LoveStoryHub – हिंदी सेक्स कहानियाँ
होम All Categories
सुहागरात और हनीमून

दीदी की शादी और सुहागरात 1

· Online Admin

दीदी की शादी और सुहागरात – छेद से देखा हुआ सच

 

मेरी दीदी मुझसे दो साल बड़ी है। जब ये कहानी हुई तब दीदी की उम्र २१ साल थी और मेरी १९। हमारे घर में हम तीन भाई-बहन थे — मैं, दीदी, एक और बड़ी बहन, और एक छोटा भाई। मम्मी-पापा के साथ हम सब एक साथ रहते थे।

दीदी का स्वभाव शांत और थोड़ा शर्मीला था। पढ़ाई में अच्छी थी और घर के काम में भी मम्मी का हाथ बँटाती थी। उसके दो-तीन करीबी सहेलियाँ थीं, जिनमें से एक लड़की के साथ वो अक्सर बातें करती रहती थी। घर वाले उसे सामान्य दोस्ती ही समझते थे।

फिर एक दिन घर में चर्चा शुरू हुई कि दीदी की शादी का समय आ गया है। रिश्तों की बातें आने लगीं। कई लड़के देखे गए, लेकिन जब राहुल आया तो बात आगे बढ़ी। राहुल २५ साल का था, लंबा-चौड़ा, हैंडसम और अच्छे परिवार से था। पहली मुलाकात में ही दीदी को वो पसंद आ गया। कुछ ही दिनों में बात पक्की हो गई।

शादी की तैयारी जोरों पर शुरू हो गई। घर में मेहमान आने लगे, खरीदारी होने लगी। मम्मी और बड़ी बहन दिन-रात व्यस्त रहतीं। दीदी के लिए लेहंगे, जेवर, मेकअप सब तय हुए। मैं और छोटा भाई भी घर के कामों में मदद करते। पूरे घर में खुशी का माहौल था।

शादी का दिन

शादी वाले दिन सुबह से ही घर में रौनक थी। लड़कियों की टोली आई, गीत गाए जा रहे थे। दीदी को सजाया गया। लाल रंग का भारी लेहंगा, गहने, मेंहदी, और दूल्हे के नाम की चूड़ियाँ। जब वो तैयार होकर बैठी तो वाकई बहुत खूबसूरत लग रही थी। २१ साल की उम्र में उसका चेहरा चमक रहा था, लेकिन आँखों में हल्की घबराहट भी थी।

शाम को बारात आई। राहुल घोड़ी पर सवार होकर आया। वो काले शेरवानी में और भी हैंडसम लग रहा था। फेरों के समय मंडप में दीदी और राहुल साथ खड़े थे। फेरों के दौरान दीदी कई बार नज़रें झुका लेती थी। पापा ने कन्यादान दिया। फिर सिंदूर और मंगलसूत्र की रस्म हुई।

रात को विदाई का समय आया। मम्मी रो रही थीं, पापा की आँखें भी नम थीं। दीदी ने सबको गले लगाया। जब मेरी बारी आई तो उसने मुझे कसकर गले लगाया और धीमी आवाज में बोली, “ख्याल रखना अपना।” मैंने सिर्फ सिर हिलाया। छोटी बहन और भाई भी रो रहे थे।

डोली सजकर तैयार थी। राहुल ने दीदी का हाथ पकड़ा और उसे कार की तरफ ले गया। पूरे परिवार ने चावल और फूल बरसाए। दीदी ने एक बार पीछे मुड़कर घर को देखा, फिर घूँघट करके बैठ गई। कार धीरे-धीरे निकल गई।

घर में अचानक सन्नाटा छा गया। मम्मी रोते हुए अंदर चली गईं। पापा चुपचाप बैठे रहे। मैं भी देर तक गेट के पास खड़ा रहा। दीदी अब किसी और घर की हो चुकी थी।

विदाई हो गई थी। घर में उदासी छाई हुई थी, लेकिन अगले दिन शाम को दीदी और जीजू हमारे घर मिलने आए। शादी के बाद दूसरे दिन लड़की वाले घर आना आम बात होती है। मम्मी-पापा ने उनका स्वागत किया। घर में फिर से रौनक आ गई। रिश्तेदार भी कुछ लोग आ गए थे।

