँसें तेज चल रही थीं। अंदर पापा मम्मी को डॉगी स्टाइल में बेरहमी से चोद रहे थे। मम्मी की गांड हर धक्के के साथ काँप रही थी और उनके मुँह से निकलने वाली आवाजें कमरे में गूँज रही थीं। पापा के शरीर पर पसीना चमक रहा था। मम्मी की पीठ भी पसीने से गीली हो चुकी थी।
पापा ने अचानक रफ्तार और बढ़ा दी। उनके धक्के अब बहुत तेज और छोटे हो गए थे। मम्मी की आवाज में भी बदलाव आ गया था। वो अब सिर्फ “आह… आह… आह…” कर रही थीं। पापा की साँसें बहुत तेज हो गई थीं। उन्होंने मम्मी की कमर को जोर से पकड़ा और आखिरी कुछ धक्के बहुत गहराई तक मारे।
फिर पापा का शरीर अकड़ गया। उन्होंने मम्मी की गांड में पूरा लंड धँसाए रखा और जोर से निकलने लगे। मम्मी की चूत में गर्म तरल की लहरें महसूस हो रही थीं। पापा हल्के-हल्के धक्के मारते हुए अंदर ही सब कुछ छोड़ रहे थे। मम्मी की आवाज में एक लंबी सी सिसकी थी —
“आह्ह्ह… अंदर… हाँ… सब अंदर…”
पापा कुछ देर और मम्मी के अंदर धँसे रहे। उनका शरीर हल्के-हल्के काँप रहा था। मम्मी भी उनकी जाँघों पर झुकी हुई थीं। दोनों की साँसें हाँफ रही थीं। कमरे में सिर्फ उनके भारी साँसों की आवाज रह गई थी।
पापा ने धीरे से लंड बाहर निकाला। मम्मी की चूत से सफेद तरल की एक हल्की धार निकलकर उनकी जाँघ पर बहने लगी। मम्मी बेड पर आगे की तरफ गिर गईं। उनकी गांड अभी भी थोड़ी उठी हुई थी। पापा उनके पीछे बैठे हुए साँस सँभाल रहे थे। दोनों के शरीर पसीने से चमक रहे थे।
मैं खिड़की के पास अब भी स्थिर खड़ा था। अंदर का नजारा मेरे दिमाग में घूम रहा था। पापा और मम्मी दोनों थके हुए लेकिन संतुष्ट नजर आ रहे थे। बेड पर अब सिर्फ उनके शरीर की हल्की हरकतें और साँसें बची थीं।
पापा अभी भी मम्मी के पीछे बैठे हुए साँस सँभाल रहे थे। मम्मी बेड पर आगे की तरफ गिरी हुई थीं। उनकी साँसें तेज चल रही थीं और शरीर पसीने से चमक रहा था। कमरे में हल्की सी गंध फैल गई थी। पापा ने मम्मी की पीठ पर हाथ फेरा और धीरे से कहा,
“थोड़ा आराम कर ले… फिर और करते हैं।”
मम्मी ने सिर्फ सिर हिलाया। दोनों कुछ देर वैसे ही पड़े रहे। पापा ने पानी की बोतल उठाई और दोनों ने कुछ घूँट पीए। फिर पापा ने मम्मी को अपनी तरफ पलटा। मम्मी की आँखें अभी भी कामुकता से भरी हुई थीं। पापा ने उन्हें चूमा — इस बार धीरे और लंबे समय तक। मम्मी ने भी जवाब दिया। दोनों के शरीर फिर से एक-दूसरे से सट गए।
**दूसरा राउंड – मिशनरी**
पापा ने मम्मी की टाँगें फैलाईं और उनके बीच में आ गए। उन्होंने अपना लंड फिर से मम्मी की चूत पर लगाया। इस बार बिना किसी रुकावट के एक ही धक्के में पूरा अंदर चला गया। मम्मी की कमर उठ गई और उनके मुँह से लंबी आह निकली —
“आआह्ह्ह… फिर से… पूरा…”
पापा ने मम्मी के दोनों हाथों को सिर के ऊपर पकड़ लिया और धीरे-धीरे लेकिन गहरे धक्के मारने लगे। हर धक्के के साथ मम्मी की स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे। पापा ने सिर झुकाकर एक स्तन को मुँह में ले लिया और चूसने लगे। मम्मी की उँगलियाँ पापा की पीठ में गड़ने लगीं।
“जोर से… हाँ… वहीं… आह…”
पापा की रफ्तार धीरे-धीरे बढ़ने लगी। बेड की हरकत तेज हो गई। मम्मी की टाँगें पापा की कमर के चारों तरफ लिपट गईं। वो पापा को और अंदर खींच रही थीं। दोनों के शरीर पसीने से चिपक गए थे। पापा कभी धीरे मारते, कभी बहुत जोर से। मम्मी की आवाजें अब नहीं रुक रही थीं। कमरे में सिर्फ उनके मिलने की आवाज और आहें गूँज रही थीं।
