दीदी की शादी और सुहागरात 2
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दीदी अभी भी डरी हुई थी। उसके दोनों स्तन जीजू के मुँह और हाथों में थे। उसने हल्की सिसकी भरते हुए कहा,
“मुझे शर्म आ रही है… इतना मत करो…”
जीजू ने अपना मुँह स्तनों से हटाया। उसकी आँखों में वासना साफ थी। उसने दीदी का चेहरा पकड़कर कहा,
“अब हमारी शादी हो गई है। अब तुम मुझे मना नहीं कर सकती। तू मेरी बीवी है।”
दीदी कुछ जवाब नहीं दे पाई। जीजू ने उसके हाथ पकड़कर उसे पूरा बेड पर लिटा दिया। फिर उसने दीदी की साड़ी और पेटीकोट एक-एक करके उतारने शुरू किए। दीदी ने हल्के हाथों से रोकने की कोशिश की, लेकिन जीजू ने धीरे-धीरे सारे कपड़े उतार दिए। आखिर में पैंटी भी खींच ली। अब दीदी पूरी तरह नंगी लेटी हुई थी।
मैं छेद से देखकर हैरान रह गई। दीदी का पूरा शरीर एकदम चिकना और वैक्स किया हुआ था — बिल्कुल बाल नहीं थे। गोरा, मुलायम और चमकदार शरीर। उसके स्तन, पेट, जाँघें और नीचे का हिस्सा सब साफ और चिकना लग रहा था।
जीजू ने खुद भी अपनी शर्ट और पतलून उतार दी। अब वो सिर्फ काली अंडरवियर में रह गया। उसका शरीर भी पूरा वैक्स किया हुआ था — छाती, पेट, हाथ-पैर सब चिकने। फिर उसने अंडरवियर के नाड़े में उँगलियाँ डालीं और उसे नीचे सरका दिया।
जैसे ही अंडरवियर उतरी, उसका लंड बाहर आ गया। मैंने आँखें फाड़ लीं। वो लंड सच में बहुत बड़ा और मोटा था — लगभग १२ इंच लंबा, नसों से भरा और पूरी तरह खड़ा। सिर चमक रहा था।
जीजू ने दीदी का हाथ पकड़ा और अपना लंड उसकी हथेली पर रख दिया। दीदी की उँगलियाँ लंड को छूते ही काँप गईं। उसने झटके से हाथ पीछे खींचने की कोशिश की, लेकिन जीजू ने उसका हाथ वहीं दबाए रखा।
दीदी की आँखें फटी की फटी रह गईं। वो हैरानी और डर से लंड को देखती रही। उसके होठ काँप रहे थे।
“ये… इतना बड़ा…” उसने सिर्फ इतना ही कहा।
मैं भी छेद के पीछे स्तब्ध खड़ी थी। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। मैंने अपने बॉयफ्रेंड का भी देखा था, लेकिन इतना बड़ा और मोटा लंड मैंने कभी नहीं देखा था। दीदी का छोटा सा हाथ उस लंड को पूरी तरह पकड़ भी नहीं पा रहा था। कमरे में अजीब सी खामोशी छा गई थी। दीदी डर और हैरानी में थी, और मैं भी उतनी ही चौंक गई थी।
जीजू ने दीदी का हाथ अपने लंड पर रखा हुआ था। दीदी की उँगलियाँ काँप रही थीं। वो लंड इतना मोटा और लंबा था कि उसका छोटा हाथ उसे पूरी तरह पकड़ भी नहीं पा रहा था। जीजू ने उसका हाथ और कसकर दबाया और लंड को थोड़ा ऊपर-नीचे हिलाया ताकि दीदी अच्छी तरह देख ले।
“देख ले अच्छी तरह,” जीजू ने धीमी आवाज में कहा। “आज रात मैं ४-५ राउंड मारूँगा… पूरा डाल के।”
दीदी की आँखें फटी रह गईं। उसने लंड से नजर हटाई और जीजू की तरफ देखा। उसके चेहरे पर साफ डर था।
