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सासुजी के साथ 2

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शिल्पा ने सास की बात सुनने के बाद धीरे से कहा, “बहुत इच्छा है मेरी… लेकिन डॉक्टर ने साफ मना किया हुआ है। तो मैं क्या कर सकती हूँ? इसको भी बहुत इच्छा है। पापा से ज़्यादा… ये तो रोज़ रात मुझे तीन-चार राउंड मारते थे। लेकिन एक महीने से ज़्यादा हो गया है… लेकिन क्या करें?”

सास ने हल्के से मुस्कुराते हुए कहा, “कोई बात नहीं।”

थोड़ी देर बाद मैंने सास के लिए क्रीम लाकर दी। उन्होंने अपनी गाँड पर लगाई। अगले दो दिन तक उन्होंने आराम किया। चलना-फिरना धीरे-धीरे ठीक होने लगा।

दो दिन बाद घर का माहौल थोड़ा नॉर्मल हो गया। शाम को मैं और शिल्पा अकेले बैठे बातें कर रहे थे। सास किचन में थीं।

मैंने शिल्पा के करीब आकर धीरे से कहा, “आज शिल्पा… करना पड़ेगा। बहुत इच्छा है। करने दो थोड़ा… प्लीज़। तो एक बार पानी निकालने दो।”

शिल्पा ने सिर हिलाते हुए जवाब दिया, “कल हम हॉस्पिटल गए थे। तब तो साफ मना किया है कि किसी भी हाल में नहीं करना। उस समय सास बाहर गई हुई थीं।”

मैं चुप रहा। शिल्पा ने मेरी तरफ देखकर कहा, “मैं तुम्हें समझ सकती हूँ…”

मैंने उसका हाथ पकड़ते हुए बोला, “तो जो मुझसे प्यार करती होगी… तो करने देगी।”

शिल्पा कुछ पल सोचती रही। फिर धीरे से बोली, “मैं कुछ करती हूँ… तुम ये सब मम्मी आए तब बोलना। उनके सुनते हुए… तो वो मान जाएँ… तो हमें करने देंगी।”

मैं उसकी बात सुनकर हैरान रह गया। शिल्पा का चेहरा थोड़ा लाल हो रहा था, लेकिन आँखों में एक अजीब सी चमक थी।

सास किचन से बाहर आईं। मैंने जानबूझकर उनके सुनते हुए शिल्पा से फिर पूछा और उसे इमोशनल करने लगा। शिल्पा ने मम्मी की तरफ देखकर कहा, “क्या करूँ मम्मी… एक बार करूँ? उनकी बहुत इच्छा है।”

सास शिल्पा के कान में झुककर धीरे से बोलीं, “उनका हिला के या चूस के निकाल दो… उनको खुश कर दो। वो तो कर सकती हो।”

शिल्पा ने जवाब दिया, “मुझे भी करना है… तू वाइब्रेटर यूज़ कर ले, मैं देती हूँ तुम्हें।”

रात हो गई। डिनर हो चुका था। घर में सिर्फ हम तीन थे। मैंने शिल्पा से कहा, “आज…”

शिल्पा ने मुस्कुराते हुए बोला, “आज तुम्हारा पानी निकाल देती हूँ।”

मैंने कहा, “तो मैं तुम्हारे बाहर के साइड वाइब्रेटर लगा के पानी निकाल देता हूँ… फिर तुम मेरा निकालना।”

मैंने शिल्पा को नंगा कर दिया। उसका गर्भवती पेट और भरी हुई छातियाँ सामने थीं। मैंने उसकी चूत को जोर-जोर से चाटना शुरू कर दिया। जीभ से उसके क्लिट को दबा-दबा कर चाटा। शिल्पा कराहने लगी।

फिर असल प्रोग्राम शुरू हुआ। सास वाइब्रेटर लेकर आईं। उन्होंने फुल मोड ऑन करके शिल्पा की चूत के बाहर ही रगड़ना शुरू कर दिया। वाइब्रेटर की तेज कंपन से शिल्पा बहुत देर तक आवाज़ें निकालती रही। उसके मुँह से कराहें और चीखें निकल रही थीं। मैं देख रहा था कि अब पेल दूँ, लेकिन खुद को रोक लिया।

शिल्पा अचानक बोली, “बस… हो गया मेरा… बस ऐसे करते-करते बहुत सारा पानी निकल गया प्रेशर से।” थोड़ी देर बाद उसने साँस लेते हुए कहा, “अब शांति मिली है…”

फिर मैं लिविंग रूम के सोफे पर ही नंगा हो गया। मेरा कड़ा, मोटा और बड़ा लंड शिल्पा के हाथ में दे दिया। सास किचन से सारा कुछ देख रही थीं। शिल्पा ने बहुत देर तक हिलाया। फिर उसने मुँह में ले लिया और बहुत देर तक चूसा। लेकिन कुछ नहीं हुआ। सास लगातार देख रही थीं।

सास ने आवाज़ दी, “जोर से चूसो बेटा… थोड़ा।”

शिल्पा ने मुँह से लंड निकालते हुए कहा, “मम्मी… क्या मारूँ… उनका नहीं होता है चुदाई के बिना।”

वो दोबारा थोड़ी देर और चूसी, फिर हाथ से हिलाने लगी। लेकिन फिर भी कुछ नहीं हुआ। मेरा लंड उतना ही कड़ा खड़ा था।

शिल्पा मेरे लंड को मुँह में लिए बहुत देर तक चूसती रही, हाथ से भी हिलाती रही, लेकिन मेरा पानी नहीं निकला। लंड उतना ही सख्त और गर्म खड़ा था। सास किचन के दरवाजे पर खड़ी होकर सब देख रही थीं। उनकी साँसें तेज चल रही थीं।

मैंने शिल्पा के सिर को धीरे से हटाया और कहा, “नहीं हो रहा शिल्पा… चुदाई के बिना नहीं निकलता।”

शिल्पा थककर सोफे पर बैठ गई। उसका चेहरा लाल था। तभी सास पास आईं। उन्होंने मेरा कड़ा लंड देखा और धीरे से बोलीं, “देखो… इतनी देर से खड़ा है। बेचारी शिल्पा थक गई।”

मैंने सास की तरफ देखा। उनकी नाइट ड्रेस अभी भी पतली थी। मैंने साफ कह दिया, “मम्मी… अब आपकी बारी है। शिल्पा से नहीं निकला तो आपसे निकलवाऊँगा।”

सास थोड़ी सकपकाईं, लेकिन पीछे नहीं हटीं। शिल्पा चुपचाप देख रही थी। सास ने मेरी तरफ कदम बढ़ाया और मेरे लंड को अपने हाथ में ले लिया। उन्होंने धीरे-धीरे हिलाना शुरू किया।

मैंने उनकी कमर पकड़कर अपनी तरफ खींचा और बोला, “अब चुदवाओ मम्मी… दामाद के पास खड़े-खड़े नहीं, ठीक से चुदवाओ।”

सास ने शिल्पा की तरफ देखा। शिल्पा ने धीरे से सिर हिला दिया, जैसे इजाजत दे रही हो। फिर सास ने अपनी नाइट ड्रेस ऊपर की और मेरे सामने नंगी हो गईं। उनकी बड़ी छातियाँ और अभी भी थोड़ी सूजी हुई गाँड सामने थी।

मैंने उन्हें सोफे पर झुका दिया। पीछे से अपना मोटा लंड उनकी चूत पर लगाया। सास ने कराहते हुए कहा, “धीरे से… दामाद…”

मैंने एक झटके में अंदर डाल दिया। सास जोर से कराह उठीं। मैं जोर-जोर से पेलने लगा। उनकी गाँड थपथपाते हुए बोला, “लो मम्मी… अब दामाद चुदा रहा है। पंद्रह दिन बाद पापा ने चुदाई थी, अब मैं चुदाऊँगा।”

सास दोनों हाथों से सोफे को पकड़े हुए जोर-जोर से हिल रही थीं। उनकी आवाज़ें निकल रही थीं, “आह… दामाद… जोर से… हाँ… ऐसे ही…”

शिल्पा बगल में बैठी सब देख रही थी। उसका हाथ अपनी चूत पर था। मैं सास की चूत में जोर-जोर से ठोकरें मार रहा था। उनकी चूत गीली और गर्म थी। मैंने उनके बाल पकड़कर और तेज किया।

सास चिल्ला रही थीं, “हाँ… चुदवा रही हूँ… दामाद से… पूरी तरह…”

मैंने उन्हें करवट बदलकर ऊपर बिठा लिया। सास मेरे लंड पर बैठ गईं और खुद ही उछल-उछलकर चुदवाने लगीं। उनकी बड़ी छातियाँ मेरे चेहरे के सामने झूल रही थीं। मैंने दोनों को मुँह में ले लिया और चूसने लगा।

शिल्पा अब और करीब आ गई थी। वो देख रही थी कि उसकी माँ उसके पति से चुदवा रही है।

मैंने सास की गाँड पकड़कर और जोर से ऊपर की तरफ धक्के देने शुरू कर दिए। सास की आवाज़ें पूरे घर में गूँज रही थीं।

“आह… दामाद… मारो… पूरी रात चुदवाऊँगी…”

मैं सास को जोर-जोर से चुदा रहा था। उनकी कराहें पूरे घर में गूँज रही थीं। शिल्पा बगल में बैठी देख रही थी। अचानक शिल्पा मुस्कुराते हुए बोली, “अब मजा आ रहा है मम्मी…”

सास ने कराहते हुए जवाब दिया, “हाँ बेटा… मुझे लगता था कि माँ-बेटी का ये प्लान था… सास को चुदवाने का।”

मैं और जोर से पेलने लगा। सास मेरे ऊपर बैठकर खुद ही उछल-उछलकर चुदवा रही थीं। उनकी चूत पूरी तरह गीली हो चुकी थी। मैंने उन्हें नीचे लिटाया और मिशनरी में जोरदार चुदाई की। सास के नाखून मेरी पीठ पर लग रहे थे। शिल्पा भी उत्तेजित होकर अपनी उंगलियों से अपनी चूत सहला रही थी।

उस रात हम तीनों ने बहुत देर तक मजे लिए। सास को मैंने दो बार पानी निकाला, खुद भी दो बार छोड़ा। शिल्पा सिर्फ देखती रही और कभी-कभी सास की छातियों को दबाती रही।


एक महीने बाद शिल्पा ने एक प्यारी सी लड़की को जन्म दिया। घर में खुशी का माहौल था। डिलीवरी के बाद शिल्पा थोड़ी कमजोर थी, इसलिए उस रात की खुशी में मैंने सास को बहुत चुदाई। पूरी रात उनकी चूत और गाँड दोनों में मारा। सास बिना किसी शिकायत के लेटी रहीं और मजे लेती रहीं।

ससुर जी अभी तक बाहर ही थे। अगले दो महीने तक वो नहीं आए। उन दो महीनों में मैंने हर रोज सास की चुदाई की। कभी सुबह, कभी दोपहर, कभी रात। कभी शिल्पा भी साथ बैठकर देखती, कभी खुद भी अपने हाथों से मेरा लंड सास के मुँह में देती। सास अब पूरी तरह खुल चुकी थीं। वो खुद आकर मेरे कमरे में लेट जातीं और बोलतीं, “आज गाँड में मारो दामाद… कल चूत में।”

दो महीने बाद ससुर जी वापस आए। घर का माहौल थोड़ा सामान्य हुआ, लेकिन चुदाई रुकी नहीं। जब ससुर जी सो जाते या बाहर जाते, मैं और सास चुपके से मिल जाते। कभी बाथरूम में, कभी रात को जब सब सो जाते। ससुर जी के आने के बाद भी मैंने सास को बहुत चुदाई। उनकी चूत अब मेरी आदत बन चुकी थी।

शिल्पा की डिलीवरी के तीन महीने पूरे होने तक ये सिलसिला चलता रहा। तीन महीने बाद डॉक्टर ने शिल्पा को भी हरी झंडी दे दी। अब मैं और शिल्पा दोनों मिलकर मजे लेने लगे। रात को कभी शिल्पा को चुदाता, कभी सास को, कभी दोनों को एक साथ। शिल्पा अब खुद सास को मेरे ऊपर बिठा देती और देखती रहती।

धीरे-धीरे घर का ये नया रिश्ता सबकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया। शिल्पा अपनी बेटी को दूध पिलाती, सास घर का काम करतीं, और मैं दोनों को बारी-बारी से चुदाता। ससुर जी को कुछ पता नहीं चला। वो अपने बिजनेस में व्यस्त रहते।

और यूँ… हमारी ये कामुक कहानी आगे भी चलती रही।

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