फार्महाउस की दो रातें 2
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सोफे पर हम दोनों अभी भी नंगे लेटे थे। मेरी साँसें धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं। उसका सिर मेरे सीने पर था, बाल मेरे शरीर पर फैले हुए। टीवी पर Sex Education की अगली एपिसोड चल रही थी, लेकिन कोई भी नहीं देख रहा था।
मैंने उसके बालों में उंगलियाँ फेरीं। “उठो… बेडरूम चलते हैं। यहाँ सोफा असहज हो रहा है।”
उसने आँखें खोलीं और धीरे से मुस्कुराई। “ठीक है… लेकिन उठा के ले चलो।”
मैं हँसा। खड़ा हुआ, उसे गोद में उठा लिया। उसका शरीर अभी भी गर्म और चिपचिपा था। मैं लिविंग रूम से निकलकर सीधे मास्टर बेडरूम की तरफ बढ़ा। रास्ते में हल्की रोशनी जल रही थी। कुक का कमरा दूसरी तरफ था, दरवाज़ा बंद।
बेडरूम में मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया। बड़ी किंग-साइज़ बेड, सफ़ेद चादरें, नरम तकिए। एसी पहले से चालू था। मैंने साइड की लाइट डिम कर दी और खिड़की के पर्दे पूरी तरह बंद कर दिए।
वो बिस्तर पर लेटी हुई मुझे देख रही थी। मैंने लुब्रिकेंट और कंडोम का पैकेट बेडसाइड टेबल पर रखा। फिर उसके पास लेट गया।
“अब पूरी रात हमारे पास है,” मैंने उसके कान में कहा।
उसने मुझे खींचकर अपने ऊपर लिटा लिया। किस शुरू हो गई – इस बार और भूखी। जीभ से जीभ लड़ रही थी। मेरे हाथ उसके पूरे शरीर पर घूम रहे थे – स्तन, कमर, जाँघें, फिर फिर से नीचे। वो पहले से ही गीली थी। मैंने दो उंगलियाँ अंदर डाल दीं और धीरे-धीरे घुमाने लगा। उसकी कमर उठने लगी।
“और अंदर…” उसने फुसफुसाया।
मैंने उंगलियों की गति बढ़ा दी। साथ में उसके स्तनों को मुँह में लिया। पहले एक, फिर दूसरा। दाँत से हल्के से काटा। वो कराह उठी और मेरे बालों को जकड़ लिया।
थोड़ी देर बाद मैंने उंगलियाँ निकालीं और कंडोम पहना। लुब्रिकेंट लगाकर उसके ऊपर आ गया। इस बार उसने खुद पैर फैलाए और मुझे गाइड किया। मैंने एक झटके में पूरा अंदर तक धकेल दिया। उसने जोर से साँस ली।
“आह… गहरा…”
मैंने मूवमेंट शुरू की। पहले लंबी और धीमी। हर धक्के के साथ उसका शरीर बिस्तर पर सरक रहा था। मैंने उसकी दोनों कलाई पकड़कर सिर के ऊपर दबा दीं। वो पूरी तरह मेरे नीचे थी। मेरी गति बढ़ती गई। पलंग की चरमराहट कमरे में गूँज रही थी।
लगभग पंद्रह मिनट बाद मैंने पोजीशन बदली। उसे घुमाकर चौपाया कर दिया – हाथ-घुटनों के बल। मैंने पीछे से एंट्री की। इस एंगल में और गहराई मिल रही थी। मैंने उसके कूल्हों को मज़बूती से पकड़ा और जोर-जोर से पेलने लगा। हर धक्के के साथ उसकी कराहें तेज़ होती गईं। कभी-कभी वो तकिए में मुँह दबा लेती थी ताकि आवाज़ कम निकले।
“जोर से… और जोर से…” वह बार-बार कह रही थी।
मैंने एक हाथ आगे बढ़ाकर उसके स्तन को मसला, दूसरे हाथ से उसके बाल पकड़कर हल्के से खींचे। उसकी कमर और अधिक मुड़ गई। मैंने गति इतनी बढ़ा दी कि बिस्तर की हेडबोर्ड दीवार से टकराने लगी।
जब वो चरम पर पहुँची तो उसका पूरा शरीर काँप उठा। अंदर की दीवारें मेरे चारों ओर सिकुड़ गईं। मैंने खुद को रोके रखा। कंडोम अभी भी सही जगह पर था। मैंने गति धीमी की लेकिन निकाला नहीं।
थोड़ी देर आराम करने के बाद मैंने उसे फिर से घुमाया। अब वो मेरे ऊपर बैठ गई – कॉउगर्ल। उसने खुद एडजस्ट किया और बैठते ही जोर से नीचे आ गई। दोनों हाथ मेरे सीने पर रखे और ऊपर-नीचे होने लगी। उसके स्तन मेरे चेहरे के सामने झूल रहे थे। मैंने दोनों को पकड़कर मुँह में ले लिया।
वो खुद तेज़ी से मूव कर रही थी। पसीना उसकी पीठ पर चमक रहा था। एसी की ठंडी हवा के बावजूद दोनों के शरीर गर्म थे। मैंने उसके कूल्हों को पकड़कर और तेज़ कर दिया। कुछ देर बाद मैं भी पहुँच गया। कंडोम के अंदर सब कुछ छोड़ दिया।
वो मेरे ऊपर गिर पड़ी। दोनों की साँसें तेज़ चल रही थीं।
“पानी…” उसने धीमी आवाज़ में कहा।
मैं उठा, साइड टेबल से पानी की बोतल ली और उसे पिलाई। खुद भी पीया। फिर वापस बिस्तर पर आ गया।
रात अभी बहुत बाकी थी।
हम दोनों कुछ देर चुपचाप लेटे रहे। मैंने उसका शरीर सहलाया – पीठ पर, कमर पर, जाँघों पर। फिर धीरे-धीरे मेरा हाथ फिर से उसके पैरों के बीच पहुँच गया। वो अभी भी गीली थी। मैंने उंगलियों से खेलना शुरू किया। उसने आँखें बंद रखीं लेकिन पैर और फैला दिए।
इस बार मैं नीचे सरक गया। उसके पैरों को अपने कंधों पर रखकर मुँह से शुरू किया। जीभ से धीरे-धीरे चाटा, फिर क्लिट पर फोकस किया। उसने मेरे बाल पकड़ लिए। मैंने दो उंगलियाँ अंदर डालकर साथ-साथ मूव किया। उसकी कराहें फिर शुरू हो गईं।
जब वो दूसरी बार आने वाली हुई तो मैंने और तेज़ी से चाटा। वो मेरे मुँह पर और ज़ोर से दब गई। पूरा शरीर ऐंठ गया। मैंने तब तक नहीं छोड़ा जब तक उसकी काँपना बंद नहीं हुई।
उसके बाद मैंने नया कंडोम पहना। लुब्रिकेंट दोबारा लगाया। इस बार मैंने उसकी एक टाँग अपने कंधे पर रखी और साइड से एंट्री की। इस पोजीशन में हम दोनों एक-दूसरे को देख सकते थे। मैंने धीरे-धीरे लेकिन गहरे धक्के देने शुरू किए। उसके होंठ मेरे होंठों से मिले। किस और सेक्स एक साथ चल रहा था।
रात के लगभग दो बज गए थे। हमने फिर से पोजीशन बदली। मैंने उसे बिस्तर के किनारे बैठाया, खुद खड़ा होकर उसके पैर फैलाए और खड़े-खड़े पेलने लगा। इस एंगल में मेरी पूरी ताकत लग रही थी। हर धक्के के साथ उसकी आवाज़ निकल रही थी। कभी-कभी वो मेरे हाथ पकड़ लेती थी, कभी बिस्तर की चादर मरोड़ लेती थी।
तीसरी बार जब हम दोनों लगभग एक साथ पहुँचे तो मैं उसके अंदर ही रुक गया। कंडोम भरा हुआ था। मैंने सावधानी से निकाला, बाँधकर कूड़ेदान में फेंका और उसके पास लेट गया।
अब सच में थकान हो रही थी। लेकिन मन अभी भी और चाह रहा था।
मैंने उससे पूछा, “और करोगी?”
उसने आँखें半-खुली रखीं और सिर हिलाया। “थोड़ा आराम… फिर।”
हम दोनों चादर ओढ़कर लेट गए। उसका सिर फिर मेरे सीने पर था। मैंने लाइट बंद कर दी। कमरे में सिर्फ एसी की आवाज़ और हमारी साँसें बची थीं।
लगभग पैंतालीस मिनट बाद मेरी नींद खुली। वो अभी भी मेरे ऊपर लेटी थी, लेकिन अब जाग रही थी। उसका हाथ मेरे लंड पर था, धीरे-धीरे सहला रहा था। मैं तुरंत सख्त हो गया।
“फिर से?” मैंने पूछा।
“हम्म…” उसने बस इतना कहा और कंडोम का पैकेट खुद उठाया। इस बार उसने ही मुझे कंडोम पहनाया। लुब्रिकेंट लगाया। फिर मेरे ऊपर बैठ गई।
अब की बार और भी गीली थी। उसने आसानी से पूरा अंदर ले लिया और तेज़ी से ऊपर-नीचे होने लगी। मैंने उसके कूल्हे पकड़ रखे थे। बिस्तर फिर से चरमरा रहा था। उसकी कराहें अब और खुलकर निकल रही थीं। डर नहीं था कि कोई सुनेगा – फार्महाउस काफी बड़ा था और कुक दूर था।
मैंने उसे नीचे गिराया और मिशनरी में जोरों से पेलने लगा। उसकी टाँगें मेरे कमर के चारों ओर लिपटी हुई थीं। नाखून मेरी पीठ पर लग रहे थे। दर्द और मज़े का मिश्रण था।
रात के चार बज चुके थे जब हमने चौथी बार खत्म किया। इस बार दोनों सच में थक गए थे। शरीर पसीने से तर थे। चादरें गंदी हो चुकी थीं। मैंने साफ चादर निकाली और बिस्तर ठीक किया। फिर दोनों नंगे ही लेट गए।
उसने मेरी उंगली पकड़ ली। “कल और जगहों पर करेंगे… पूल में, जकूज़ी में, गार्डन में…”
मैंने उसके माथे पर किस किया। “जो कहोगी।”
बाहर धीरे-धीरे सुबह होने वाली थी। पहली रात खत्म हो चुकी थी। लेकिन दो दिन अभी बाकी थे। और बहुत कुछ बाकी था।
मैंने उसे अपनी बाँहों में भर लिया। उसकी साँसें धीमी पड़ने लगीं। मैं भी आँखें बंद किए हुए उसके शरीर की गर्माहट महसूस कर रहा था।
फार्महाउस की पहली रात… यादगार बन चुकी थी।
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