करीब पैंतालीस मिनट तक यह राउंड चला। आखिर में पापा ने फिर से मम्मी के अंदर ही सब कुछ छोड़ दिया। मम्मी की शरीर काँप उठी। दोनों लंबे समय तक एक-दूसरे से चिपके रहे। पापा का चेहरा मम्मी की गर्दन में छिपा था और मम्मी के हाथ उनकी पीठ पर धीरे-धीरे फिर रहे थे।
**तीसरा राउंड – साइड और फिर ऊपर**
थोड़ी देर आराम के बाद पापा फिर से उत्तेजित हो गए। उन्होंने मम्मी को साइड में लिटाया। खुद उनके पीछे लेट गए। एक टाँग मम्मी की टाँगों के बीच में डालकर उन्होंने फिर से लंड अंदर कर दिया। इस पोजीशन में धक्के धीमे लेकिन बहुत गहरे लग रहे थे। पापा का एक हाथ मम्मी के स्तन को मसल रहा था और दूसरा उनकी चूत के ऊपरी हिस्से को सहला रहा था। मम्मी की आँखें बंद थीं। वो सिर्फ आहें भर रही थीं।
“आह… राहुल… बहुत अच्छा लग रहा है…”
पापा ने करीब बीस मिनट तक साइड से चोदा। फिर मम्मी ने खुद ही कहा, “मुझे ऊपर आने दो।”
पापा लेट गए। मम्मी उनके ऊपर सवार हो गईं। उन्होंने खुद ही लंड को अपनी चूत में ले लिया और धीरे-धीरे बैठ गईं। पूरा लंड अंदर समा गया। मम्मी ने हाथ पापा की छाती पर रखे और हिलेना शुरू किया। पहले धीरे, फिर तेज। उनके स्तन पापा के चेहरे के ऊपर झूल रहे थे। पापा ने दोनों स्तनों को पकड़ लिया और निप्पल्स को चूसने लगे।
मम्मी अब खुद रफ्तार बढ़ा रही थीं। उनकी गांड पापा की जाँघों पर बार-बार बैठ रही थी। आवाज तेज हो गई थी — “थप-थप-थप”। मम्मी की साँसें पूरी तरह बिखर गई थीं। वो कभी आगे झुक जातीं, कभी सीधी होकर जोर-जोर से हिलेतीं। पापा नीचे से भी धक्के मार रहे थे। दोनों की रफ्तार एक हो गई थी।
यह राउंड सबसे लंबा चला। करीब एक घंटे तक मम्मी पापा के ऊपर रहीं। कई बार उनकी गति धीमी हुई, कई बार बहुत तेज। आखिर में मम्मी की शरीर काँपने लगी। उन्होंने पापा की छाती को कसकर पकड़ लिया और जोर से चरम पर पहुँचीं। उसी समय पापा ने भी नीचे से जोरदार धक्के मारते हुए तीसरी बार अंदर ही सब कुछ छोड़ दिया। मम्मी पापा के ऊपर गिर गईं। दोनों की साँसें हाँफ रही थीं। शरीर पसीने से तरबतर थे।
पापा ने मम्मी के बालों को सहलाते हुए धीमी आवाज में कहा, “अब सो जा… बहुत हो गया।”
मम्मी ने सिर्फ “हम्म” कहा। वो पापा की छाती पर ही लेटी रहीं। पापा ने हल्के से चादर खींचकर दोनों पर डाल दी। धीरे-धीरे उनकी साँसें नियमित होने लगीं। पापा की आँखें बंद हो गईं। मम्मी भी कुछ ही देर में गहरी नींद में चली गईं। कमरे में अब सिर्फ उनके सोने की हल्की आवाजें रह गई थीं। टेबल लैंप अभी भी जल रहा था, लेकिन दोनों पूरी तरह थककर सो चुके थे।
खिड़की के बाहर मैं अभी भी खड़ा था। मेरा शरीर भी अजीब सी थकान और उत्तेजना से भरा हुआ था। मैंने काफी देर तक अंदर देखा। जब यकीन हो गया कि दोनों सच में सो गए हैं, तब मैंने धीरे से कदम बढ़ाए। किचन से निकलकर लिविंग रूम में आया। सोफे पर लेट गया। दिल अभी भी जोर-जोर से धड़क रहा था। आँखें बंद कीं। मन के अंदर रात का पूरा नजारा घूम रहा था। धीरे-धीरे थकान ने मुझे भी जकड़ लिया। कुछ देर बाद मैं भी सो गया।
रात के लगभग तीन बज रहे होंगे जब घर पूरी तरह शांत हो गया। पापा-मम्मी अपने कमरे में गहरी नींद में थे और मैं लिविंग रूम के सोफे पर आँखें बंद किए पड़ा था।
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