मैंने भी जीजू से हाथ मिलाया। वो हैंडसम लग रहे थे। दीदी घूँघट किए हुए थी, लेकिन मुस्कुरा रही थी। सब बैठे, बातें हुईं। फिर खाना परोसा गया। मैंने भी सेवा में हाथ बँटाया। खाना खाते समय दीदी ने मौका देखकर मेरे कान में धीरे से कहा,

“मेरे वाले रूम को तैयार कर देना… आज हम यहीं रुकने वाले हैं।”

मैंने सिर हिला दिया। उस पल मुझे साफ समझ आ गया था कि आज रात उस कमरे में कुछ होने वाला है। दीदी और जीजू पहली रात घर पर बिताने वाले थे।

खाना खत्म होने के बाद मम्मी ने मुझे बुलाया।
“बेटा, चल दीदी के कमरे में बिस्तर लगा दें। फूल भी डालने हैं।”

मैं मम्मी के साथ कमरे में गया। मम्मी बिस्तर पर चादर बिछा रही थीं और गुलाब के फूल बिखेर रही थीं। मैंने पूछा,

“मम्मी, बिस्तर पर फूल क्यों डाल रहे हो?”

मम्मी मुस्कुराईं, “बेटा, तेरे जीजू पहली बार हमारे घर आए हैं। अच्छा बिस्तर तैयार करके देना चाहिए। नई-नवेली जोड़ी है ना।”

मैं चुपचाप मदद करता रहा, लेकिन मन में साफ था कि फूल सिर्फ स्वागत के लिए नहीं हैं। दीदी और जीजू आज रात यहीं रहने वाले हैं… और कुछ और भी होने वाला है।

कमरा तैयार हो गया। मैंने अपने कमरे में जाकर दरवाजा बंद कर लिया। मेरे कमरे और दीदी के कमरे के बीच वाली दीवार में अलमारी के पीछे एक छोटा लेकिन साफ छेद था। पहले वहाँ एसी का पाइप जाने का होल था, जो बाद में बंद नहीं हुआ था। उस छेद से दीदी का पूरा कमरा साफ दिखता था। बिस्तर, अलमारी, खिड़की… सब कुछ नजर आता था। और सबसे बड़ी बात – अंदर से किसी को पता नहीं चलता था कि बाहर से कोई देख रहा है।

मैंने उस छेद के पास जाकर देखा। कमरा तैयार पड़ा था। फूल बिखरे हुए थे। मुझे पता था कि रात को दीदी और जीजू जब अंदर आएंगे, तो मैं यहीं से सब कुछ देख सकूँगा… और उन्हें जरा भी पता नहीं चलेगा।

खाना खाने के बाद थोड़ी देर बातें हुईं। फिर जीजू ने अचानक कहा, “चलो, सबको आइसक्रीम खिलाता हूँ। बाहर घूम भी आते हैं।”

मैं, मेरा छोटा भाई, दीदी और जीजू — हम चारों निकल पड़े। जीजू ने अपनी कार निकाली। दीदी आगे सीट पर बैठीं, घूँघट हल्का सा किए हुए। मैं और भाई पीछे बैठे। रास्ते में जीजू हल्के-फुल्के मजाक कर रहे थे। दीदी कभी-कभी मुस्कुरा देती थीं।

थोड़ी दूर जाकर जीजू ने एक अच्छे आइसक्रीम पार्लर के बाहर गाड़ी रोकी। हम सब उतरे। जीजू ने सबके लिए आइसक्रीम मँगवाई। मैंने चॉकलेट, भाई ने स्ट्रॉबेरी, दीदी ने वैनिला और जीजू ने भी वैनिला ली। हम लोग खड़े-खड़े आइसक्रीम खा रहे थे। माहौल हल्का और खुशनुमा था। दीदी और जीजू एक-दूसरे की तरफ कभी-कभी देख लेते थे।

आइसक्रीम खत्म होने के बाद हम वापस कार में बैठे। कुछ ही दूरी पर जीजू ने अचानक गाड़ी एक मेडिसिन शॉप के बाहर रोक दी। उन्होंने कहा,

“मेरा सिर दर्द कर रहा है। मुझे एक टैबलेट लेनी है। दो मिनट में आता हूँ।”

वो गाड़ी से उतरकर मेडिसिन शॉप के अंदर चले गए। हम तीनों कार में इंतजार करते रहे। करीब पाँच-सात मिनट बाद जीजू वापस आए। उनके हाथ में एक छोटा सा काला बैग था। उन्होंने कार में बैठते ही वो बैग दीदी की तरफ बढ़ा दिया। दीदी ने चुपचाप बैग ले लिया और अपनी पल्लू के नीचे छुपा लिया। हम दोनों भाइयों ने कुछ नहीं पूछा। ना दीदी ने कुछ कहा, ना जीजू ने। बस गाड़ी स्टार्ट हो गई और हम घर की तरफ चल दिए।

घर पहुँचते ही जीजू सीधे दीदी वाले कमरे में चले गए। सामान रखा और दरवाजा आधा खुला छोड़ दिया। मम्मी ने दीदी को किचन में बुलाया और हल्दी वाला गुनगुना दूध दिया।

“पी ले बेटी, थकान उतर जाएगी। पहली रात है ना घर की,” मम्मी ने प्यार से कहा।

दीदी ने दूध पी लिया। मैंने मौका देखा और अपने कमरे में चला गया। दरवाजा बंद कर लिया। तुरंत अलमारी के पीछे वाले छेद के पास जाकर खड़ा हो गया। वहाँ से दीदी का पूरा कमरा साफ दिख रहा था। बिस्तर पर फूल अभी भी बिखरे हुए थे। जीजू कमरे में कुर्सी पर बैठे हुए मोबाइल देख रहे थे।

थोड़ी देर बाद दीदी का कमरे का दरवाजा खुला। वो अंदर आईं। हाथ में वो काला बैग था। उन्होंने पीछे मुड़कर दरवाजा बंद कर दिया। हल्की सी क्लिक की आवाज आई। अब कमरा पूरी तरह बंद था।

मैं छेद से देखता रहा। दीदी ने घूँघट हटाया और बैग को बेड पर रखा। जीजू ने सिर उठाकर उनकी तरफ देखा। दोनों की नजरें मिलीं। कमरे में एक अलग सी खामोशी छा गई थी।

मैं छेद से देख रही थी। दीदी ने दरवाजा बंद करने के बाद थोड़ी देर खड़ी रही। फिर उसने उस काले बैग को खोला। अंदर से जीजू ने एक ५-स्टार चॉकलेट निकाली और दीदी की तरफ बढ़ा दी।

“लो, खा लो। थोड़ा मीठा हो जाएगा,” जीजू ने मुस्कुराते हुए कहा।

दीदी ने चॉकलेट ली। उसके गाल हल्के लाल हो गए थे। शादी के अगले दिन होने के बावजूद आज वास्तव में उनकी पहली रात थी। कल शादी वाले दिन दोनों इतने थक गए थे कि जल्दी सो गए थे। शादी से पहले दोनों कभी अकेले मिले भी नहीं थे। सब कुछ अरेंज्ड था।

दीदी ने चॉकलेट का एक छोटा सा पीस तोड़ा और मुँह में रखा। जीजू ने भी एक पीस लिया। दोनों चुपचाप चॉकलेट खा रहे थे। कमरे में हल्की सी खामोशी थी। फिर जीजू ने अचानक दीदी का हाथ पकड़ लिया और उन्हें अपनी तरफ खींच लिया।

दीदी की साँस रुक गई। जीजू ने दोनों हाथों से उसका चेहरा पकड़ा और जोर से होठों पर अपने होठ रख दिए। पहला किस अचानक और जोरदार था। दीदी की आँखें खुली की खुली रह गईं। जीजू के होंठ उसके होठों को जोर से दबा रहे थे। कुछ सेकंड बाद दीदी की पलकें भी झुक गईं।

जीजू ने किस और गहरा कर दिया। उसकी जीभ दीदी के होठों को खोलने लगी। दीदी पहले हिचकिचाई, फिर धीरे-धीरे उसके होठ थोड़े ढीले पड़े। जीजू ने मौका देखा और अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी। दोनों का किस अब गीला और जोरदार हो चुका था। जीजू का एक हाथ दीदी की कमर पर था और दूसरा उसके सिर के पीछे। वो दीदी को अपनी तरफ और कसकर खींच रहा था।

