LoveStoryHub – हिंदी सेक्स कहानियाँ
होम All Categories
फर्स्ट टाइम

मासी के साथ छुट्टियाँ। 2

· Online Admin


मैंने मासी का हाथ पकड़ लिया।

“कोई बात नहीं मासी। आपने बता दिया। अब देखो… पक्का पहली बार है तो थोड़ा दर्द होगा… लेकिन फिर मजा आएगा। आप रेडी हो?”

मासी ने धीरे से सिर हिलाया। उनकी आँखों में डर और उत्सुकता दोनों थे।

मैंने उन्हें बेड पर लिटा दिया। ऊपर से किस करना शुरू किया। पहले होंठों पर हल्के से, फिर गहराई से। जीभ मिलाने लगा। मासी पहले सहम गईं, लेकिन धीरे-धीरे जवाब देने लगीं। उनका शरीर काँप रहा था।

किस करते-करते मेरा हाथ उनके नाइट ड्रेस के नीचे चला गया। कमर सहलाई। फिर ऊपर की तरफ बढ़ाया। ड्रेस के अंदर कोई ब्रा नहीं थी। सीधे उनके नरम स्तन छू गए। मासी की साँस रुक गई। मैंने किस नहीं रोका। उंगलियों से निप्पल को हल्के से दबाया। वो सख्त हो चुके थे।

थोड़ी देर बाद मैंने ड्रेस की पतली पट्टियाँ कंधों से उतार दीं। ड्रेस नीचे सरक गई। अब मासी सिर्फ पैंटी में रह गई थीं। उनके बड़े, गोरे स्तन पूरी तरह बाहर थे। निप्पल गुलाबी और तने हुए।

मैंने एक स्तन को हाथ में लिया और दूसरे को मुँह में। धीरे-धीरे चूसने लगा। जीभ से निप्पल को घुमाया, हल्के दाँतों से काटा। मासी की कमर उठने लगी। उनके हाथ मेरे बालों में थे। “किरण… धीरे…” वो फुसफुसाईं।

मैंने दोनों स्तन बारी-बारी से चूसे। किस उनके गले पर, कॉलरबोन पर, फिर वापस होंठों पर। एक हाथ से पैंटी के ऊपर से उनकी चूत सहला रहा था। पैंटी पहले से थोड़ी गीली हो चुकी थी।

मासी की आँखें बंद थीं। साँसें तेज चल रही थीं। शरीर लाल हो रहा था। मैंने धीरे-धीरे पैंटी का इलास्टिक पकड़ा, लेकिन अभी नहीं उतारा। सिर्फ ऊपर से सहलाते हुए स्तन चूसता रहा।

कमरे में सिर्फ हमारी साँसें और नेटफ्लिक्स की हल्की आवाज़ थी। बेड पर गुलाब की पंखुड़ियाँ बिखरी हुई थीं। मासी पहली बार किसी के स्पर्श में थीं… और मैं धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था।

मैंने धीरे-धीरे आगे बढ़ा।

पहले अपने कपड़े उतारे। शर्ट, पैंट, फिर अंडरवियर। मेरा लंड पूरी तरह बाहर आ गया—बारह इंच लंबा और साढ़े तीन इंच मोटा। नसें फूली हुई थीं। सिरे से पहले से चमक रहा था।

मासी की आँखें फटी की फटी रह गईं। वो बेड पर लेटी हुई मेरा लंड घूर रही थीं। उनके चेहरे पर डर साफ दिख रहा था।

मैंने उनकी पैंटी भी धीरे से नीचे खींच ली। अब वो पूरी नंगी थीं। चिकनी, गोरी चूत… बिल्कुल साफ। मैंने लुब्रिकेंट लिया और उनकी चूत पर लगाया। उंगलियों से हल्के से सहलाया। फिर कंडोम पहना।

लंड का मोटा सिरा उनकी चूत के मुँह पर रखा। मासी का शरीर काँप रहा था।

“किरण… धीरे… बहुत बड़ा है…”

मैंने हल्का दबाव दिया। सिर्फ सिरा अंदर गया। मासी जोर से चिल्लाईं। आँखों से आँसू आ गए। मैं रुका नहीं। धीरे-धीरे और धक्का दिया। दो इंच… तीन… चार…।

पाँच इंच तक पहुँचाते-पहुँचाते मासी जोर-जोर से चीख रही थीं। “आह्ह… निकाल… दर्द… बहुत दर्द हो रहा है किरण…!”

उनके नाखून मेरी पीठ पर गड़ गए। मैंने उनके मुँह पर हाथ रखा ताकि चीख कुछ दबे, लेकिन वो फिर भी चिल्ला रही थीं। खून की हल्की नमी महसूस हुई। कंडोम पर लाल निशान पड़ने लगे थे।

मैंने रफ्तार बहुत धीमी रखी। सिर्फ पाँच इंच ही अंदर-बाहर कर रहा था। पूरा नहीं डाला। मासी की चूत बहुत टाइट थी। हर छोटे धक्के पर वो तड़प रही थीं। आँसू उनके गालों पर बह रहे थे।

फिर भी मैं रुका नहीं। धीरे-धीरे, लेकिन लगातार। उनके स्तन चूसता रहा, गर्दन चूमता रहा, कान में धीरे-धीरे बोलता रहा—“सह लो मासी… थोड़ा और… फिर मजा आएगा।”

बीस मिनट के आसपास मासी की चीखें थोड़ी बदल गईं। दर्द के साथ हल्की कराहें भी मिलने लगीं। उनकी चूत थोड़ी ढीली पड़ने लगी थी, लेकिन अभी भी बहुत कस रही थी। मैंने रफ्तार हल्की बढ़ाई। पाँच इंच ही।

करीब तीस मिनट बाद मासी की कमर अचानक उठी। शरीर अकड़ गया। वो जोर से काँपते हुए चरम पर पहुँचीं। उनकी चूत मेरे लंड को जोरों से निचोड़ रही थी। आँखें बंद, मुँह खुला।

मैंने थोड़ी देर धीमे धक्के दिए। फिर दोबारा शुरू किया। मासी अभी भी दर्द से कराह रही थीं, लेकिन अब विरोध कम था। दूसरी बार भी करीब दस मिनट बाद वो झड़ गईं। इस बार उनकी आवाज़ में दर्द और मजे का मिश्रण था।

मैंने लंड बाहर निकाला।

कंडोम पर खून लगा हुआ था। लाल-लाल धार। मासी की चूत से भी हल्का खून रिस रहा था। वो बेड पर लेटी हाँफ रही थीं। आँखें बंद। शरीर पसीने और खून से चिपचिपा।

पाँच इंच ही अंदर गया था… और हालत ये थी।

मैं उनके बगल में लेट गया। दोनों की साँसें तेज चल रही थीं। कमरे में सिर्फ भारी साँसें गूँज रही थीं।

पाँच मिनट बाद मैंने कंडोम बदला। नया कंडोम पहना और भरपूर लुब्रिकेंट लगाया। मासी अभी भी बेड पर लेटी हाँफ रही थीं। उनकी चूत लाल और थोड़ी सूजी हुई थी। खून के हल्के निशान अभी भी दिख रहे थे।

मैंने उनके पैर फैलाए। लंड का मोटा सिरा फिर से उनकी चूत पर रखा। इस बार कोई धीरे-धीरे शुरू नहीं किया। एक ही जोरदार धक्के में पाँच इंच अंदर घुसा दिया।

मासी की तेज चीख निकल गई।

“आआाह्ह्ह… किरण… निकाल… बहुत दर्द…!”

मैं रुका नहीं। तुरंत जोर-जोर से पेलने लगा। हर ठोकर पर उनका शरीर हिल रहा था। मासी जोर-जोर से चिल्ला रही थीं। आँखों से आँसू की धार बहने लगी। दोनों हाथों से मेरी छाती धकेलने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन ताकत नहीं थी।

“दर्द… बहुत दर्द हो रहा है… किरण छोड़… प्लीज़…!”

उनकी आवाज़ में रोना साफ था। गले से सूखी चीखें निकल रही थीं। मैंने उनके कूल्हे पकड़कर और तेज ठोकरें मारीं। पाँच इंच ही, लेकिन बहुत जोर से। हर धक्के के साथ उनकी चूत से गीली और खून मिली आवाज़ आ रही थी।

मासी का चेहरा मुड़ गया था। आँसू आँखों से बहकर कानों तक जा रहे थे। वो सिर इधर-उधर हिला रही थीं। “नहीं… और मत मारो… सह नहीं पा रही… आआह्ह्ह…!”

मैंने उनके मुँह पर हाथ रखा, लेकिन चीखें दब नहीं पाईं। वो मेरे हाथ के नीचे भी चिल्ला रही थीं। नाखून मेरी पीठ पर गड़ गए। खून की हल्की लकीरें खिंच गईं।

बीस मिनट हो चुके थे। मासी की आवाज़ बैठने लगी थी, लेकिन दर्द कम नहीं हुआ था। वो अब रोते हुए कराह रही थीं। “किरण… बहुत हो गया… दर्द… अंदर जल रहा है…!”

मैंने रफ्तार नहीं घटाई। उल्टे और तेज कर दी। उनके स्तन मुँह में ले लिए और जोर से चूसने लगा। दाँतों से निप्पल काटे। मासी की चीखें और तेज हो गईं। शरीर अकड़ रहा था, लेकिन मैं पेलता रहा।

तीस मिनट… चालीस मिनट…

मासी अब लगभग बेहोश सी हो रही थीं। आँखें आधी खुली, मुँह से सिर्फ “आह्ह… आह्ह…” की आवाज़ निकल रही थी। कभी-कभी जोर से रो पड़तीं। “निकल… प्लीज़ निकल… बहुत दर्द…”

मैंने उनके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और और गहराई से ठोकरें मारीं। पाँच इंच का लंड उनकी टाइट चूत को बार-बार चीर रहा था। खून कंडोम पर फिर से लगने लगा था।

पचास मिनट के आसपास मासी की टाँगें काँपने लगीं। शरीर में कंपन दौड़ गया। दर्द के बावजूद उनकी चूत जोर से सिकुड़ी और वो एक बार झड़ गईं। लेकिन चीख दर्द वाली ही थी। आँसू रुक नहीं रहे थे।

मैं रुका नहीं। एक घंटे तक लगभग नॉन-स्टॉप पेलता रहा। मासी की आवाज़ अब पूरी तरह बैठ चुकी थी। सिर्फ रोने की हल्की आवाज़ और भारी साँसें बच गई थीं। उनका पूरा शरीर पसीने और खून से चिपचिपा हो चुका था।

आखिर में मेरा शरीर अकड़ गया। गर्म वीर्य कंडोम में छूट गया। एक… दो… तीन झटके। मैं उनके ऊपर गिर गया।

लंड अभी भी अंदर था। मासी आँखें बंद किए रो रही थीं। सीने से हिचकिचाहट भरी साँसें ले रही थीं।

एक घंटे का राउंड खत्म हुआ था।

मासी थोड़ी शांत हुई थीं, लेकिन दर्द कम नहीं हो रहा था। उनकी चूत साफ सूज रही थी। मुझे पता चल गया था कि अगर अब और किया तो अगले दो-तीन दिन वो कुछ नहीं करने देंगी।

मैंने सिर्फ पाँच मिनट का ब्रेक लिया। नया कंडोम पहना। भरपूर लुब्रिकेंट लगाया।

मासी अभी भी बेड पर लेटी हाँफ रही थीं। आँखें लाल थीं। चेहरे पर आँसुओं के निशान थे।

मैंने उनके दोनों पैर उठाकर अपने कंधों पर रख दिए। इस पोजीशन में उनकी चूत पूरी तरह खुल गई। मैंने लंड का सिरा रखा… और एक ही झटके में पहले के पाँच इंच के साथ और पाँच इंच अंदर धकेल दिए।

मासी की जोरदार चीख निकली।

“आआआाह्ह्ह… किरण… निकाल… पूरी अंदर चली गई… बहुत दर्द…!”

मैं रुका नहीं। चार-पाँच और जोरदार ठोकरों में बाकी का लंड भी अंदर घुसा दिया। पूरा बारह इंच। जड़ तक।

मासी का शरीर अकड़ गया। आँखें फटी की फटी रह गईं। मुँह खुला का खुला रह गया। फिर एक लंबी, कर्कश चीख निकली। वो तड़पने लगीं। दोनों हाथों से मेरी छाती और कंधे धकेलने की कोशिश करने लगीं। पैर मेरे कंधों पर काँप रहे थे।

“निकल… प्लीज़ निकल… फट गई… अंदर जल रहा है… आआाह्ह्ह…!”

आँसू उनकी आँखों से धार बनकर बहने लगे। वो जोर-जोर से रोने लगीं। हिचकिचाहट भरी साँसें ले रही थीं। गला बैठ रहा था, लेकिन चीखना नहीं रुक रहा था।

मैंने उनकी कमर पकड़ ली और एक ही पोजीशन में जोर-जोर से पेलने लगा। पूरा लंड हर बार बाहर निकलकर फिर जड़ तक अंदर चला जाता। हर ठोकर पर मासी की चीख निकलती। शरीर तड़पता। वो सिर इधर-उधर पटक रही थीं। नाखून मेरी पीठ पर गड़ गए। खून की लकीरें खिंच गईं।

“किरण… छोड़… बहुत हो गया… दर्द सह नहीं पा रही… रो… रो… आआह्ह्ह…!”

मैंने रफ्तार नहीं घटाई। उल्टे और तेज कर दी। उनके स्तन मुँह में ले लिए और जोर से चूसने लगा। दाँतों से निप्पल काटे। मासी और जोर से चिल्लाईं। आँसू अब कानों तक बह रहे थे। चेहरा पूरी तरह मुड़ चुका था।

बीस मिनट… तीस मिनट…

मासी की आवाज़ बैठने लगी थी। अब सिर्फ कर्कश कराहें और रोने की आवाज़ निकल रही थी। कभी-कभी वो मेरे नाम लेकर गिड़गिड़ातीं—“किरण… प्लीज़… निकाल… मर जाऊँगी…!” लेकिन मैं नहीं रुका।

पूरा लंड उनकी सूजी हुई चूत को बार-बार चीर रहा था। खून कंडोम पर फिर से लगने लगा था। हर धक्के के साथ उनकी चूत से खून और लुब्रिकेंट की मिलावट निकल रही थी।

चालीस मिनट… पचास मिनट…

मासी अब लगभग बेहोशी की हालत में थीं। आँखें आधी खुली। मुँह से सिर्फ “आह्ह… आह्ह…” की कमजोर आवाज़ निकल रही थी। शरीर में कभी-कभी तेज कंपन दौड़ जाता। रोना अभी भी जारी था—हल्की हिचकिचाहट के साथ।

मैंने एक घंटे तक एक ही पोजीशन में नॉन-स्टॉप मारा। उनके पैर मेरे कंधों पर ही रहे। पूरा बारह इंच हर बार अंदर जाता रहा।

आखिर में मेरा शरीर अकड़ गया। गर्म वीर्य की धार कंडोम में छूट गई। एक के बाद एक जोरदार झटके। मैं उनके ऊपर गिर गया।

लंड अभी भी पूरा अंदर था।

मासी आँखें बंद किए रो रही थीं। सीने से तेज हिचकिचाहट भरी साँसें ले रही थीं। पूरा शरीर काँप रहा था।

एक घंटे का ये राउंड खत्म हुआ था।

मासी का पूरा शरीर काँप रहा था। वो जोर-जोर से रो रही थीं। आँसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।

“किरण… क्या कर दिया तूने… मेरी चूत का गड्ढा बना दिया… बहुत जोर से दर्द हो रहा है…!”

बेड पूरी तरह खून से लाल हो चुका था। चादर के बीच का हिस्सा पूरी तरह भीग गया था। ऐसा लग रहा था जैसे कोई बहुत जोर की चुदाई हुई हो। खून की धार अभी भी हल्की-हल्की रिस रही थी।

मैंने धीरे से उनकी चूत साफ करने की कोशिश की। जैसे ही तौलिया लगाया, मासी जोर से चिल्लाईं। दर्द इतना था कि वो तड़प गईं। मैंने उन्हें पानी पिलाया, लेकिन रोना और दर्द थमने का नाम नहीं ले रहा था। चूत पूरी तरह सूजकर लाल हो गई थी।

मैंने रिसॉर्ट की सर्विस को कॉल किया। एक लड़की बेडशीट बदलने आई। कमरे में खून देखकर वो चौंक गई। उसका चेहरा पीला पड़ गया। उसने जल्दी-जल्दी चादर बदली और जाते-जाते मासी से बोली, “कुछ मदद चाहिए तो बताइएगा।”

मासी रोते हुए बोलीं, “हाँ…”

लड़की चली गई।

अब कमरे में फिर से हम दोनों नंगे थे। मासी करवट लेकर लेटी हुई थीं। दोनों हाथों से अपनी चूत दबाए हुए। दर्द से चेहरा मुड़ा हुआ था।

“किरण… तुम कपड़े पहन लो… मुझे डर लग रहा है…” वो रोते हुए बोलीं।

मैंने कपड़े पहन लिए। फिर उनके पास बैठकर कहा, “अब सो जाओ। तुम्हें छूना भी नहीं।”

मासी ने आँसू पोंछते हुए कहा, “मुझे तो छूना भी मत…”

मैंने हल्के से जवाब दिया, “मुझे तो छूना भी नहीं था। लेकिन आपको सुहागरात का डेकोरेशन देखकर पैसे वसूल करने थे। फिर ये तो आप हो… वरना जो प्रिया थी, उस दिन चार राउंड मारे थे। उसको आपसे भी ज्यादा दर्द हुआ था। लेकिन मैं नहीं रुका था।”

मासी ने गिड़गिड़ाते हुए कहा, “प्लीज़ किरण… ऐसा मत करो। बस… कल सुबह प्रिया को बुला लेना यहाँ पे। वो आ जाएगी तो…”

मैंने सिर हिलाया, “ठीक है। अब सो जाते हैं।”

रात भर मासी कराहती रही। कभी रो लेतीं, कभी चुप हो जातीं। उनकी चूत इतनी सूज गई थी कि जाँघें भी नहीं खोल पा रही थीं।

सुबह हुई।

मैंने प्रिया को कॉल किया।

“प्रिया, लोनवाला में हूँ। मासी के साथ। उनकी हालत खराब है। तू आ सकती है क्या?”

प्रिया ने तुरंत कहा, “आ रही हूँ। दो-तीन घंटे में पहुँच जाऊँगी।”

दोपहर से पहले प्रिया रिसॉर्ट पहुँच गई।

प्रिया के आने से पहले मैंने मासी से साफ कह दिया।

“मासी, मुझे प्रिया की गाँड मारनी है। आप मुझे सपोर्ट करोगी? और प्रिया से बोलना कि एक बार मार लेने दो।”

मासी ने थकी हुई आँखों से मेरी तरफ देखा। दर्द अभी भी साफ था, लेकिन उन्होंने धीरे से सिर हिला दिया।

थोड़ी देर बाद प्रिया रूम में आई। उसने मासी की हालत देखी तो थोड़ी देर चुप रही। फिर तीनों ने साथ में लंच किया। बातें हल्की-फुल्की ही हुईं। मासी ज्यादा बोल नहीं पा रही थीं।

लंच के बाद तीनों रूम में आराम करने लगे। मैं बीच में लेटा था। एक तरफ मासी, दूसरी तरफ प्रिया। एसी की ठंडी हवा चल रही थी।

थोड़ी देर बाद मेरा हाथ प्रिया की गाँड पर चला गया। उसने हल्के से पकड़ लिया और फुसफुसाई, “रुक जाओ किरण… रात को। अभी थोड़ा आराम करते हैं।”

मैंने हाथ हटा लिया।

तीनों थोड़ी देर में सो गए।

शाम हुई। उठे। फिर नौ बजकर तीस मिनट पर डिनर किया। रूम में ही।

डिनर खत्म होते-होते रात गहरी हो चुकी थी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *