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सुहागरात और हनीमून

पापा और मेरी सुहागरात मालदीव्स मे 8

· Online Admin

लक्ष ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया। वह मेरे ऊपर झुका हुआ था। उसने धीरे-धीरे मेरी पैंटी के किनारे पकड़े और नीचे सरकाने लगा। मैं शर्मा कर अपनी जाँघें थोड़ी सी बंद करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन लक्ष ने प्यार से उन्हें फैला दिया।

पैंटी पूरी तरह उतर गई। अब मैं पूरी तरह नंगी थी। लक्ष ने मेरे पूरे शरीर को देखा और बोला,

“तुम्हारी चूत एकदम साफ है… बहुत सुंदर।”

मैं शर्मा कर बोली,
“साफ तो हो गई… आज मेरी सुहागरात है ना…”

लक्ष ने मुस्कुराते हुए मेरे पेट, नाभि, जाँघों और फिर धीरे-धीरे मेरी चूत पर हाथ फेरा। उसकी उँगलियाँ बहुत हल्के से मेरी चूत के ऊपर घूम रही थीं। मैं सिहर उठी।

“आह्ह्ह…” मेरे मुंह से हल्की आह निकली।

लक्ष ने मुझे चूमते हुए कहा,
“डरो मत… मैं बहुत धीरे करूँगा।”

थोड़ी देर तक वह मेरे शरीर को चाटता रहा — स्तनों को, पेट को, जाँघों को। फिर उसने मेरी चूत पर हल्का-हल्का हाथ फेरना शुरू किया। मैं काँप रही थी।

फिर लक्ष ने मुझे उठाकर बैठा दिया।

“अब आँखें बंद करो,” उसने कहा।

मैंने आँखें बंद कर लीं। लक्ष ने मेरे गले में एक खूबसूरत डायमंड नेकलेस पहनाई।

“ये तुम्हारे लिए… Happy Suhagrat,” उसने फुसफुसाया।

मैंने भी उसे एक luxurious watch गिफ्ट की।

फिर लक्ष ने कहा,
“अब आँखें खोलो।”

जब मैंने आँखें खोलीं तो लक्ष ने अपना अंडर वियर उतार दिया।

उसका लंड बाहर निकला — 13 इंच लंबा और बहुत मोटा। नसों से फटा हुआ, सिरा मोटा और चमकदार। मैं उसे देखकर चौंक गई।

“ये… ये तो बहुत बड़ा है… मेरे पापा से भी बड़ा और मोटा…” मैं डर गई।

मेरा हाथ उसमें पूरी तरह नहीं समा रहा था। मैं डर के मारे काँपने लगी। मेरी सारी इच्छा एकदम ठंडी पड़ गई।

“लक्ष… मुझे नहीं करना… डर लग रहा है…” मैं रोने लगी।

लक्ष ने मुझे प्यार से गले लगाया और बोला,
“नहीं करना है तो कोई बात नहीं… बस हाथ से सहलाओ तो सही।”

मैंने थोड़ी देर उसके लंड को हाथ से सहलाया। वह और भी सख्त हो गया।

“अब मुझे और डर लग रहा है…” मैंने कहा।

लक्ष ने कहा,
“मम्मी ने condom और lubricant दिए थे… कहाँ हैं?”

मैंने उन्हें निकालकर दे दिए। लक्ष ने मुझे सिखाया कि condom कैसे लगाते हैं। फिर उसने lubricant लगाकर मेरी चूत पर भी लगाया।

“अब आराम से…” कहकर उसने मुझे लिटाया और लंड मेरी चूत के मुंह पर रख दिया।

जैसे ही उसने थोड़ा दबाया, मैं जोर से चीख पड़ी —

“आह्ह्ह!!! नहीं… बहुत दर्द हो रहा है… रुक जाओ लक्ष!!! मैं नहीं कर सकती!!!”

मैंने उसे पैरों से हटाया और नंगी ही कमरे से बाहर भाग गई।

बाहर

मेरी चीख सुनकर पापा, अनन्या मम्मी, प्रिया मम्मी और फोरम बाहर आ गए। फोरम और प्रिया मम्मी नंगी थीं, पापा का लंड condom लगाए खड़ा था, अनन्या मम्मी सिर्फ पैंटी में थीं।

मैं रोते हुए बोली,
“लक्ष का बहुत बड़ा है… मुझे नहीं करना… बहुत डर लग रहा है…”

पापा ने मुझे देखा और अनन्या मम्मी व प्रिया मम्मी को इशारा किया।
“तुम दोनों जिया को देखो। फोरम, तुम अंदर आ जाओ और घोड़ी बन जाओ।”

अनन्या और प्रिया मम्मी मुझे अंदर ले गईं। लक्ष अभी भी नंगा खड़ा था, condom लगा हुआ।

दोनों मम्मियाँ सिर्फ पैंटी में थीं, उनके बड़े स्तन दिख रहे थे।

मैं रोते हुए बाहर आ गई थी। मेरी आँखों से आँसू बह रहे थे। अनन्या मम्मी और प्रिया मम्मी तुरंत मेरे पास आईं।

अनन्या मम्मी: “क्या हुआ जिया? तुम क्यों बाहर आ गई?”

जिया: “मम्मी… लक्ष का बहुत बड़ा है… मुझे डर लग रहा है… मैं नहीं कर सकती…”

प्रिया मम्मी: “डर तो सहना ही पड़ेगा बेटा… ये तुम्हारी सुहागरात है।”

जिया: “मुझे बहुत डर लग रहा है… मैं सह नहीं पाऊँगी…”

अनन्या मम्मी: “मैं तुम्हारे जितनी उम्र में थी तब तुम 2 साल की थीं। तुमसे भी 2 साल छोटी थी मैं जब मेरी सुहागरात हुई थी।”

जिया: “लेकिन लक्ष का बहुत बड़ा है… मुझे नहीं सहना आएगा…”

लक्ष अभी भी नंगा खड़ा था, सिर्फ अंडर वियर उतारा हुआ। वह दोनों मम्मियों के बड़े-बड़े स्तन देखकर उत्तेजित हो रहा था।

प्रिया मम्मी: “तुम्हारे पापा का भी बहुत बड़ा है… हमने भी सहा है… हमें भी दर्द हुआ था… लेकिन अब हमें मजा आता है।”

अनन्या मम्मी: “फोरम की भी सुहागरात थी… वो भी virgin थी… उसे भी बहुत दर्द हुआ था… लेकिन उसने सहा… उसके बाद तुम्हारे पापा ने उसे 4 बार और चोदा… पूरा डाल-डालकर।”

जिया: “मुझे डर लग रहा है… और दर्द भी हो रहा है…”

दोनों मम्मियाँ अब थोड़े गुस्से में आ गईं।

अनन्या मम्मी: “दर्द तो होगा ही… लेकिन बाद में मजा भी आएगा।”

प्रिया मम्मी: “हमें भी मजा लेना है सुहागरात का… और तुम रो रही हो। अनन्या, जिया के पैर और हाथ पकड़ो… गुसा दो।”

जिया: “नहीं मम्मी… ऐसा मत करो… प्लीज…”

तभी पापा ने प्रिया मम्मी को आवाज लगाई,
“प्रिया… आ जाओ।”

प्रिया मम्मी ने कहा,
“अब मेरी बारी आ गई… मैं जा रही हूँ। अनन्या, तुम इसको कैसे भी करके एक राउंड करवा के आना।”

प्रिया मम्मी दरवाजा बंद करके चली गईं।

अनन्या मम्मी ने मेरी तरफ देखा और गंभीर स्वर में बोलीं,
“बेटा, मान जा… तुझे करना ही पड़ेगा। जबरदस्ती करेगी तो भी करना है… और प्यार से करेगी तो भी करना है।”

जिया: “मुझे डर लग रहा है… आप लोगों ने फोरम को करके दिखाया है… और मुझे सिर्फ बोल रहे हो ना…”

अनन्या मम्मी: “मैं तुम्हें भी दिखा सकती हूँ… लेकिन तुम्हारे पापा तुम्हारे सामने नहीं करेंगे… उन्हें भी शर्म आती है sex करने में।”

जिया: “कोई बात नहीं… लक्ष, मेरे साथ करके दिखा दो…”

अनन्या मम्मी: “तुम क्या बोल रही हो? मैं लक्ष के साथ नहीं कर सकती…”

जिया: “तुम भी डर गई ना… इतना बड़ा देखकर…”

अनन्या मम्मी: “जो मैं करूँगी तो तुम्हें भी पूरा घुसवाना पड़ेगा… land चूत में…”

जिया: “हाँ… ठीक है…”

 

अनन्या मम्मी ने लक्ष की तरफ देखा और फिर मेरी तरफ मुड़ी। उनकी आँखों में एक फैसला था।

“ठीक है… मैं तुम्हें सिखाती हूँ। लेकिन तुम सिर्फ देखोगी… हाथ नहीं लगाओगी।”

अनन्या मम्मी ने लक्ष को बेड पर धकेल दिया। लक्ष नंगा लेट गया, उसका 13 इंच का मोटा लंड सीधा खड़ा था। अनन्या मम्मी ने अपनी पैंटी उतार दी और लक्ष के ऊपर चढ़ गईं।

वे मेरी तरफ देखकर बोलीं,
“जिया, देखो… पहले foreplay很重要 है।”

अनन्या मम्मी ने लक्ष के लंड को दोनों हाथों में पकड़ा और धीरे-धीरे सहलाने लगीं। फिर झुककर उसका सिरा चूसने लगीं। उनकी जीभ लंड के चारों तरफ घूम रही थी। लक्ष आह भर रहा था।

“देखो जिया… कैसे चूसते हैं…” अनन्या मम्मी ने कहा और आधा लंड मुंह में ले लिया। वे ऊपर-नीचे सिर हिला रही थीं, गले तक लेने की कोशिश कर रही थीं।

थोड़ी देर चूसने के बाद अनन्या मम्मी लक्ष के ऊपर बैठ गईं। उन्होंने अपना एक हाथ नीचे ले जाकर लक्ष का लंड अपनी चूत के मुंह पर रखा और धीरे-धीरे बैठने लगीं।

“आह्ह्ह्ह…” अनन्या मम्मी की सिसकारी निकली।

वे धीरे-धीरे नीचे बैठती गईं। लक्ष का मोटा लंड उनकी चूत में घुसता जा रहा था।

“देखो जिया… धीरे-धीरे अंदर लेना पड़ता है… जल्दी मत करना…”

अनन्या मम्मी ने पूरा लंड अंदर ले लिया। फिर वे ऊपर-नीचे हिलने लगीं। उनके बड़े स्तन जोर-जोर से उछल रहे थे। लक्ष नीचे से उनकी कमर पकड़कर ऊपर धकेल रहा था।

“आह्ह्ह्ह… लक्ष… और तेज… हाँ… इसी तरह…” अनन्या मम्मी सिसकार रही थीं।

वे तेजी से उछल-उछलकर चुदाई कर रही थीं। कमरे में “पच्… पच्… पच्…” की आवाजें भर गई थीं। अनन्या मम्मी मेरी तरफ देखकर बोल रही थीं,

“जिया… देखो… कैसे कमर हिलाते हैं… कैसे गहराई तक लेते हैं…”

लक्ष ने अनन्या मम्मी को घुमाकर doggy style में कर दिया। अब वे मेरी तरफ मुँह करके थीं। लक्ष ने पीछे से जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया। अनन्या मम्मी की चीखें निकल रही थीं —

“आह्ह्ह्ह!!! हाँ लक्ष… और तेज… जिया देख रही है… दिखा दो उसे… आह्ह्ह्ह!!! फाड़ दो मेरी चूत!!!”

लक्ष बहुत जोर से चोद रहा था। अनन्या मम्मी की आँखें बंद थीं, मुंह खुला था। वे बार-बार चीख रही थीं और मुझे देख-देखकर बोल रही थीं,

“जिया… देखो… यही असली मजा है… आह्ह्ह्ह!!! तुम भी एक दिन ऐसा ही करोगी…”

लक्ष ने आखिर में अनन्या मम्मी की चूत में ही अपना पूरा वीर्य छोड़ दिया। अनन्या मम्मी काँपकर झड़ गईं।

वे थककर बेड पर लेट गईं और मेरी तरफ देखकर बोलीं,

“समझ आई जिया… कैसे करना है?”

मैं चुपचाप सिर हिला दी। मेरी चूत पूरी तरह गीली हो चुकी थी।

 

लक्ष थोड़ी देर आराम करने के बाद फिर से तैयार हो गया। उसका 13 इंच का मोटा लंड फिर से पूरी तरह खड़ा और सख्त हो चुका था। नसें उभरी हुई थीं, सिरा चमक रहा था।

अनन्या मम्मी ने अपनी पैंटी पहन ली थी, लेकिन ऊपर कुछ नहीं पहना था। उनके बड़े-बड़े स्तन खुले हुए थे। वे मेरी तरफ देखकर मुस्कुराईं और बोलीं,

“जिया… पहले लंड चूसो… फिर आगे की बात करेंगे।”

मैं डर गई।
“मम्मी… नहीं… मुझे नहीं करना…”

अनन्या मम्मी ने मेरे बाल पकड़ लिए और मुझे घुटनों के बल बैठा दिया। लक्ष खड़ा था, उसका लंड मेरे चेहरे के सामने था।

“चूसो जिया… डरने की कोई बात नहीं।”

मैंने मना किया, लेकिन अनन्या मम्मी ने मेरा सिर आगे धकेला। लक्ष का मोटा लंड मेरे होंठों से टकराया।

“मुँह खोलो…” अनन्या मम्मी ने कहा।

मैंने आँखें बंद करके मुँह खोला। लक्ष ने धीरे से अपना लंड मेरे मुंह में डाला।

“आह्ह्ह…” लक्ष ने आह भरी।

मैंने आधा सिरा मुंह में लिया। स्वाद और मोटाई से मेरा मुंह भर गया। अनन्या मम्मी ने मेरे सिर को आगे-पीछे हिलाने लगीं।

“ऊपर-नीचे करो… जीभ से चाटो… हाँ… इसी तरह…”

लक्ष का लंड मेरे मुंह में आधा तक जा रहा था। मैं गला खराब हो जाने के कारण उबकाई ले रही थी, लेकिन अनन्या मम्मी नहीं छोड़ रही थीं।

“चूसो जिया… अच्छे से चूसो… तुम्हें सीखना पड़ेगा…”

लक्ष मेरे बाल पकड़कर धीरे-धीरे मुँह में हिला रहा था। मेरे आँसू निकल आए थे।

थोड़ी देर चूसने के बाद अनन्या मम्मी ने कहा,
“अब काफी है… अब असली बात शुरू करते हैं।”

वे मेरी तरफ देखकर बोलीं,
“जिया, अब तुम तैयार हो।”

मैं रोते हुए बोली,
“मम्मी… प्लीज… मुझे डर लग रहा है…”

लेकिन अनन्या मम्मी ने मेरे हाथ पकड़ लिए। लक्ष भी मेरी तरफ बढ़ रहा था।

 

 

 

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