दीदी के हाथ पहले जीजू की छाती पर थे, फिर धीरे-धीरे उसकी गर्दन पर चले गए। कमरे में सिर्फ उनके किस करने की हल्की आवाजें आ रही थीं। जीजू कभी उसके निचले होठ को चूसता, कभी ऊपरी को। दीदी की साँसें तेज हो गई थीं। उसका शरीर हल्का सा काँप रहा था।

जीजू ने किस तोड़े बिना ही दीदी को बेड की तरफ धकेलना शुरू कर दिया। दीदी पीछे की तरफ कदम बढ़ाती गई जब तक उसके घुटने बेड से नहीं टकराए। जीजू ने उसे धीरे से बेड पर बैठा दिया और खुद भी उसी के सामने घुटनों के बल बैठ गया। दोनों के होंठ अभी भी जुड़े हुए थे। किस और तेज हो गया था।

मैं छेद से साँस रोके हुए यह सब देख रही थी। मेरे दिल की धड़कन तेज हो चुकी थी। अंदर दीदी और जीजू जोर-जोर से किस कर रहे थे। पहली रात की शुरुआत हो चुकी थी।

किस काफी देर तक चलता रहा। जीजू का हाथ अब दीदी की पीठ पर ब्लाउज के हुक के पास पहुँच गया था। उसने धीरे से हुक खोले। ब्लाउज ढीला पड़ गया। दीदी की साँस एकदम से तेज हो गई। उसने जीजू का हाथ पकड़ने की कोशिश की, लेकिन जीजू ने धीरे से उसका हाथ हटा दिया।

जीजू ने ब्लाउज के दोनों सिरे कंधों से नीचे सरका दिए। ब्लाउज बेड पर गिर गया। अब दीदी सिर्फ ब्रा में थी। जीजू ने उसकी आँखों में देखा। दीदी की आँखों में साफ डर दिख रहा था। उसके होठ काँप रहे थे।

“डर मत…” जीजू ने धीमी आवाज में कहा और ब्रा के स्ट्रैप को कंधे से नीचे किया। फिर पीछे का हुक खोला। ब्रा ढीली पड़ते ही दीदी ने दोनों हाथों से अपने स्तनों को ढक लिया। उसका चेहरा लाल हो चुका था और साँसें तेज चल रही थीं।

जीजू ने उसके हाथ धीरे से हटाए। ब्रा पूरी तरह उतर गई। दीदी के दोनों स्तन अब खुले हुए थे — गोल, टाइट और गुलाबी निप्पल वाले। जीजू ने कुछ पल बस देखा। फिर दोनों हाथों से उसके स्तनों को पकड़ लिया और धीरे-धीरे दबाने लगा।

दीदी का शरीर अकड़ गया।
“आह… छोड़ो…” उसकी आवाज में डर साफ था।

लेकिन जीजू रुका नहीं। उसने और जोर से स्तनों को मसला। फिर सिर झुकाया और एक निप्पल को मुँह में ले लिया। जोर से चूसने लगा। दीदी की कमर उठ गई और उसके मुँह से दबी हुई आवाज निकली —

“आह्ह… नहीं… छोड़ो… दर्द हो रहा है…”

जीजू ने दूसरा स्तन भी हाथ से दबाते हुए पहले वाले को और जोर से चूसा। कभी निप्पल को दाँतों से हल्का काटता, कभी जीभ से घुमाता। दीदी की आँखों में आँसू आ गए थे। वो डर रही थी। उसका शरीर काँप रहा था और वो बार-बार जीजू का सिर धक्का देकर हटाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन जीजू उसकी कलाई पकड़कर रोक रहा था।

मैं छेद से यह सब देख रही थी। उस पल मुझे साफ समझ आ गया कि दीदी के स्तनों को आज से पहले कभी किसी ने नहीं छुआ था — न कॉलेज में, न ही जीजू ने शादी से पहले। वो पूरी तरह अनछुई थी। इसलिए वो इतनी डरी हुई थी। उसकी साँसें तेज थीं, आँखें बंद थीं और वो सिर्फ सह रही थी।

जीजू अब दोनों स्तनों को बारी-बारी से जोर-जोर से चूस रहा था। दीदी की आवाजें दबी-दबी निकल रही थीं। कमरे में सिर्फ उसकी हल्की सिसकियाँ और जीजू के मुँह की आवाजें गूँज रही थीं।

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *