मम्मी पापा की चुदाई देखी
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२०१८ की बात है। उस समय मेरी उम्र ठीक २० साल थी। मैं अपने पापा-मम्मी का अकेला बेटा था। हमारे घर में सिर्फ तीन लोग रहते थे — मैं, मम्मी और पापा। दादा-दादी, चाचा-चाची सब गाँव में रहते थे। पापा का शहर में छोटा-सा बिजनेस था, इसलिए हम तीनों शहर में एक छोटे से २-बीएचके फ्लैट में रहते थे।
पापा २५ दिनों के लिए गाँव गए हुए थे। दादाजी की तबीयत खराब थी, इसलिए पापा को जाना पड़ा था। मैं कॉलेज की सेमेस्टर परीक्षाओं में व्यस्त था, इसलिए मम्मी मुझसे कहकर गाँव नहीं गईं। वो कहती रहीं — “बेटा, तेरी परीक्षा है। मैं यहीं रहूँगी। पापा अकेले सँभाल लेंगे।”
२५ दिन बीत चुके थे। घर में एक अजीब सी खामोशी छाई हुई थी। मम्मी रोज सुबह उठकर मेरे लिए नाश्ता बनातीं, फिर दिन भर घर का काम करतीं। शाम को जब मैं कॉलेज से लौटता तो वो मेरे साथ बैठकर टीवी देखतीं या मेरी पढ़ाई के बारे में पूछतीं। लेकिन उनकी आँखों में एक हल्की उदासी हमेशा रहती थी। पापा के बिना घर अधूरा लग रहा था।
उस दिन शाम के करीब ६:३० बज रहे थे। मैं अपने कमरे में किताबें खोलकर बैठा था। अचानक मम्मी का फोन बजा। वो किचन में थीं। मैंने दरवाजे के पास खड़े होकर उनकी बात सुन ली।
मम्मी ने फोन उठाया और मीठी आवाज में बोलीं,
“हैलो… कहाँ हो अभी?”
पापा की आवाज आई, “गाँव से निकल गया हूँ। अभी हाईवे पर हूँ। करीब ८ बजे तक घर पहुँच जाऊँगा।”
मम्मी की आवाज में हल्की मुस्कान आ गई।
“सच में? इतने दिन बाद… लग रहा था जैसे महीने बीत गए हों।”
पापा हँसे, “तुझे भी याद आ रहा था क्या?”
मम्मी थोड़ी देर चुप रहीं, फिर धीमी आवाज में बोलीं,
“बहुत याद आ रहा था। रात को अकेले सोना… बहुत अजीब लगता है। तेरे बिना बिस्तर भी खाली-खाली लगता है।”
पापा की आवाज थोड़ी गहरी हो गई, “मैं भी सोच रहा था। इतने दिनों बाद जब घर पहुँचूँगा तो… पहले तुझे ही मिलूँगा।”
मम्मी हल्के से हँसीं, “मिलना तो ठीक है… लेकिन आज रात… थोड़ी खास बनानी है।”
पापा ने पूछा, “कैसे?”
मम्मी ने आवाज और धीमी कर ली, जैसे कोई और सुन न ले।
“मैंने… थोड़ा सामान मँगवा लिया है। वो जो तू हमेशा कहता था… वो वाली चीजें। आज रात इस्तेमाल करेंगे।”
पापा की साँसें थोड़ी तेज हो गईं, “सच में? तूने मँगवा लिया?”
