सासुजी के साथ 1
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मैं तीस साल का शादीशुदा आदमी हूँ। मेरी पत्नी के साथ हमारी शादी को करीब चार साल हो चुके थे। पिछले कुछ महीनों से हमारी जिंदगी में एक नया अध्याय शुरू हुआ था—मेरी पत्नी प्रेग्नेंट हो गई थी। पहले तो दोनों बहुत खुश थे। डॉक्टर ने कहा था कि शुरू के महीनों में सावधानी से रहना चाहिए, लेकिन हम दोनों की चाहत इतनी तेज थी कि हम रुक नहीं पाए।
सातवें महीने तक हमने धुआँधार चुदाई की। रात-दिन, कभी बेडरूम में, कभी बाथरूम में, कभी सोफे पर। उसकी बढ़ती हुई छातियाँ, गोल होता पेट, और वो गीली चूत—सब मुझे पागल कर देता था। डॉक्टर ने साफ मना कर दिया था कि अब से संभोग नहीं करना चाहिए, बच्चे को खतरा हो सकता है। लेकिन मेरी पत्नी भी उतनी ही हॉट थी। वो खुद मेरे ऊपर चढ़ जाती, मेरा लंड मुँह में लेती, और कहती—“आज सिर्फ थोड़ा सा… अंदर मत छोड़ना।” मैं भी खुद को रोक नहीं पाता था। सातवें महीने तक हमने लगभग हर दिन चुदाई की। कभी धीरे-धीरे, कभी जोर-जोर से। उसकी चूत पहले से ज्यादा टाइट और गीली लगती थी।
फिर आठवाँ महीना आया। डॉक्टर ने और सख्ती से मना किया। तब मेरी पत्नी के घर वालों ने कहा कि हमारे यहाँ रीति-रिवाज है—आठवें महीने में बेटी को मायके ले जाना होता है। वो छह महीने तक अपने मायके चली गई। असल में वो छह महीने पूरे नहीं रहे, लेकिन घर वाले जोर दे रहे थे कि वो वहाँ रहे। मैं अकेला रह गया। पहले तो काम में उलझा रहा, लेकिन पंद्रह दिन बीतते-बीतते मेरा हाल बुरा हो गया। रात को नींद नहीं आती थी। हाथ से भी मन नहीं भरता था। कोई जुगाड़ भी नहीं हो पा रहा था। पत्नी फोन पर बात करती तो उसकी आवाज सुनकर मेरा लंड खड़ा हो जाता, लेकिन वो दूर थी।
इतने में एक दिन मेरे ससुर का फोन आया। वो बिजनेस के काम से बाहर जा रहे थे, लगभग एक महीने के लिए। घर पर सिर्फ मेरी सास और मेरी पत्नी रह जातीं। उनका एक बेटा एमबीबीएस पढ़ रहा था, हॉस्टल में रहता था। एक बेटी की शादी हो चुकी थी, वो भी ससुराल में थी। ससुर बोले—“बेटा, तुम एक महीने के लिए आ जाओ। घर अकेला छोड़ना ठीक नहीं लगता।”
मैंने तुरंत हाँ कर दी। मन में एक अजीब उत्तेजना थी। पत्नी तो वहीं थी, आठवें महीने में। डॉक्टर ने साफ मना किया था कि अब बिल्कुल सेक्स नहीं करना। लेकिन इतने दिनों बाद उसे देखना, उसके पास रहना… सोचना भी काफी था।
मैंने सामान पैक किया और अगले दिन सास-ससुर के घर पहुँच गया। घर में मेरी सास और मेरी पत्नी थीं। पत्नी ने दरवाजा खोला। उसका पेट काफी आगे निकला हुआ था, चेहरा थोड़ा गोल हो गया था, और छातियाँ पहले से ज्यादा भरी हुई लग रही थीं। उसने मुस्कुराते हुए कहा—“आ गए… कितने दिन बाद।”
सास ने भी स्वागत किया। मैंने सामान रखा और बैठ गया। मन में एक ही बात घूम रही थी—डॉक्टर ने सख्ती से मना किया है, अब कोई चुदाई नहीं हो सकती। लेकिन इतने दिनों की प्यास… और वो यहीं है, मेरे सामने।
ससुर जी आ गए थे। वो अगली सुबह निकलने वाले थे, इसलिए थोड़ी देर बातें हुईं। घर का माहौल हल्का-फुल्का था। खाने की बात चली तो सबने साथ डिनर किया। सास ने ससुर के बैग पैक करने शुरू कर दिए। मेरी पत्नी शिल्पा भी थोड़ी बेचैन सी लग रही थी। खाने के बाद जब थोड़ी देर अकेले मिले तो उसने धीरे से कहा, “मेरी बहुत इच्छा हो रही है चुदवाने की… लेकिन क्या करें? डॉक्टर ने मना किया है।”
मैंने सिर हिलाते हुए साफ मना कर दिया, “नहीं शिल्पा, बिल्कुल नहीं। रिस्क नहीं ले सकते।”
रात का समय हुआ। सास अचानक शिल्पा से बोली, “बेटा, आज तुम दूसरे रूम में सो जाना। पिछले पंद्रह दिन से मैं तुम्हारे साथ ही सो रही थी, लेकिन आज कुछ अलग ही व्यवस्था कर देते हैं।”
शिल्पा थोड़ी हैरान हुई, लेकिन कुछ बोली नहीं। घर में दो बेडरूम और एक लिविंग रूम था। सास-ससुर एक रूम में चले गए सोने। मुझे और शिल्पा को दूसरा रूम दे दिया गया। हम दोनों अंदर चले गए। लाइट बंद करके बिस्तर पर लेट गए। शिल्पा मेरे करीब सट गई थी। उसका गर्भवती शरीर गर्म लग रहा था। मैंने खुद को काबू में रखा।
करीब पच्चीस मिनट बाद दरवाजा धीरे से खुला। सास नाइट ड्रेस में खड़ी थी। वो नाइट ड्रेस इतनी पतली और पारदर्शी थी कि उसके अंदर का सब कुछ साफ-साफ दिख रहा था—बड़ी छातियाँ, गोल कमर, और नीचे का हिस्सा भी। शिल्पा ने तुरंत पूछा, “क्या हुआ मम्मी?”
सास ने हल्के स्वर में कहा, “कुछ नहीं बेटी, अलमारी से नारियल तेल ले रही हूँ। सर में मसाज करनी है।”
वो अलमारी के पास गई, तेल की बोतल निकाली… और साथ में कंडोम का पैकेट भी ले लिया। मैंने साफ देख लिया। मेरी साँस अटक गई। शॉक लग गया। लेकिन शिल्पा को कुछ पता नहीं चला। वो सिर्फ इतना सोच रही थी कि मम्मी ने हमें अकेला समय देने के लिए दूसरे रूम में सोने को कहा है, इसलिए वो वहाँ सो रही है।
सास तेल और कंडोम लेकर बाहर चली गई। दरवाजा बंद हो गया।
मैं शिल्पा से थोड़ी बात करने लगा। मन बहुत घबराया हुआ था। वो कंडोम वाली बात मेरे दिमाग में घूम रही थी। शिल्पा ने मेरे सीने पर हाथ रखते हुए कहा, “आज रात अकेले हैं… थोड़ा प्यार तो कर सकते हैं न?”
मैं खुद को रोक नहीं पा रहा था। दिमाग में तरह-तरह के ख्याल आ रहे थे। आखिरकार मैं उठा और बोला, “मैं लिविंग रूम में सो जाता हूँ। तुम आराम से सो जाओ।”
शिल्पा ने कुछ और कहना चाहा, लेकिन मैं पहले ही बाहर निकल चुका था। लिविंग रूम के सोफे पर लेट गया। अंधेरे में आँखें खुली हुई थीं। मन में सिर्फ एक ही बात घूम रही थी—सास ने कंडोम क्यों लिए?
लिविंग रूम के सोफे पर लेटा हुआ था। अंधेरा था, बस खिड़की से थोड़ी रोशनी आ रही थी। मन अभी भी उलझा हुआ था कि सास ने कंडोम क्यों लिए थे। तभी अचानक दूसरे रूम से आवाज़ें आने लगीं।
पहले हल्की थीं, फिर साफ सुनाई देने लगीं।
सास की दबी हुई आवाज़ आई, “प्लीज़… शिल्पा के पापा… गाँड में नहीं… बहुत दर्द होगा…”
ससुर की भारी आवाज़ गूँजी, “बहिन की लोड़ी… तीन ही कंडोम लाए? तुझे पता था कि आज तेरी गाँड मारने वाला हूँ। पूरी रात के लिए थोड़े ज़्यादा लाती। अब जल्दी लगा कंडोम… लंड मारना है।”
फिर जोर की आवाज़ें आने लगीं। बिस्तर चरमरा रहा था। सास कराह रही थी, कभी दबकर चिल्ला रही थी। अंदर जोर-जोर से चुदाई हो रही थी। सास रोते हुए कह रही थी, “प्लीज़ रुक जाओ… दामाद आए हुए हैं… शर्म की बात है…” लेकिन ससुर नहीं रुके। और तेज धमाके सुनाई दिए।
मैं सोफे पर लेटा-लेटा सब सुन रहा था। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। तभी शिल्पा पानी पीने के लिए बाहर आई। उसने मुझे सोफे पर देखा तो हैरानी से बोली, “क्या कर रहे हो यहाँ?”
इतने में अंदर से फिर तेज आवाज़ आई—सास की चीख और ससुर की गंदी गालियाँ। शिल्पा भी सुन गई। उसका चेहरा एकदम लाल हो गया। पूरी शर्मा गई। धीरे से बोली, “इस उम्र में… ये क्या…” फिर कुछ पल खड़ी रही, जैसे विश्वास ही न हो रहा हो। उसके बाद बिना कुछ और कहे चुपचाप अपने रूम में वापस चली गई।
अंदर की आवाज़ें जारी रहीं। ससुर सास को मुँह में दे रहा था। सास की गला भरी आवाज़ आ रही थी। फिर ससुर बोला, “अब बिना कंडोम के चूत मारता हूँ… और गाँड भी।”
सास रोते हुए मना कर रही थी, लेकिन ससुर नहीं रुका। जोर-जोर से ठोकरें लग रही थीं। ससुर की आवाज़ साफ सुनाई दी, “गर्म… इतने कंडोम हैं तो भी तेरी गलती के कारण बिना कंडोम के गाँड में घुसना पड़ रहा है। अब गाँड मारने के बाद तू मुँह में लेगी। पूरी रात चलेगा ऐसा ही।”
सास की चीखें, रोना, और ससुर की जोरदार साँसें पूरे घर में गूँज रही थीं। बिस्तर की चरमराहट और गीली आवाज़ें लगातार आ रही थीं। मैं लिविंग रूम में लेटा हुआ सब कुछ सुन रहा था। आँखें खुली हुई थीं। शिल्पा अपने रूम में चली गई थी, लेकिन ये आवाज़ें रुकने का नाम नहीं ले रही थीं।
उनकी चुदाई सुबह चार बजे तक चलती रही। आवाज़ें धीरे-धीरे कम हुईं और फिर बिल्कुल बंद हो गईं। मैं सोफे पर लेटा-लेटा उनींदा हो रहा था। करीब पच्चीस मिनट बाद अचानक सास आईं। उन्होंने धीरे से कहा, “मुझे एयरपोर्ट तक छोड़ दो।”
मैं उठा और तैयार हो गया। गाड़ी निकालकर उन्हें एयरपोर्ट ले गया। रास्ते में ससुर जी ने मुझसे कहा, “शिल्पा और उसकी माँ का ध्यान रखना। अगर कुछ ठीक न लगे तो क्रीम लगा देना।”
मैंने पूछा, “किसकी?”
वो बोले, “उसे पता है।” फिर मुस्कुराए और चले गए।
मैं वापस घर आया। शिल्पा सोफे पर बैठी झाड़ू-पोछा कर रही थी। उसने नाश्ता भी बना लिया था, लेकिन सास अभी भी उल्टी जैसी हालत में सो रही थीं। मैंने शिल्पा को बताया, “चार बजे तक आवाज़ें आ रही थीं… और साढ़े चार बजे पापा निकल गए।”
शिल्पा का चेहरा शर्मा के मारे लाल हो गया। वो कुछ बोल नहीं पाई।
नाश्ता तैयार हो चुका था तो शिल्पा मम्मी को जगाने गई। सास जागीं तो ठीक से खड़ी भी नहीं हो पा रही थीं। चलने का तो नाम ही नहीं ले रही थीं। मैंने उन्हें पकड़ा। वो पैर बहुत ज़्यादा चौड़े करके, दर्द के मारे लड़खड़ाती हुई चल रही थीं। गाँड में साफ दर्द दिख रहा था। मैंने उन्हें सोफे पर बैठाया और गाँड के नीचे तकिया रख दिया, तभी जाकर वो ठीक से बैठ पाईं।
मैं शिल्पा को देख-देखकर हँस रहा था। शिल्पा को बहुत शर्म आ रही थी। नाश्ता शुरू हुआ। मैंने हँसते हुए पूछा, “क्या हुआ मैडम जी?”
सास ने जल्दी से कहा, “कुछ नहीं… बाथरूम में गिर गई थी।” फिर चुपचाप खाना खाने लगीं।
थोड़ी देर बाद शिल्पा ने धीरे से पूछा, “मम्मी, क्या हुआ? गिर गईं?”
सास बोलीं, “पापा पर…” फिर चुप हो गईं।
मैं शिल्पा को देखकर और ज़ोर से हँसने लगा। शिल्पा और ज़्यादा शर्मा गई। मैंने सास से कहा, “मम्मी जी, पापाजी कुछ बोल रहे थे कि जो ज़्यादा दर्द हो तो क्रीम लगा देना।”
सास ने पूछा, “किसकी क्रीम?”
मैंने जवाब दिया, “पापाजी बोल रहे थे कि उनको पता है।”
शिल्पा तुरंत बोली, “मम्मी, सच-सच बताओ क्या हुआ है? और आपके रूम से अजीब सी आवाज़ें क्यों आ रही थीं?”
सास कुछ नहीं बोलीं। बस सिर झुकाए बैठी रहीं।
शिल्पा की आवाज़ में हैरानी और शर्म दोनों थे, “इस उम्र में भी…”
शिल्पा ने सास की तरफ देखकर कहा, “मम्मी, पापा के रूम में से मुझे झाड़ू लगाते वक्त इस्तेमाल किए हुए कंडोम मिले। आप उनको तो ठीक से रख सकती थीं ना? कचरे में… और बताओ क्या हुआ?”
सास ने मेरी तरफ देखकर धीरे से कहा, “दामाद जी बैठे हैं… फिर बाद में बताऊँगी।”
शिल्पा ने तुरंत जवाब दिया, “वो अपने ही तो हैं। क्या हुआ बताओ जल्दी, क्या हुआ?”
सास थोड़ी देर चुप रही, फिर धीरे-धीरे बोलने लगीं, “बताती हूँ… तुम पंद्रह दिन से यहाँ रुकी हो। उससे पहले मैं और तुम्हारे पापा रोज़ रात को सेक्स करते थे। तुम यहाँ थी इसलिए पंद्रह दिन से कुछ नहीं हुआ था। और तेरे पापा का एक-दो महीने के लिए जाने का तय हुआ तो उनको इतने दिन तक बिना सेक्स के रहा नहीं जा सकता था। पंद्रह दिन निकले तो उनको बहुत इच्छा थी। तेरे पापा इस उम्र में भी रोज़ दो राउंड हटा सकते हैं, इतनी ताकत है उनमें। उन्होंने कहा कि अभी करना पड़ेगा… तेरे सामने तो कैसे करें। इसलिए रात को मैंने तुम्हें दूसरा रूम दे दिया और हम इस रूम में सोए। मैं रूम में गई तो कपड़े उतार दिए। पापा बोले कि ऑयल लेकर आना और कंडोम भी, क्योंकि गाँड में भी थोड़ा डालूँगा।”
शिल्पा हैरानी से बोली, “आप इस उम्र में भी कंडोम यूज़ करते हो?”
सास ने सिर हिलाया, “बेटा, मेरे कभी-कभी पीरियड्स आ जाते हैं तो मैं रखती हूँ। क्योंकि एक-दो बार अंदर रह गया था तो फिर टैबलेट लेनी पड़ी। वरना हम दोनों एक ही समय में प्रेग्नेंट हो जाते।”
शिल्पा ने कहा, “ठीक है… फिर आगे क्या हुआ?”
सास ने साँस छोड़ते हुए बताया, “मैं फिर तुम्हारे रूम में आकर ऑयल लिया और कंडोम भी लिए, क्योंकि मैं वहाँ रखती हूँ। फिर… तुम्हारे पापा ने पंद्रह साल बाद मेरी गाँड मारी। क्योंकि पंद्रह दिन चुदाई नहीं करने दी इसलिए। फिर क्या हुआ… पूरी रात मेरी गाँड मारी और सुबह चार बजे तक… क्या करती, मैं चिल्लाती नहीं तो?”
शिल्पा की आँखें फटी की फटी रह गईं। वो धीरे से बोली, “इस उम्र में भी…”
सास ने हँसते हुए कहा, “क्या करूँ बेटा… मुझे जो तीन-चार दिन लंड न मिले तो मन नहीं लगता। और पंद्रह दिन तो हमने बहुत ज़बरदस्ती निकाले। आप लोगों ने तो कुछ नहीं किया ना… डॉक्टर ने मना किया हुआ है।”
मैं सोफे पर बैठा ये सब सुन रहा था। शिल्पा का चेहरा एकदम लाल हो चुका था। सास बिल्कुल शांत स्वर में सब बता रही थीं, जैसे कोई आम बात हो।
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