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पेरिस में वर्जिन दोस्त और सौतेली माँ की चुदाई 2

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मैंने पोजीशन बदली। उसे पलटा। दोनों पैर अपने कंधों पर चढ़ा लिए। तकिया अभी भी नीचे था। गांड पूरी तरह खुली हुई। मैंने लंड फिर से उसकी गांड में एक झटके में डाल दिया और ऊपर से पेलने लगा। इस पोजीशन में लंड और गहराई तक जा रहा था। हर धक्के पर सुपाड़ा उसकी आँतों को धकेल रहा था।

नेहा की आँखों से लगातार आँसू बह रहे थे। मुँह से सिर्फ टूटे-फूटे शब्द निकल रहे थे,

“दर्द… दर्द… बचाओ… गांड फट गई… चूत जल रही है… मर जाऊँगी… प्लीज रुक जाओ… एक मिनट… सिर्फ एक मिनट…”

मैंने नहीं रुका। स्पीड और बढ़ा दी। अब धक्के इतने जोर के थे कि बिस्तर की खाट चरमरा रही थी। उसकी गांड की दोनों फलियाँ मैंने और फैला दीं। छेद पूरा खुल चुका था, लाल और सूजा हुआ। हर धक्के पर थोड़ा-थोड़ा खून निकलने लगा था। गांड के अंदर से खून मेरे लंड पर लग रहा था।

दो घंटे पूरे होने वाले थे।

नेहा की चीखें अब कमजोर पड़ गई थीं। वह सिर्फ सिसकियाँ ले रही थी। बदन पसीने से तरबतर। गांड पूरी तरह फूल गई थी। चूत का दर्द इतना बढ़ गया था कि वह बेहोशी की कगार पर थी। लेकिन मैंने अभी भी नहीं छोड़ा।

आखिरी दस मिनट मैंने और बर्बर तरीके से पेलने शुरू कर दिए। पूरा जोर लगाकर। हर धक्के पर उसका बदन आगे को धकेल रहा था। मैंने उसकी चोटी और जोर से खींची, कमर जकड़ी और आखिरी जोरदार धक्कों के साथ उसकी गांड के अंदर ही झड़ गया। गरम-गरम, गाढ़ा वीर्य की मोटी धार उसकी आँतों में भर गई। मैंने लंड अंदर ही दबाए रखा। दो-तीन मिनट तक धड़कन महसूस होती रही। वीर्य उसकी गांड में ठहर गया।

जब बाहर निकाला तो वीर्य, खून और पानी मिलाकर उसकी खुली हुई, सूजी हुई गांड से बाहर निकलने लगा। छेद बंद होने का नाम नहीं ले रहा था। पूरा खुला हुआ, लाल, फटा हुआ।

नेहा बिस्तर पर मुँह के बल गिरी हुई थी। साँसें उखड़ी हुईं। गांड पूरी तरह बर्बाद। चूत का दर्द और गांड का दर्द दोनों मिलकर उसे हिला रहे थे। वह बस रो रही थी। कोई शब्द नहीं निकल रहा था। सिर्फ हिचकियाँ और आँसू।

मैंने उसके गाल पर हाथ फेरते हुए कहा,

“अब दोनों जगह तेरी हो गईं। शाम को फिर देखेंगे… आज रात पूरी लूँगा।”

नेहा ने कुछ नहीं कहा। सिर्फ आँसू बहते रहे। उसकी गांड से अभी भी वीर्य और खून रिस रहा था।

नेहा बिस्तर पर मुँह के बल लेटी हुई थी। गांड और चूत दोनों जगह से खून और वीर्य अभी भी हल्के-हल्के रिस रहे थे। उसका पूरा बदन काँप रहा था। आँखें सूज चुकी थीं रो-रोकर।

अचानक उसने कमजोर आवाज़ में कहा,

“नहीं… आर्यन… मुझे जाने दो… मुझे कुछ नहीं चाहिए… बस तुम रहने दो… मत करो… प्लीज…”

मैंने उसके पास जाकर कहा,

“नेहा, मैंने तेरे लिए BMW दिलवा दी है। कल डीलर से डिलीवरी हो जाएगी।”

नेहा ने सिर उठाया। आँखों में आँसू थे। वह रोते हुए बोली,

“इतने की तो तुमने मुझे फाड़ के रख दी है… मेरी चूत… मेरी गांड… दोनों जगह फट गई हैं… दर्द से मर रही हूँ… अब तुम रहने दो… मुझे कार नहीं चाहिए… बस तुम रुक जाओ… प्लीज… अब और मत करो…”

मैं चुप रहा। उस पल सच में मुझे नेहा के साथ जबरदस्ती करने का मन नहीं था। उसकी हालत देखकर मैंने सिर हिलाया और धीरे से बोला,

“ठीक है… अब नहीं करूँगा।”

नेहा ने आँसू पोंछते हुए कहा,

“अगर तुम नहीं रुकोगे तो मुझे दूसरा रूम दे दो… मैं तुम्हारे साथ एक रूम में नहीं रह सकती… डर लगता है…”

मैंने तुरंत होटल मैनेजमेंट को फोन किया। उसी फ्लोर पर एक और Royal Suite बुक करवाया। नेहा के लिए अलग रूम। फिर मैंने पेरिस के सबसे अच्छे प्राइवेट डॉक्टर को बुलवाया। दो लेडी डॉक्टर्स आईं। उन्होंने नेहा की पूरी जाँच की। चूत और गांड दोनों जगह की चोटें देखीं। दवाइयाँ दीं – दर्द की, सूजन की, एंटीबायोटिक की। प्रेग्नेंसी से बचने के लिए इमरजेंसी पिल भी दिलवाई और आगे के लिए भी दवा का कोर्स लिख दिया।

मैंने एक ट्रेन्ड नर्स-अटेंडेंट भी रख दी। एक 28-29 साल की भारतीय लड़की, जो नेहा के रूम में ही रहेगी। जब तक नेहा पूरी तरह रिकवर न हो जाए, वह उसके साथ ही सोएगी, दवाइयाँ देगी, खाना खिलाएगी, नहलाएगी।

मैंने नेहा से कहा,

“अब तू बिल्कुल आराम कर। मैं तुझसे और कुछ नहीं करूँगा। आठ दिन और रुकना है पेरिस में। तू अपने रूम में रह, डॉक्टर और नर्स तेरे पास रहेंगी। कोई जबरदस्ती नहीं होगी।”

नेहा ने सिर्फ सिर हिलाया। वह अभी भी रो रही थी, लेकिन थोड़ी राहत की साँस ली।

मैं अपने रूम में आया। अकेला। नेहा के साथ अब और कुछ नहीं करने का फैसला कर लिया था। लेकिन मेरा लंड अभी भी तड़प रहा था। आठ दिन और बाकी थे।

तभी मेरे दिमाग में एक ख्याल आया।

मैंने भारत फोन लगाया। पापा की दूसरी बीवी को – मेरी दूसरी मम्मी को।

उसका नाम था आस्था। उम्र सिर्फ 27 साल। मुझसे तीन साल छोटी। पापा ने चार साल पहले दूसरी शादी की थी। आस्था बहुत खूबसूरत थी – गोरी, लंबे बाल, टाइट बॉडी, और बहुत ही बोल्ड। घर में सब उसे “छोटी मम्मी” कहते थे, लेकिन वह मुझसे उम्र में छोटी थी।

मैंने उससे कहा,

“आस्था, मैं पेरिस में हूँ। आठ दिन और रुकना है। तू आ जा। बिजनेस ट्रिप है, अकेला बोर हो रहा हूँ। टिकट मैं बुक करवा देता हूँ।”

आस्था थोड़ी हैरान हुई, फिर हँसते हुए बोली,

“अच्छा… अकेला तड़प रहा है क्या? ठीक है, आ जाती हूँ। कल की फ्लाइट से।”

अगले दिन शाम को आस्था पेरिस पहुँच गई।

एयरपोर्ट पर मैंने उसे रिसीव किया। वह ब्लैक फॉर्मल ड्रेस में थी, बाल खुले हुए, लिपस्टिक लाल। देखकर मेरा लंड तुरंत तन गया।

वह मुस्कुराई और बोली,

“तो बता… अब क्या प्रोग्राम है?”

मैंने आस्था से कहा,

“अभी तो रूम में जाके चेंज करके नाइटलाइफ एन्जॉय करेंगे। पेरिस की क्लब में। फिर देखेंगे क्या करना है।”

हम रूम पहुँचे। आस्था ने अपना सूटकेस खोला और चेंज करने चली गई। जब बाहर निकली तो मैं देखता रह गया। उसने पहने थे एकदम छोटे-छोटे कपड़े – ब्लैक क्रॉप टॉप जो उसके बड़े-बड़े बूब्स को मुश्किल से कवर कर रहा था, और हाई-वेस्ट मिनी स्कर्ट जो उसकी पतली कमर और गोल गांड को और सेक्सी बना रही थी। पापा की लव मैरिज वाली छोटी बीवी सच में बहुत हॉट लग रही थी। गोरी त्वचा, डीप क्लीवेज, और हर कदम पर बूब्स हिल रहे थे।

मैंने भी शर्ट-पैंट पहने। फिर हम क्लब पहुँचे। पेरिस की नामी नाइट क्लब। लाइट्स, म्यूजिक, भीड़। हमने डांस फ्लोर पर खूब नाचे। आस्था मेरे करीब आकर कमर मटकाती, कभी मेरे सीने से लग जाती। शराब हम दोनों ने ज्यादा नहीं पी – बस दो-तीन ड्रिंक्स। रात के तीन बज गए तब जाकर हम रूम वापस आए। दोनों थके हुए थे, सो गए।

अगले दिन दोपहर एक बजे आँख खुली।

आस्था मेरे बगल में लेटी हुई थी। उसने मुड़कर मुझसे बात शुरू की,

“अब तो तुम्हारी वाइफ को आराम मिला होगा ना?”

मैंने पूछा, “किसे?”

वह हल्के से मुस्कुराई, “चुदाई से। मैंने देखा है रोहित… तुम बहुत जोर की लेते हो। बीवी बेचारी बहुत चिल्लाती है, पर तुम तो नहीं रुकते।”

मैंने जवाब दिया, “क्या करूँ… इतना बड़ा है जो।”

आस्था ने हँसते हुए कहा,

“तुम्हारे पापा जितना तो बड़ा नहीं होगा। 6.5 इंच का है उनका। और मुझे और तेरी मम्मी को रोज़ 2-3 राउंड मारते हैं। मुझे 3, तेरी मम्मी को 2। तो भी बहुत आराम से करते हैं।”

मैंने कहा, “मेरा तो उससे भी छोटा है… और मुझे क्या?”

आस्था ने सिर हिलाया,

“कोई बात नहीं। लेकिन तुमने बीच में इतनी जल्दी क्यों की? कॉन्डम इस्तेमाल करना चाहिए था। टैबलेट तो अच्छी चीज़ नहीं है प्रेग्नेंसी रोकने की। मैं तो कॉन्डम ही इस्तेमाल करती हूँ।”

इतना कहकर वह नहाने चली गई।

उसके जाते ही मेरे दिमाग में बात बैठ गई – यह लड़की मेरे लंड से चुदेगी। मैंने तुरंत होटल रिसेप्शन को फोन किया और एक पूरा पैकेट कॉन्डम मँगवा लिया।

आस्था नहाकर आई। सिर्फ ब्रा और पैंटी में। ब्लैक लेस वाली ब्रा में उसके बड़े बूब्स और भी उभरे हुए लग रहे थे। पतली कमर, फ्लैट पेट, और पैंटी में गोल गांड। वह बोली,

“आराम ही तो करना है।”

मैं नहाने चला गया। नहाकर बाहर आया तो सिर्फ बनियान और शॉर्ट्स पहने हुए – अंदर कुछ नहीं। लंच ऑर्डर कर दिया। फिर कॉन्डम का पैकेट बिस्तर के पास रख दिया।

आस्था ने पूछा, “क्या है यह?”

मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “थोड़ी देर बाद पता चल जाएगा।”

लंच हो गया। फिर दोनों बिस्तर पर लेट गए। थोड़ी देर बातें होती रहीं।

मैं उठकर अपने बैग के पास गया। अंदर से एक बहुत ही महँगा डायमंड नेकलेस निकाला – चमकता हुआ, बड़े-बड़े हीरे जड़े हुए। आस्था को दिखाते हुए बोला,

“मेरी वाइफ के लिए लिया है।”

आस्था की आँखें चमक गईं। वह करीब आई और नेकलेस को छूते हुए बोली,

“यह कितना अच्छा है… बहुत जोर का महँगा है… मुझे भी ऐसा ही चाहिए… मुझे बहुत पसंद है डायमंड का… रोहित मुझे दे दो ना… तुम तुम्हारी वाइफ के लिए दूसरा खरीद लेना…”

मैंने सिर हिलाया,

“नहीं।”

आस्था ने मेरा हाथ पकड़ लिया। आँखों में लालच था,

“जो चाहिए वो कर लूँगी… लेकिन दे दो… बस तुम जो चाहो वो माँग लो… लेकिन दे दो प्लीज… बस 8 दिन तुम्हारी वाइफ बन जाऊँगी… और किसी को कुछ नहीं बोलूँगी…”

मैंने नेकलेस उसके गले के पास ले जाकर कहा,

“ले लो तुम… लेकिन 8 दिन मेरी वाइफ की तरह रहना पड़ेगा मम्मी…”

आस्था ने झट से हाँ कर दी,

“हाँ… जो तुम्हारी वाइफ करती है वो करूँगी…”

थोड़ी और बातें हुईं। फिर मैंने धीरे से कहा,

“अब शुरू हो जाओ।”

आस्था तैयार हो गई। मैंने उसका चेहरा अपने हाथों में लिया और होंठों पर होंठ रख दिए। पहले हल्का किस, फिर गहरा। जीभ अंदर डाल दी। आस्था ने भी जवाब दिया। दोनों की साँसें तेज़ हो गईं।

मैंने अपनी बनियान उतार दी। फिर शॉर्ट्स को नीचे खींच लिया। मेरा 12 इंच लंबा, 4 इंच मोटा कड़ा लंड बाहर निकल आया। पूरा तना हुआ, नसें फूली हुईं।

आस्था देखकर चौंक गई। आँखें फैल गईं। मुँह से निकला,

“जोर से… इतना बड़ा और मोटा… चौंक गई मम्मी… इतना बड़ा है तुम्हारा…”

मैं पूरी तरह नंगा हो गया। फिर आस्था के पीछे जाकर उसकी ब्रा का हुक खोला। ब्रा नीचे गिरी। दो बड़े-बड़े, भारी, गोरे बूब्स बाहर आ गए। निप्पल गुलाबी और कड़े।

मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और एक निप्पल मुँह में ले लिया। जोर-जोर से चूसने लगा। दाँतों से हल्का काटा, खींचा, जीभ से गोल-गोल घुमाया। दूसरा बूब्स भी उसी तरह चूसा। आस्था की कमर बल खा रही थी।

“आह्ह… रोहित… जोर से… आahh…” वह सिसक रही थी।

मैंने उसके दोनों बूब्स को दस-पंद्रह मिनट तक जमकर चूसा, काटा, मसला। निप्पल लाल और सूज गए। फिर मैंने उसकी पैंटी नीचे खींच दी। वह पूरी नंगी हो गई। घनी काली झाड़ वाली चूत सामने थी। पहले से थोड़ी गीली।

मैंने उसके पैर फैलाए और मुँह उसके बीच ले गया। जीभ निकालकर उसकी चूत पर लगाई। ऊपर से नीचे तक चाटा। फिर क्लिट पर जीभ घुमाई, चूसा। दो उंगलियाँ अंदर डालकर धीरे-धीरे हिलाने लगा। जीभ और उंगलियाँ दोनों से उसकी चूत चाटता रहा।

आस्था की सिसकियाँ तेज़ होती जा रही थीं। कमर ऊपर उठ रही थी। दोनों हाथ मेरे बालों में फँसे हुए थे।

“आह्ह… वहाँ… जीभ… और अंदर… रोहित…” वह कराह रही थी।

मैं उसकी चूत को जीभ से चाटता रहा – क्लिट चूसना, होल के अंदर जीभ डालना, पूरा चाटना। उसकी चूत अब पूरी गीली हो चुकी थी। पानी जैसा रस निकल रहा था।

आस्था कराह रही थी। उसकी चूत पूरी गीली हो चुकी थी। मैंने जीभ हटाई और ऊपर उठकर उसके चेहरे की तरफ देखा।

वह साँस लेते हुए बोली,

“रोहित… अब डालो भी… कॉन्डम लगा देना…”

मैंने बिस्तर के पास रखा कॉन्डम का पैकेट उठाया। एक निकाला, पैकेट फाड़ा और अपने तने हुए 12 इंच के मोटे लंड पर चढ़ा दिया। कॉन्डम तनकर चढ़ा, लेकिन पूरा कवर कर पाया।

मैंने आस्था के पैर फैलाए। उसके दोनों घुटने अपने कंधों के पास रखे। सुपाड़ा उसकी गीली चूत के छेद पर रखा।

धीरे से धक्का दिया।

आधा लंड अंदर घुसा।

“आह्ह्ह… दर्द… रोहित… बहुत मोटा है… धीरे…” आस्था की आँखें बंद हो गईं। माथे पर बल पड़ गए।

मैं रुका नहीं। आधे लंड तक ही अंदर-बाहर करने लगा। धीरे-धीरे, लेकिन लगातार। हर धक्के पर उसकी चूत मेरे मोटे लंड को कसकर पकड़ रही थी। कॉन्डम के ऊपर से भी उसकी गर्मी महसूस हो रही थी।

“आह्ह… आह्ह… दर्द हो रहा है… इतना मोटा… पापा का तो इतना नहीं था…” वह सिसक रही थी। दोनों हाथ चादर पकड़े हुए थे।

मैंने स्पीड थोड़ी बढ़ाई। आधा लंड ही अंदर जा रहा था, पूरा नहीं। उसकी चूत इतनी टाइट थी कि आगे बढ़ना मुश्किल लग रहा था। लेकिन मैंने रुकना नहीं चाहा। आधा-आधा पेलता रहा।

पाँच मिनट… दस मिनट… बीस मिनट…

आस्था की सिसकियाँ जारी थीं। कभी “धीरे…” कहती, कभी “आह्ह… अंदर…”। उसकी चूत धीरे-धीरे ढीली पड़ने लगी थी, लेकिन दर्द अभी भी था। निप्पल कड़े थे, बूब्स हिल रहे थे हर धक्के के साथ।

तीस मिनट हो चुके थे। मैं अभी भी सिर्फ आधे लंड से ही चोद रहा था। पसीना मेरे बदन पर आ गया था। आस्था की चूत से पानी निकल रहा था, कॉन्डम गीला हो चुका था।

“रोहित… अब पूरा… डाल दो… सह लूँगी…” उसने आँखें खोलकर कहा। आवाज़ में दर्द और इच्छा दोनों थे।

मैंने सिर हिलाया। लेकिन अभी भी आधा ही पेलता रहा। चालीस मिनट… पैंतालीस मिनट।

पैंतालीस मिनट पूरे होने पर मैंने उसकी कमर दोनों हाथों से जकड़ ली। एक जोरदार झटका मारा।

पूरा 12 इंच लंड एक ही धक्के में उसकी चूत के अंदर समा गया। सुपाड़ा उसकी कोख तक जा पहुँचा।

“उई माँ… आह्ह्ह्ह… फट गई… बहुत अंदर… दर्द… रोहित… निकालो… बहुत दर्द हो रहा है…” आस्था जोर से चिल्लाई। आँखों से आँसू निकल आए। नाखून मेरी पीठ में गड़ गए।

मैंने लंड अंदर ही दबाए रखा। पूरा अंदर। उसकी चूत मेरे मोटे लंड से पूरी तरह फैल चुकी थी। वह रो रही थी, सिसक रही थी।

“आह्ह… बहुत बड़ा… सह नहीं पा रही… धीरे… प्लीज धीरे…” आँसू उसकी आँखों से बह रहे थे।

मैंने धीरे-धीरे धक्के शुरू किए। पूरा लंड बाहर निकालकर फिर अंत तक पेलना। हर धक्के पर आस्था की चीख निकल जाती। उसकी चूत कस रही थी, दर्द से सिकुड़ रही थी।

“आह्ह्ह… रोहित… दर्द… बहुत दर्द… लेकिन मत निकालो… अंदर ही रखो…” वह रोते हुए बोल रही थी। कमर ऊपर उठाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन दर्द की वजह से काँप रही थी।

मैंने स्पीड धीरे-धीरे बढ़ाई। अब पूरा लंड अंदर-बाहर हो रहा था। पच-पच की आवाज़ें। आस्था की चीखें और सिसकियाँ कमरे में गूँज रही थीं। उसके बड़े बूब्स जोर-जोर से हिल रहे थे।

“ले मम्मी… पूरा ले… तेरी चूत में… पापा से बड़ा…” मैं उसके कान में फुसफुसाया।

आस्था सिर्फ रो रही थी और कराह रही थी। आँखें बंद, आँसू बहते हुए। लेकिन उसने मुझे धकेला नहीं। दोनों टाँगें मेरे कंधों पर ही थीं।

मैंने पोजीशन बदल दी।

आस्था को पलटा और घोड़ी बना दिया। तकिया उसके पेट के नीचे रख दिया ताकि गांड और चूत दोनों ऊपर उठ जाएँ। फिर पीछे से लंड उसकी चूत में एक झटके में डाल दिया।

“आह्ह्ह्ह… दर्द… बहुत दर्द… रोहित… यह पोजीशन… और अंदर जा रहा है…” आस्था जोर-जोर से रोने लगी। आवाज़ फट रही थी। पहले से जो दर्द था, वह इस पोजीशन में दोगुना हो गया। मेरा मोटा लंड अब और गहराई तक जा रहा था। हर धक्के पर उसकी चूत फैल रही थी।

मैंने कमर पकड़कर जोर-जोर से पेलना शुरू कर दिया। पूरा लंड अंदर-बाहर। पच-पच की तेज़ आवाज़ें। आस्था की चीखें और भी तेज़ हो गईं। वह चादर पकड़े हुए सिर पटक रही थी।

“आह्ह… निकालो… बहुत दर्द… सह नहीं पा रही… रोहित प्लीज…” वह फुट-फुट कर रो रही थी। आँसू बिस्तर पर गिर रहे थे।

मैंने कुछ देर और इसी पोजीशन में चोदा। उसकी चूत पूरी तरह गीली और खुली हुई थी। फिर अचानक मैंने लंड बाहर निकाल लिया।

कॉन्डम उतार दिया। लंड अभी भी पूरा तना हुआ था, नसें फूली हुईं। मैंने आस्था को घुमाया और उसके मुँह के सामने खड़ा हो गया।

“मुँह खोल,” मैंने कहा।

आस्था रोते हुए मुँह खोला। मैंने लंड का सिरा उसके होंठों पर रखा और धीरे से अंदर धकेला। सिर्फ एक इंच ही अंदर गया था, लेकिन मेरा मोटा सुपाड़ा उसका पूरा मुँह भर गया। गाल फूल गए। आँखें और बड़ी हो गईं।

मैंने उसके सिर को पकड़ा और धीरे-धीरे हिलाने लगा। थोड़ा-थोड़ा अंदर-बाहर। फिर अचानक जोर से धक्का दिया और उसी पल झड़ गया। गरम-गरम गाढ़ा वीर्य की धार उसके मुँह में भर गई।

“पूरा पी जा,” मैंने कहा और सिर दबाए रखा।

आस्था छटपटाई। गले तक वीर्य चला गया। उसने निगलने की कोशिश की, लेकिन कुछ बाहर भी निकल आया। आँखों से आँसू बह रहे थे। जब मैंने लंड बाहर निकाला तो उसके मुँह के कोनों से सफेद वीर्य रिस रहा था।

वह जोर-जोर से खाँसते हुए बोली, रोते हुए,

“यह क्या किया तुमने… अब तक तुम्हारे पापा का भी चूत में पानी नहीं भरवाया… और तुमने मेरे मुँह में लंड घुसेड़ दिया… और पानी पिला दिया… बहुत दर्द हो रहा था…”

उसके गाल लाल थे। आँखें सूजी हुईं। मुँह से अभी भी हल्का वीर्य टपक रहा था। वह बिस्तर पर बैठकर रो रही थी।

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