“हाँ… दोपहर में ही आ गया था। अब घर में रख दिया है। तू आ जा, फिर देख लेना।”
दोनों की बातें अब और निजी हो गई थीं। मम्मी हल्के-हल्के हँस रही थीं और पापा भी उनके साथ जुड़ गए थे। वो बातें कर रहे थे कि २५ दिन बाद पहली रात कैसी होगी, कैसे दोनों एक-दूसरे को मिस कर रहे थे, और आज रात कुछ खास करने वाले हैं। मम्मी ने यहाँ तक कह दिया कि उन्होंने कुछ खास सामान मँगवा रखा है जो दोनों के बीच रोमांस बढ़ाने के लिए है।
मैं दरवाजे के पास खड़ा यह सब सुन रहा था। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। शर्म भी आ रही थी और अजीब सी उत्सुकता भी। मैंने चुपचाप अपने कमरे में वापस जाकर किताब खोल ली, लेकिन मन पढ़ाई में नहीं लग रहा था।
रात के ७:४५ बज चुके थे। मम्मी ने जल्दी-जल्दी खाना बना लिया था — दाल, रोटी, सब्जी और पापा की पसंदीदा खीर। उन्होंने घर की सफाई भी कर दी थी। लिविंग रूम में हल्की खुशबू वाली अगरबत्ती जला दी थी। खुद भी नहा-धोकर एक सादी सी लेकिन अच्छी लगने वाली कुर्ती पहन ली थी। बाल खुले छोड़े हुए थे।
मैं भी तैयार हो गया था। टी-शर्ट और जींस पहनकर लिविंग रूम में बैठ गया।
ठीक ८:०५ पर दरवाजे की घंटी बजी।
मम्मी ने जल्दी से दरवाजा खोला। पापा खड़े थे — थके हुए, लेकिन मुस्कुराते हुए। हाथ में एक छोटा सा बैग था। जैसे ही मम्मी ने दरवाजा खोला, पापा ने उन्हें गले लगा लिया। दोनों काफी देर तक एक-दूसरे को पकड़े रहे। मम्मी की आँखें नम हो गई थीं।
“बहुत दिन हो गए…” मम्मी ने धीमी आवाज में कहा।
पापा ने उनके बालों पर हाथ फेरा, “अब नहीं जाऊँगा इतने दिनों के लिए।”
फिर पापा ने मेरी तरफ देखा। मुस्कुराते हुए बोले, “और मेरे राजा? परीक्षा कैसी चली?”
मैंने भी मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “ठीक-ठाक पापा। आप कैसे हैं?”
पापा ने मुझे भी गले लगा लिया। तीनों के बीच एक अजीब सी गर्माहट थी। लंबे समय बाद पूरा परिवार एक साथ था।
मम्मी ने कहा, “चलो पहले हाथ-मुँह धो लो। खाना गरम है।”
पापा ने बैग रखा, हाथ-मुँह धोया और फिर तीनों डाइनिंग टेबल पर बैठ गए। मम्मी ने गरम-गरम रोटियाँ परोसीं। पापा ने दाल का स्वाद चखते हुए कहा, “घर का खाना ही कुछ और है। गाँव में सब अच्छा था, लेकिन तेरे हाथ का स्वाद नहीं मिलता।”
मम्मी शरमा गईं। मैं चुपचाप खा रहा था, लेकिन मन में वो फोन वाली बात घूम रही थी। पापा और मम्मी के बीच नज़रें मिल रही थीं। दोनों के चेहरे पर एक अलग ही खुशी थी।
खाना खाते-खाते पापा ने पूछा, “बेटा, तेरी परीक्षा कब खत्म हो रही है?”
“दो दिन और बाकी हैं पापा।”
“अच्छा। फिर घूमने चलेंगे कहीं।”
मम्मी ने मुस्कुराते हुए कहा, “पहले तुम आराम कर लो। इतनी लंबी यात्रा की है।”
खाना खत्म हुआ। मम्मी ने बर्तन समेटे। पापा ने टीवी चालू किया, लेकिन ध्यान टीवी पर नहीं था। वो बार-बार मम्मी की तरफ देख रहे थे। मम्मी किचन में काम करती हुई भी मुस्कुरा रही थीं।
रात के ९ बज रहे थे। घर में एक अलग सी शांति और गर्माहट थी। २५ दिनों बाद पापा घर आ चुके थे। हम तीनों एक साथ थे।
रात के ठीक १० बज रहे थे। खाना खाने के बाद पापा टीवी के सामने सोफे पर बैठे हुए थे। मम्मी किचन में बर्तन धो रही थीं। घर में हल्की सी शांति छाई हुई थी। पापा ने अचानक मेरी तरफ देखा और मुस्कुराते हुए बोले,
“बेटा, अब सो जा। कल तेरी परीक्षा है ना? देर तक जागना ठीक नहीं।”
मैंने सिर हिलाते हुए कहा, “जी पापा।”
मम्मी किचन से बाहर आईं। उन्होंने तौलिया से हाथ पोंछते हुए कहा, “हाँ बेटा, सो जा। तू थक गया होगा पढ़-पढ़ के।” फिर उन्होंने पापा की तरफ देखा और हल्के से मुस्कुराते हुए बोलीं, “आप भी चलो रूम में। इतनी लंबी यात्रा की है, आराम कर लो।”
पापा खड़े हो गए। उन्होंने टीवी बंद किया और मम्मी के साथ बेडरूम की तरफ बढ़ने लगे। मैं उठा और लिविंग रूम के सोफे की तरफ गया। हमारे फ्लैट में सिर्फ एक ही कमरे में एसी लगा था — वो पापा-मम्मी का बेडरूम था। लिविंग रूम में सिर्फ पंखा चलता था। इसलिए गर्मी के दिनों में मैं हमेशा लिविंग रूम के सोफे पर ही सोता था। मेरा अपना छोटा सा कमरा था, लेकिन एसी की वजह से मैं यहीं सोना पसंद करता था।
मम्मी ने बेडरूम का दरवाजा बंद करते हुए मुझसे कहा, “लाइट बुझा देना बेटा। और अगर कुछ चाहिए तो आवाज दे देना।”
“जी मम्मी,” मैंने जवाब दिया।
दरवाजा बंद हो गया। मैंने लिविंग रूम की लाइट बुझा दी। सिर्फ किचन की छोटी सी नाइट लैम्प जल रही थी, जिससे हल्की रोशनी आ रही थी। मैं सोफे पर लेट गया, लेकिन नींद की तो कोई स्थिति ही नहीं थी। मन के अंदर एक अजीब सी बेचैनी और उत्सुकता चल रही थी।
मैंने ध्यान से सोचा। पापा-मम्मी के बेडरूम की एक खिड़की किचन की तरफ खुलती थी। वो खिड़की छोटी जरूर थी, लेकिन अगर किचन में थोड़ा सा कोने में खड़ा हो जाऊँ तो पूरे बेडरूम का नजारा साफ दिखता था। पर्दा अगर हल्का सा हिला हुआ हो या खुला हो, तो अंदर की हर चीज नजर आ सकती थी। मैंने पहले कई बार देखा था कि मम्मी जब रूम में कपड़े बदलती हैं तो कभी-कभी वो खिड़की से झलक मिल जाती थी। लेकिन आज बात कुछ और थी।
मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। मैंने फैसला कर लिया। मैं धीरे से उठा। सोफे से पैर नीचे रखे और बिल्कुल आवाज न करते हुए किचन की तरफ बढ़ा। फर्श पर मेरे कदमों की हल्की आवाज भी न हो, इसलिए मैं एड़ी उठाकर चल रहा था। किचन में पहुँचकर मैंने नाइट लैम्प की रोशनी से बचते हुए खिड़की के पास वाली दीवार से सट कर खड़ा हो गया।
खिड़की का पर्दा आधा खुला हुआ था। अंदर की रोशनी हल्की पीली थी। बेडरूम में सिर्फ एक टेबल लैंप जल रहा था। पापा बेड पर बैठे हुए थे। उन्होंने अपनी शर्ट के बटन खोल दिए थे। मम्मी अलमारी के सामने खड़ी थीं। वो अपने बालों को खोल रही थीं।
पापा ने धीमी आवाज में कहा, “आज बहुत याद आ रही थी तुम्हारी।”
मम्मी मुस्कुराईं, “मुझे भी। इतने दिन बाद घर आया है तो… थोड़ा स्पेशल करना चाहिए।”
पापा हँसे, “वो सामान जो तूने मँगवाया था… कहाँ रखा है?”
मम्मी ने आवाज और धीमी कर ली, “अलमारी में है। लेकिन पहले… हमारा बेटा सो गया या नहीं, ये पक्का कर लें।”
पापा ने सिर हिलाया, “हाँ, ठीक कहती है। अगर वो जाग रहा होगा तो आवाज आ जाएगी।”
दोनों थोड़ी देर चुप रहे। फिर पापा ने कहा, “जा के देख ले एक बार। अगर सो गया हो तो बता।”
मेरा दिल धड़कने लगा। मैंने तुरंत खिड़की से हटकर किचन से बाहर निकलने का सोचा, लेकिन तभी मम्मी के कदमों की आवाज आई। वो बेडरूम का दरवाजा खोल रही थीं। मैंने उतनी तेजी से प्रतिक्रिया की जितनी मुझसे हो सकी। किचन से निकलकर मैंने तीन बड़े कदम सोफे की तरफ बढ़ाए और बिल्कुल वैसे ही लेट गया जैसे पहले सो रहा था। आँखें बंद कर लीं, साँस को नियमित करने की कोशिश की।
बेडरूम का दरवाजा खुला। मम्मी की हल्की पदचाप लिविंग रूम में आई। वो मेरे सोफे के पास आईं। मैं महसूस कर सकता था कि वो मेरे ऊपर झुककर देख रही हैं। कुछ सेकंड तक वो वहाँ खड़ी रहीं। मेरी आँखें बंद थीं, लेकिन मैं महसूस कर रहा था कि उनकी नजर मुझ पर है। दिल इतनी जोर से धड़क रहा था कि मुझे डर लग रहा था कि कहीं आवाज न निकल जाए।
मम्मी ने धीमी आवाज में कुछ नहीं कहा। बस एक हल्की सी साँस ली और फिर उनके कदम वापस बेडरूम की तरफ बढ़े। दरवाजा धीरे से बंद हो गया। बंद होने की आवाज सुनाई दी।
मैं कुछ सेकंड और वैसे ही पड़ा रहा। फिर धीरे से आँखें खोलीं। लिविंग रूम खाली था। मम्मी अंदर चली गई थीं और दरवाजा बंद कर चुकी थीं।
अब फिर से खिड़की के पास जाने का मौका था। लेकिन इस बार और सावधानी से। मैंने धीरे से साँस ली और सोफे से उठा…
मैंने कुछ देर और सोफे पर पड़े रहने का नाटक किया। जब पूरा यकीन हो गया कि मम्मी रूम में जा चुकी हैं और बाहर नहीं आएंगी, तब मैंने धीरे से आँखें खोलीं। लिविंग रूम में सन्नाटा था। सिर्फ किचन की नाइट लैम्प की हल्की रोशनी फैली हुई थी। मैंने बिल्कुल आवाज न करते हुए सोफे से उठा और फिर से किचन की तरफ बढ़ा। इस बार और भी सावधानी से कदम रखे। दीवार से सटकर खिड़की के पास पहुँचा।
पर्दा अभी भी आधा खुला था। अंदर की रोशनी साफ दिख रही थी। पापा बेड पर बैठे हुए थे। मम्मी अलमारी के सामने खड़ी थीं। पापा ने धीमी लेकिन साफ सुनाई देने वाली आवाज में कहा,
“वो सामान तो दिखा… क्या-क्या है उसमें?”
मम्मी थोड़ा शरमा गईं। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “अभी दिखाती हूँ… थोड़ा इंतजार कर।”
मम्मी ने अलमारी का निचला दराज खोला। अंदर से एक छोटा सा काला पैकेट निकाला। उसे बेड पर रखा और एक-एक करके चीजें निकालने लगीं। पहले उन्होंने एक नई ब्रा निकाली — काले रंग की, लेस वाली, थोड़ी डीप नेक वाली। फिर उसी मैचिंग की एक पतली पैंटी निकाली। उसके बाद एक कंडोम का पैकेट और आखिर में एक छोटी सी चॉकलेट की डब्बी।
पापा की नजरें उन चीजों पर टिक गईं। उन्होंने ब्रा उठाकर देखी।
“अच्छी है… नई है?”
मम्मी ने सिर हिलाया, “हाँ… आज दोपहर में ही आई थी। सोचा था तू आएगा तो… पहनूँगी।”
पापा ने पैंटी भी उठाकर देखी। फिर कंडोम का पैकेट हाथ में लिया और हल्के से मुस्कुराए। मम्मी ने चॉकलेट की डब्बी खोली। अंदर दो पीस चॉकलेट थीं। उन्होंने एक पापा की तरफ बढ़ाई और एक खुद ले ली।
“खा ले… थोड़ी मीठा हो जाएगा मूड,” मम्मी ने हँसते हुए कहा।
दोनों ने चॉकलेट खाई। पापा ने चॉकलेट खाते हुए ब्रा को फिर से देखा और बोले,
“ब्रा अच्छी है। घूमने जाएँगे तब पहनना… बाहर भी अच्छी लगेगी।”
मम्मी शर्माते हुए बोलीं, “तू ही देख लेगा ना… अभी तो घर में ही है।”
पापा ने चॉकलेट खत्म की और मम्मी का हाथ पकड़ लिया। उन्हें अपनी तरफ खींचा। मम्मी बेड पर पापा के पास बैठ गईं। पापा ने उनका चेहरा दोनों हाथों में लिया और गहरी नजरों से देखा। फिर धीरे से उनके होठों पर अपने होठ रख दिए।
पहला किस हल्का था। सिर्फ होठों का स्पर्श। फिर पापा ने जोर बढ़ाया। मम्मी की आँखें बंद हो गईं। दोनों के होंठ एक-दूसरे से चिपक गए। पापा की जीभ मम्मी के होठों को सहला रही थी। मम्मी ने भी जवाब दिया। दोनों का किस गहरा होता गया। पापा का एक हाथ मम्मी की कमर पर था और दूसरा उनके बालों में।
किस करते-करते पापा ने मम्मी की कुर्ती के निचले हिस्से को ऊपर किया। मम्मी ने खुद ही हाथ बढ़ाकर कुर्ती को सिर के ऊपर से उतार दिया। अब वो सिर्फ ब्रा और सलवार में थीं। पापा ने उनकी सलवार की डोरी खोली। मम्मी ने थोड़ा सा हिचकिचाते हुए खुद ही सलवार को नीचे सरका दिया। अब वो सिर्फ काली ब्रा और मैचिंग पैंटी में बेड पर बैठी थीं।
पापा ने भी अपनी बाकी बची शर्ट उतार दी। फिर उन्होंने पजामा का नाड़ा खोला और पजामा नीचे कर दिया। अब पापा सिर्फ व्हाइट कलर की अंडरवियर में रह गए थे। मम्मी की नजर पापा के शरीर पर गई। २५ दिनों बाद पापा का शरीर देखकर उनकी साँसें थोड़ी तेज हो गईं।
पापा ने मम्मी को फिर से अपनी तरफ खींचा। दोनों फिर से किस करने लगे। इस बार किस और गहरा और गीला था। पापा का हाथ मम्मी की पीठ पर ब्रा के हुक के पास पहुँच गया, लेकिन उन्होंने अभी हुक नहीं खोला। सिर्फ सहला रहे थे। मम्मी के दोनों हाथ पापा की छाती पर थे। वो पापा के सीने को सहला रही थीं।
बेड पर दोनों एक-दूसरे से सटे हुए थे। कमरे में सिर्फ उनके किस करने और हल्की साँसों की आवाज आ रही थी। मम्मी कभी-कभी हल्की सी आवाज में कुछ कह रही थीं, लेकिन मैं समझ नहीं पा रहा था। पापा ने मम्मी को धीरे से लिटा दिया। खुद उनके ऊपर झुक गए। दोनों के शरीर एक-दूसरे से छू रहे थे। ब्रा और पैंटी में मम्मी, और अंडरवियर में पापा — दोनों रोमांस में पूरी तरह डूबे हुए थे।
मैं खिड़की के पास खड़ा यह सब देख रहा था। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। मैं साँस तक रोककर खड़ा था ताकि कोई आवाज न निकले। अंदर पापा और मम्मी अभी भी किस और रोमांस में व्यस्त थे। दोनों के शरीर की हरकतें धीमी लेकिन साफ दिख रही थीं।
