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मासी के साथ छुट्टियाँ। 1

· Online Admin


मेरा नाम किरण है। उम्र बीस साल।

मेरी मासी सिर्फ तेईस साल की हैं। एकदम पतली, गोरी और बहुत सेक्सी। देखने में किसी मॉडल जैसी लगती हैं। मासी की शादी नहीं हुई है। वो एक अच्छी कंपनी में काम करती हैं।

कुछ दिन पहले मासी को कंपनी की तरफ से रिवॉर्ड मिला। लोनवाला में एक सात स्टार रिसॉर्ट का दस दिन का कपल्स पैकेज। खाने-पीने, रहने, घूमने… सब कंपनी की तरफ से फ्री। क्योंकि अवॉर्ड कपल्स के लिए था, इसलिए एक व्यक्ति को साथ ले जाना जरूरी था।

एक शाम मासी का फोन मम्मी के पास आया।

मम्मी ने फोन लगाया तो मासी बोलीं, “दीदी, कंपनी ने लोनवाला का पैकेज दिया है। दस दिन का। बहुत अच्छा रिसॉर्ट है। लेकिन अकेली नहीं जा सकती… कोई साथ चाहिए। किरण को भेज दो मेरे साथ।”

मम्मी थोड़ी हैरान हुईं। “किरण को? वो तो अभी बीस का ही है।”

मासी हँसीं, “कोई बात नहीं। वो मेरे साथ रहेगा। मैं संभाल लूँगी। तुम टेंशन मत लो। पूरा खर्चा कंपनी दे रही है। बस किरण को तैयार कर दो।”

मम्मी ने थोड़ी देर सोचा, फिर मुझसे पूछा। मैंने तुरंत हाँ कर दी। मन में उत्साह था। मासी के साथ दस दिन… लोनवाला… सात स्टार रिसॉर्ट।

मैंने सामान पैक करना शुरू कर दिया। दो दिन बाद हमें निकलना था।

शॉपिंग हो गई। कपड़े, जूते, छोटी-मोटी चीजें… सब ले लिया।

शाम को मासी का फोन आया। बोलीं, “किरण, कपड़ों के अलावा कुछ भी साथ मत लेना। वहाँ सब मिल जाएगा। कल सुबह आठ बजे रेडी रहना।”

मम्मी ने मुझे समझाया, “अपना और मासी का ध्यान रखना। कोई लापरवाही नहीं।”

रात को पापा घर आए। उन्होंने सुना था कि मैं दस दिन के लिए जा रहा हूँ। हमारे घर में सिर्फ तीन लोग रहते हैं। बहन यूके में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है।

पापा ने पूछा, “किरण, सच में जा रहा है कल?”

मैंने कहा, “हाँ पापा। आप और मम्मी भी चलो न साथ। रिसॉर्ट बहुत अच्छा है, मैंने ऑनलाइन देखा है। सब मजे करेंगे।”

पापा ने सिर हिलाया, “नहीं बेटा… अभी काम बहुत है। तुम जाओ, ध्यान रखना।”

थोड़ी देर बातें हुईं। फिर सब सो गए।

अगली सुबह ठीक आठ बजे हम घर से निकले। मासी ने अपनी गाड़ी निकाली थी। लोनवाला का रास्ता करीब नौ घंटे का था। रास्ते में हमने बातें कीं, हल्के-फुल्के मजाक हुए। बीच-बीच में चाय-पानी के लिए रुके। पहाड़ों का नजारा शुरू हो गया था। हवा ठंडी होने लगी।

रात के आठ बजे हम रिसॉर्ट पहुँचे।

सात स्टार रिसॉर्ट बाहर से ही अलग दिख रहा था। विशाल आयरन गेट पर सिक्योरिटी गार्ड खड़े थे। अंदर घुसते ही लंबा पाम ट्री लगा रास्ता शुरू हो गया। दोनों तरफ हरी-भरी लॉन और फूलों की क्यारियाँ थीं। रिसॉर्ट का मेन बिल्डिंग पत्थर और शीशे से बना हुआ था, बहुत ऊँचा और आधुनिक। सामने बड़ा फव्वारा चल रहा था, जिसमें रंग-बिरंगी लाइट्स जल रही थीं।

वालेट पार्किंग वाले आए और गाड़ी ले गए। लॉबी में कदम रखते ही ठंडी खुशबू महसूस हुई। संगमरमर का फर्श चमक रहा था। ऊँची छत पर क्रिस्टल झाड़-फानूस लटक रहे थे। रिसेप्शन पर स्टाफ ने मुस्कुराते हुए स्वागत किया। चारों तरफ शांत और लग्जरी माहौल था। बाहर की तरफ स्विमिंग पूल की नीली रोशनी झलक रही थी। पहाड़ों की तरफ से हल्की ठंडी हवा आ रही थी।

मासी ने चेक-इन करवाया। स्टाफ ने हमें स्वागत ड्रिंक दी।

अब हम रूम की तरफ बढ़ने वाले थे।

हम रूम की तरफ बढ़े। लिफ्ट से ऊपर गए। गलियारा शांत और महंगा लग रहा था। स्टाफ ने दरवाजा खोला और चाबी देकर चला गया।

मासी के पास जो कूपन कंपनी ने दिया था, वो हनीमून कपल कूपन था। इसलिए रूम पूरी तरह उसी हिसाब से सजाया गया था।

दरवाजा खुलते ही अंदर का नजारा देखकर दोनों थोड़ी देर रुक गए।

रूम बहुत बड़ा था। बीच में एक विशाल राउंड शेप का बेड था। लाल और सुनहरी चादरें बिछी हुई थीं। बेड पर गुलाब की पंखुड़ियाँ बिखेरी गई थीं। सिरहाने दोनों तरफ दिल के आकार के तकिए रखे थे। छत पर शीशे का बड़ा पैनल लगा था, जिसमें पूरा बेड साफ दिख रहा था। बेड के चारों तरफ हल्की लाल रोशनी की स्ट्रिप्स जल रही थीं।

एक तरफ प्राइवेट जैकुज़ी थी। गोल, बड़ी और चमकदार। उसके किनारे पर भी फूल सजाए गए थे। जैकुज़ी से सीधा प्राइवेट बालकनी का नजारा दिख रहा था। बालकनी में दो आरामदेह लाउंज चेयर और एक छोटा टेबल रखा था। बाहर पहाड़ों की अंधेरी चोटियाँ और ठंडी हवा आ रही थी।

दूसरी तरफ एक खास सोफा था। देखने में सामान्य लग रहा था, लेकिन उसके कोण और ऊँचाई से साफ समझ आ रहा था कि वो अलग-अलग पोजीशन के लिए बनाया गया है। उसके पास एक छोटी सी टेबल पर एक बुकलेट रखा था — “Position Cards”। अंदर रंगीन तस्वीरों के साथ अलग-अलग आसन बने हुए थे।

दीवार पर एक बहुत बड़ी टीवी लगी थी। उसके नीचे मिनिबार और एक छोटी कैबिनेट थी। कैबिनेट खोलने पर अंदर कंडोम के कई पैकेट, लुब्रिकेंट की दो बोतलें और कुछ सुगंधित मोमबत्तियाँ रखी हुई थीं। सब कुछ नये और पैक में थे।

कमरे में हल्की रोमांटिक खुशबू फैली हुई थी। लाइट्स डिम रखी गई थीं। हर कोने में छोटे-छोटे लाल गुलाब के गुलदस्ते रखे थे। बेड के पास एक छोटी ट्रे पर चॉकलेट और स्ट्रॉबेरी भी सजाई गई थी।

पूरा रूम हनीमून नाइट जैसा सजाया गया था। सात स्टार रिसॉर्ट का लग्जरी और सेक्सी माहौल एक साथ मौजूद था।

मासी ने रूम को घूरते हुए धीरे से कहा, “ये तो… पूरा हनीमून वाला रूम है।”

मैं चुपचाप खड़ा रहा। कमरे का हर कोना बता रहा था कि ये सिर्फ रहने के लिए नहीं बनाया गया था।

मासी ने रिसेप्शन पर कॉल किया। बोलीं, “मुझे दूसरा रूम मिल सकता है क्या?”

रिसेप्शन वाले ने साफ मना कर दिया, “नहीं मैडम, नहीं मिल सकता। आपके कूपन पर लिखा हुआ है… आप पढ़ लीजिए।”

मासी कुछ नहीं कर सकती थीं। उनकी कंपनी की पॉलिसी थी कि जो रिवॉर्ड मिला है, वो एक बार में ही यूज करना पड़ेगा। और मासी ने रिसॉर्ट में मेरा नाम अपने बॉयफ्रेंड के रूप में लिखवा रखा था।

मासी ने हल्के से साँस छोड़ते हुए कहा, “ठीक है।”

रिसेप्शन वाली बोली, “आप फ्रेश हो जाइए। आपके लिए हम रूम में ही डिनर लगवा देते हैं।”

बाथरूम में लॉक नहीं था। पूरा ग्लास था और बाहर पर्दा लगा हुआ था। नहाते समय कोई भी पर्दा हटाकर देख सकता था। हम दोनों थोड़े असहज हुए, लेकिन एक-एक करके फ्रेश हो गए।

मुझे लगने लगा था कि ये सब मासी का ही प्लान है। क्योंकि जब मासी चेंज करके बाहर आईं तो उन्होंने एकदम हनीमून वाला नाइट ड्रेस पहना था। ब्रा नहीं पहनी थी। डीप नेकलाइन में उनकी बड़ी छातियों की दरार साफ दिख रही थी। ड्रेस कमर से थोड़ा ही नीचे तक थी, जिससे उनके लंबे और चिकने पैर पूरी तरह नजर आ रहे थे। शरीर एकदम वैक्स किया हुआ था। बिकिनी लाइन भी पूरी साफ। बड़े स्तन ड्रेस के अंदर से उभरे हुए थे।

डिनर आ गया। स्टाफ ने रूम के डाइनिंग एरिया में टेबल लगा दी। दो कुर्सियाँ और टेबल। रूम इतना बड़ा था कि एक तरफ पूरा डाइनिंग कॉर्नर बना हुआ था।

मैंने हैरानी से पूछा, “मासी, हमने तो ऑर्डर दिया ही नहीं?”

मासी मुस्कुराईं, “पूरे दस दिन का ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर… मेन्यू उन्हें पहले से दिया हुआ है।”

हम दोनों टेबल पर बैठ गए। डिनर शुरू हो गया। मासी के नाइट ड्रेस में उनका शरीर हर बार झुकने पर और ज्यादा खुलता जा रहा था। कमरे में हल्की रोमांटिक रोशनी और डिनर की सुगंध फैली हुई थी।

डिनर नॉर्मल बातों के साथ खत्म हो गया। फिर हम दोनों बालकनी में गए। रात हो चुकी थी। पहाड़ों की तरफ से ठंडी हवा आ रही थी। नीचे रिसॉर्ट की लाइट्स जल रही थीं।

मासी ने बालकनी की रेलिंग पकड़ते हुए कहा, “रूम तो पूरा डेकोरेशन किया हुआ है… इसका इस्तेमाल तो करना पड़ेगा।”

मैंने पूछा, “कैसे मासी?”

वो मुस्कुराईं, “ये सुहागरात का डेकोरेशन है… तो सुहागरात मनानी पड़ेगी।”

“कौन किसके साथ?”

“हम दोनों तो हैं।”

मैंने तुरंत कहा, “नहीं मासी… आप और मैं कैसे कर सकते हैं?”

मासी का चेहरा तुरंत गंभीर हो गया। गस्से में बोलीं, “तुम्हारी मम्मी ने तुम्हें नहीं बोला था कि जो मासी बोले वो करना है? मैं बोलूँगी वैसा ही करना पड़ेगा। और तुम नहीं करोगे तो तुम्हारे पापा को बोल दूँगी कि मेरे साथ जबरदस्ती कर रहा था… और उस दिन प्रिया के साथ होटल गया था, वो भी बोल दूँगी।”

मैं सन्न रह गया। “नहीं… आप जो बोलोगी वो करूँगा। लेकिन इतना बता दो कि आपको प्रिया के बारे में कैसे पता चला… प्लीज़।”

मासी ने हल्के से मुस्कुराते हुए कहा, “वो मेरी बेस्ट फ्रेंड है। और तुमने उसकी क्या हालत की थी… मुझे पता है। मुझे तेरे बारे में सब पता है।”

अब मुझे साफ समझ आ गया था। दस दिन के लिए मासी मुझे क्यों लेकर आई हैं। प्रिया ने मेरे सेक्स परफॉर्मेंस के बारे में सब बता दिया होगा।

मासी ने साफ कह दिया, “अब तुम मेरे साथ सेक्स करोगे… और वो भी बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड की तरह। जैसे तुमने प्रिया के साथ किया था… वैसे ही।”

हम दोनों अंदर आए। राउंड बेड पर बैठ गए। टीवी पर नेटफ्लिक्स की एक रोमांटिक सीरीज चल रही थी। हल्की रोशनी में रूम और भी ज्यादा सेक्सी लग रहा था। गुलाब की पंखुड़ियाँ बेड पर बिखरी हुई थीं।

मासी मेरे करीब सरक आईं। उनके नाइट ड्रेस में स्तन साफ उभर रहे थे। उन्होंने मेरा चेहरा अपने हाथों में लिया।

मैंने धीरे से उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। पहला किस हल्का था। फिर दूसरा थोड़ा गहरा। मासी ने भी जवाब दिया। दोनों की साँसें मिलने लगीं।

किस लंबा खिंच गया।

किस करते-करते मेरा हाथ रुक गया। मासी के गले पर होंठ रखे-रखे मैं पीछे हटा।

मासी ने धीरे से कहा, “किरण… मेरा ये सब कुछ पहली बार है। मेरा आज तक कोई बॉयफ्रेंड नहीं रहा। मैंने किसी के साथ किस तक भी नहीं किया है। तुम मुझे सब कुछ सिखाना। वैसे तो तुम्हारी मम्मी ने मुझे थोड़ा-बहुत समझाया था।”

मैंने उनका चेहरा पकड़कर सीधा देखा।

“मम्मी को भी पता है सब कुछ? आप पहले साफ-साफ बताओ। तभी आगे करूँगा… वरना नहीं। जो भी है वो सब सच-सच बता दो।”

मासी थोड़ी देर चुप रही। फिर गहरी साँस लेकर बोलीं—

“अब मैं बताती हूँ।

मुझे ये अवॉर्ड मिला था इस रिसॉर्ट का। मुझे लगा कि मैं शादी के बाद ही जाऊँगी। फिर तुम्हारी मम्मी हमारे घर आई थीं। तब उन्होंने तुम्हारे नानाजी से पूछा था कि छोटी की शादी कब करवाओगे। नानाजी बोले—पच्चीस-छब्बीस साल के बाद रिश्ता देखेंगे… अट्ठाईस साल की हो जाएगी तब तक शादी करवा देंगे।

तुम्हें पता ही है कि बीस से पच्चीस साल के लड़के-लड़कियों में सेक्स का बहुत चढ़ाव होता है। तुम्हारी मम्मी ने नानी से कहा कि छोटी की उम्र हो गई है, शादी करवा दो। नानी बोलीं—नहीं, अभी नहीं करवा सकते। बेचारी तुम्हारी तरह छोटी उम्र में ही माँ बन जाएगी। फिर घूमने-फिरने का मौका नहीं मिलेगा। तुम्हीं देख लो… तुम्हारी उम्र कितनी है? अड़तीस साल। तुम्हारी शादी कब करवाई थी? अठारह साल की उम्र में। और किरण कितने साल का हो गया? बीस साल का। वैसा इसके साथ भी न हो जाए। इसलिए तुम्हारी मम्मी बोलीं—ऐसा कुछ नहीं होता… वो छोड़ो, इसका देखो।

साफ मना कर दिया गया।

फिर हम दोनों बहाने बैठे थे। बात हुई कि तुम्हारी मम्मी की सुहागरात के दिन ही हो गया था। जीजू ने कर दिया था। तेरे जीजू के खानदान में सब सेक्स में तगड़े हैं। तुम्हारे जीजू… शादी को एक महीना हुआ था तब तक रोज़ दस-बारह राउंड मारते थे… दिन में और रात में। एक दिन शादी को पच्चीस जैसे दिन हुए थे और कंडोम खत्म हो गए थे। सर्दी भी थी। मेरी भी इच्छा बहुत थी। बिना कंडोम के कर दिया… और रह गया। फिर क्या कर सकते थे।

मैंने उनसे पूछा—अभी भी जीजू ऐसा ही करते हैं? वो बोलीं—हाँ, रात को तो करते हैं तीन जैसे… लेकिन पाँच-छह साल हो गए दिन में किए हुए। अभी किरण को घूमने भेजना पड़ेगा… और फिर दिन में भी थोड़े दिन मजे करेंगे।

मैंने तुम्हारी मम्मी से पूछा—इतनी पावर लाते कहाँ से हैं? वो बोलीं—तुम्हारे जीजू हर रोज ‘हरज भरी फूट’ का सेक पीते हैं। वो भी बड़े-बड़े दो गिलास। और किरण का भी सेम ही है… वो भी तगड़ा ही है इस मामले में।

मैंने पूछा—आपको कैसे पता? तो वो बोलीं—मैं उसकी माँ हूँ। और मुझे सब पता होता है कि वो कहाँ जाता है, क्या करता है। मैंने कहा—तो उसे कुछ नहीं बोलतीं? वो बोलीं—नहीं। उनकी उम्र में मजे करने दो। किरण के पापा भी ऐसा ही बोलते हैं कि शादी के बाद ये सब नहीं होता… इसलिए अभी मजे करने दो।

फिर मैंने बताया कि मेरी बहुत इच्छा है किरण जैसे करने की… लेकिन मेरा कोई बॉयफ्रेंड नहीं है। और ये कूपन भी है… लेकिन मुझे कुछ आता भी नहीं है। क्या करूँ… कुछ समझ नहीं आता।

फिर तुम्हारी मम्मी ने ही बताया—किरण को ले जाओ। उसको सब आता है। उसने ही बताया कि वो प्रिया है ना तुम्हारी फ्रेंड… वो अट्ठाईस साल की है और किरण बीस साल का… तो भी उसकी हालत खराब कर दी थी। ठीक से चल भी नहीं पाई थी तीन दिन तक। उसे पूछना।

फिर मैंने प्रिया से पूछा। थोड़ा डर होगा… लेकिन सहन कर लेना। फिर मजे आएँगे। और तुम किरण को ले जाओ अपने साथ। मैं भी तुम्हारे जीजू के साथ दस दिन… दिन में मजे करूँगी।”

मासी ने बात खत्म की। कमरे में सन्नाटा छा गया। टीवी पर रोमांटिक सीरीज चल रही थी, लेकिन दोनों की तरफ किसी की ध्यान नहीं था।

मासी ने मेरी आँखों में देखते हुए कहा, “अब जो था… वो बता दिया किरण। मैंने सब कुछ सच-सच बता दिया है।”

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