पापा अभी भी मम्मी के ऊपर झुके हुए थे। दोनों का किस काफी देर तक चलता रहा। पापा के हाथ मम्मी की पीठ पर थे। उन्होंने धीरे से ब्रा के हुक पर उँगलियाँ बढ़ाईं। एक हल्के से दबाव के साथ हुक खुल गया। मम्मी की ब्रा ढीली हो गई। पापा ने ब्रा के दोनों स्ट्रैप कंधों से नीचे सरका दिए। मम्मी ने थोड़ा सा शरीर उठाया ताकि पापा ब्रा को पूरी तरह निकाल सकें। काली लेस वाली ब्रा बेड के किनारे गिर गई।
अब मम्मी के दोनों स्तन पूरी तरह खुले हुए थे। २५ दिनों बाद पापा ने उन्हें इस तरह देखा था। मम्मी के स्तन गोल, भारी और तनाव में सख्त हो चुके थे। गुलाबी निप्पल खड़े हो गए थे। पापा कुछ पल बस देखते रहे। फिर उन्होंने सिर झुकाया और अपना मुँह मम्मी के बाएँ स्तन पर रख दिया।
पापा ने निप्पल को होठों के बीच लिया और धीरे से चूसना शुरू किया। मम्मी की कमर हल्की सी उठ गई। उनके मुँह से एक धीमी सी आवाज निकली — “आह…”
पापा ने जोर बढ़ा दिया। वो निप्पल को मुँह में लेकर जोर-जोर से चूस रहे थे। कभी दाँतों से हल्का काटते, कभी जीभ से गोल-गोल घुमाते। मम्मी की साँसें तेज हो गईं। उन्होंने पापा के सिर को अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया और अपनी तरफ और दबाया।
“और जोर से… हाँ… ऐसे…” मम्मी की आवाज में प्यास साफ झलक रही थी।
पापा ने बायाँ स्तन छोड़कर दाएँ स्तन पर अपना मुँह ले गए। इस बार और जोर से चूसा। मम्मी की आँखें बंद हो गईं। उनका एक हाथ पापा के बालों में था और दूसरा बेड की चादर को कसकर पकड़े हुए था। पापा दोनों स्तनों को बारी-बारी से चूस रहे थे। कभी एक को मुँह में लेकर जोर से खींचते, कभी दूसरे को हाथ से मसलते। मम्मी के स्तनों पर उनकी लार चमक रही थी।
मम्मी अब और नहीं रोक पा रही थीं। उनकी आवाजें थोड़ी और साफ होने लगी थीं।
“आह… राहुल… बहुत जोर से… उफ्फ…”
पापा ने दोनों स्तनों को एक साथ दोनों हाथों से दबाया और निप्पल्स को बारी-बारी से चूसते रहे। मम्मी का शरीर हल्का-हल्का काँप रहा था। उनके स्तन पापा के मुँह और हाथों में पूरी तरह कैद थे। पापा की भूख २५ दिनों की थी और वो अभी सिर्फ यहीं रुके हुए थे — मम्मी के स्तनों को जोर-जोर से चूसते हुए।
मैं खिड़की के पास खड़ा यह सब साफ देख रहा था। मेरी साँसें खुद तेज चल रही थीं। अंदर पापा लगातार मम्मी के स्तनों को चूस रहे थे और मम्मी उनकी इस हरकत पर पूरी तरह से पिघल रही थीं।
पापा अभी भी मम्मी के स्तनों को चूस रहे थे। काफी देर तक वो दोनों स्तनों के बीच अपने मुँह और हाथों से खेलते रहे। मम्मी की साँसें तेज चल रही थीं और उनके मुँह से हल्की-हल्की आवाजें निकल रही थीं। अचानक पापा ने अपना मुँह स्तनों से हटाया। उनके होंठ चमक रहे थे। उन्होंने मम्मी की आँखों में देखा और धीरे से बेड पर उठकर बैठ गए।
पापा ने अपनी अंडरवियर के नाड़े में उँगलियाँ डालीं और उसे नीचे सरका दिया। अंडरवियर उनके पैरों से निकलकर बेड के किनारे गिर गई। अब पापा पूरी तरह नंगे हो चुके थे। कमरे की हल्की रोशनी में उनका शरीर साफ दिख रहा था। उनकी छाती, पेट और नीचे का हिस्सा। और बीच में उनका लंड पूरी तरह खड़ा था।
मैं खिड़की से साफ देख सकता था — वो लंड लगभग ७ इंच लंबा और मोटा था। नसें उभर रही थीं और सिर चमक रहा था। पापा ने मम्मी का हाथ पकड़ा और धीरे से अपने लंड की तरफ ले गए। मम्मी की हथेली जब लंड को छूई तो उनकी उँगलियाँ थोड़ी सिमट गईं। पापा ने उनका हाथ और पास दबाया।
“पकड़…,” पापा ने धीमी आवाज में कहा।
मम्मी ने धीरे से लंड को अपनी मुट्ठी में लिया। उनकी उँगलियाँ पूरी तरह घेर नहीं पा रही थीं। उन्होंने ऊपर से नीचे तक हल्के हाथ से सहलाना शुरू किया। पहले बहुत धीरे, जैसे कोई नाजुक चीज छू रहे हों। पापा की आँखें बंद हो गईं। उन्होंने सिर थोड़ा पीछे किया और साँस भारी भरने लगे।
मम्मी का हाथ अब थोड़ा और सक्रिय हो गया था। वो लंड को ऊपर-नीचे सहला रही थीं। कभी सिर्फ सिर को अंगूठे और उंगली से घुमातीं, कभी पूरी लंबाई पर हाथ फेरतीं। पापा की साँसें और तेज हो गईं। उन्होंने मम्मी के बालों में हाथ डाल दिया।
थोड़ी देर ऐसे ही चलता रहा। मम्मी चुपचाप लंड को सहलाती रहीं। कमरे में सिर्फ उनके हाथ की हल्की आवाज और दोनों की साँसें सुनाई दे रही थीं। फिर पापा ने आँखें खोलीं और मम्मी की तरफ देखा।
“मुँह में ले ले,” पापा ने धीमी लेकिन साफ आवाज में कहा।
मम्मी का हाथ रुक गया। उन्होंने पापा की तरफ देखा। उनके चेहरे पर थोड़ी हिचकिचाहट थी।
“नहीं… गंदा होगा,” मम्मी ने धीमी आवाज में कहा। “अच्छे से नहीं होगा… दांतों से लग जाएगा।”
पापा हल्के से मुस्कुराए। उन्होंने मम्मी के गाल पर हाथ फेरा और बोले,
“कंडोम लगा के मुँह में ले ले। फिर गंदा नहीं लगेगा।”
मम्मी कुछ पल चुप रही। फिर उन्होंने सिर हल्के से हिलाया। पापा ने बेड पर रखे कंडोम के पैकेट को उठाया। पैकेट को दाँतों से फाड़ा और अंदर से कंडोम निकाला। मम्मी ने लंड को छोड़ दिया। पापा ने खुद कंडोम को लंड के सिर पर रखा और धीरे-धीरे नीचे तक खींच दिया। कंडोम पूरी तरह चढ़ गया। लंड अब चमकदार और टाइट दिख रहा था।
पापा ने फिर से मम्मी का हाथ पकड़ा और उन्हें थोड़ा अपने करीब खींचा। मम्मी बेड पर घुटनों के बल आगे बढ़ीं। उनके चेहरे का स्तर ठीक पापा के लंड के पास था। पापा ने हल्के से उनके सिर पर हाथ रखा।
मम्मी ने थोड़ी देर लंड को देखा। फिर उन्होंने धीरे से मुँह खोला और कंडोम लगे लंड के सिर को अपने होठों के बीच लिया। पहले सिर्फ सिर। उनके होंठ लंड के चारों तरफ बंद हो गए। पापा की साँस एकदम से रुक गई। मम्मी ने धीरे से सिर को आगे बढ़ाया। लंड का कुछ हिस्सा उनके मुँह में चला गया।
वो रुक गईं। फिर धीरे-धीरे सिर को ऊपर-नीचे करने लगीं। कंडोम की वजह से आवाज हल्की लेकिन साफ आ रही थी। पापा का हाथ मम्मी के बालों में था। वो मम्मी के सिर को हल्के से गाइड कर रहे थे। मम्मी अब थोड़ा और अंदर तक ले रही थीं। उनके गाल धँस रहे थे और आँखें आधी बंद थीं।
पापा की आवाज में भारीपन आ गया था।
“हाँ… ऐसे… धीरे-धीरे…”
मम्मी का सिर अब नियमित गति से ऊपर-नीचे हो रहा था। लंड उनके मुँह में चमक रहा था। कभी वो सिर्फ सिर को चूसतीं, कभी थोड़ा और अंदर तक ले जातीं। पापा की जाँघें हल्की-हल्की तन रही थीं। मम्मी के एक हाथ ने लंड के निचले हिस्से को पकड़ रखा था और दूसरा हाथ पापा की जाँघ पर टिका था।
मैं खिड़की के पास बिल्कुल स्थिर खड़ा था। साँस तक रोक रखी थी। अंदर मम्मी लगातार पापा के कंडोम लगे लंड को मुँह में लेकर चूस रही थीं और पापा उनकी इस हरकत का मजा ले रहे थे। कमरे में सिर्फ हल्की गीली आवाजें और दोनों की भारी साँसें गूँज रही थीं।
मम्मी अभी भी पापा के कंडोम लगे लंड को मुँह में लिए हुए थीं। उनका सिर नियमित गति से ऊपर-नीचे हो रहा था। पापा का एक हाथ उनके बालों में था और दूसरा बेड की चादर को कसकर पकड़े हुए था। मम्मी की आँखें आधी बंद थीं और उनके गाल धँसे हुए थे। कमरे में हल्की गीली आवाजें साफ सुनाई दे रही थीं।
पापा कुछ देर और मम्मी के मुँह का मजा लेते रहे। फिर उन्होंने धीरे से मम्मी के सिर को ऊपर उठाया। लंड मम्मी के मुँह से बाहर निकल आया। मम्मी की साँसें तेज चल रही थीं। उनके होंठ थोड़े सूजे हुए और चमकदार लग रहे थे। पापा ने मम्मी के गाल पर हाथ फेरा और धीमी आवाज में कहा,
“अब दोनों एक साथ…”
मम्मी समझ गईं। उन्होंने हल्के से सिर हिलाया। पापा बेड पर लेट गए। उनकी पीठ तकिए पर थी और शरीर सीधा फैला हुआ था। मम्मी ने अपनी पैंटी के साथ उँगलियाँ डालीं और उसे धीरे से नीचे सरका दिया। पैंटी उनके पैरों से निकलकर बेड पर गिर गई। अब मम्मी भी पूरी तरह नंगी हो चुकी थीं।
मम्मी ने पापा के शरीर के ऊपर अपना रुख बदला। वो पापा की छाती की तरफ पीठ करके घुटनों के बल आगे बढ़ीं। फिर धीरे से अपना शरीर पापा के ऊपर लिटा दिया — इस तरह कि उनका मुँह पापा के लंड के पास था और उनका निचला हिस्सा पापा के चेहरे के ऊपर आ गया।
६९ पोजीशन।
पापा के दोनों हाथ मम्मी के कूल्हों पर आ गए। उन्होंने मम्मी को थोड़ा और अपने चेहरे के करीब खींचा। मम्मी के घुटने पापा के सिर के दोनों तरफ थे। पापा ने सिर उठाया और मम्मी की चूत के करीब अपना मुँह ले गए। मम्मी ने भी फिर से पापा के लंड को अपने हाथ में लिया और उसे अपने होठों के पास लाया।
दोनों एक-दूसरे के सामने थे — उल्टी दिशा में। मम्मी का सिर नीचे पापा के लंड की तरफ झुका हुआ था और पापा का चेहरा ऊपर मम्मी की चूत की तरफ। कमरे की हल्की रोशनी में दोनों के नंगे शरीर एक-दूसरे से सटे हुए साफ दिख रहे थे। मम्मी के बाल पापा के पेट पर बिखर गए थे। पापा के हाथ मम्मी की गांड को सहला रहे थे।
मम्मी ने फिर से लंड के सिर को अपने मुँह में लिया। इस बार उनकी पीठ थोड़ी मुड़ी हुई थी। पापा ने भी उसी समय मम्मी की चूत पर अपनी जीभ लगाई। मम्मी के शरीर में एक हल्की सिहरन दौड़ गई। दोनों ने लगभग एक साथ एक-दूसरे को मुँह लगाना शुरू कर दिया।
मैं खिड़की के पास खड़ा यह सब देख रहा था। मेरी साँसें खुद तेज हो चुकी थीं। अंदर पापा और मम्मी ६९ पोजीशन में एक-दूसरे से पूरी तरह उलझे हुए थे। मम्मी का सिर पापा के लंड पर ऊपर-नीचे हो रहा था और पापा का चेहरा मम्मी की जाँघों के बीच छिपा हुआ था। दोनों के शरीर हल्के-हल्के हिल रहे थे।
कमरे में सिर्फ उनके मुँह की गीली आवाजें और भारी साँसें गूँज रही थीं। मम्मी कभी-कभी लंड को मुँह से निकालकर साँस लेतीं और फिर से ले लेतीं। पापा के हाथ मम्मी के कूल्हों को दबाए हुए थे। दोनों पूरी तरह उस पल में डूबे हुए थे।
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