“दर्द होगा… इतना बड़ा है… मैं नहीं सह पाऊँगी,” दीदी ने हल्की सिसकी भरी आवाज में कहा।
जीजू हल्का मुस्कुराया। उसने दीदी के गाल पर हाथ फेरा और बोला,
“शादी से पहले भी तूने कभी नहीं करने दिया। तब कहती थी मम्मी ने मना किया है। आज कह रही है दर्द होगा। अब तू मेरी बीवी है। आज रात सहना ही पड़ेगा।”
दीदी कुछ जवाब नहीं दे पाई। उसके आँसू आँखों में भर आए थे। जीजू ने बेड पर रखे बैग से एक कंडोम निकाला। पैकेट को दाँतों से फाड़ा और कंडोम निकालकर अपने लंड पर चढ़ाने लगा। कंडोम धीरे-धीरे खिंचते हुए पूरे १२ इंच पर चढ़ गया। लंड अब और टाइट और चमकदार लग रहा था।
जीजू ने दीदी की दोनों टाँगें फैलाईं। दीदी ने हल्के हाथों से अपनी जाँघें बंद करने की कोशिश की, लेकिन जीजू ने उन्हें मजबूती से पकड़ रखा। उसने अपना शरीर दीदी के ऊपर किया। लंड का मोटा सिर दीदी की चूत पर टिका दिया। दीदी की साँस एकदम से रुक गई। उसका पूरा शरीर अकड़ गया।
“धीरे… प्लीज धीरे…” दीदी ने लगभग फुसफुसाते हुए कहा।
जीजू ने सिर हिलाया। उसने कमर से हल्का सा दबाव दिया। लंड का सिर धीरे-धीरे अंदर धँसने लगा। सिर्फ एक इंच अंदर गया था कि दीदी की कमर झटके से उठ गई और उसके मुँह से दबी हुई चीख निकली —
“आह्ह्ह… दर्द… निकालो… बहुत मोटा है…”
जीजू रुका रहा। उसने सिर्फ एक इंच अंदर रखा हुआ था। दीदी की चूत उस मोटे सिर को जबरदस्ती स्वीकार कर रही थी। उसके माथे पर पसीना आ गया था और आँखें बंद थीं। जीजू ने उसके बालों को सहलाते हुए कहा,
“बस… धीरे-धीरे जाएगा। तू साँस ले।”
दीदी तेज साँसें ले रही थी। उसका शरीर काँप रहा था। जीजू ने और जोर नहीं लगाया। सिर्फ इतना ही अंदर रखकर रुक गया। दीदी की चूत लंड के सिर को कसकर जकड़े हुए थी। कमरे में सिर्फ दीदी की तेज साँसें और हल्की सिसकियाँ सुनाई दे रही थीं।
मैं छेद से यह सब देख रही थी। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। दीदी की हालत देखकर मुझे भी डर लग रहा था। इतना बड़ा लंड सिर्फ एक इंच अंदर गया था और दीदी पहले से ही इतनी तड़प रही थी। आगे क्या होगा, ये सोचकर मेरे रोएँ खड़े हो गए थे।
जीजू ने दीदी की दोनों टाँगें और चौड़ी कर दीं। उसका १२ इंच का मोटा लंड अभी भी सिर्फ एक इंच अंदर था। दीदी की आँखें बंद थीं, माथा पसीने से तर था और वो तेज-तेज साँसें ले रही थी। जीजू ने उसके कूल्हों को मजबूती से पकड़ा।
“अब पूरा जाएगा… सह ले,” जीजू ने भारी आवाज में कहा।
दीदी ने सिर हिलाते हुए कहा, “नहीं… प्लीज… बहुत बड़ा है… मैं मर जाऊँगी… निकालो…”
लेकिन जीजू ने नहीं सुना। उसने कमर से जोरदार दबाव दिया। लंड एकदम से दो-तीन इंच और अंदर धँस गया। दीदी की आँखें फट गईं और उसके मुँह से जोरदार चीख निकली —
“आआआह्ह्ह!!!!!!! दर्द!!!!!!! निकालो!!!!!!! बहुत मोटा है!!!!!!!”
जीजू रुका नहीं। उसने और धक्का दिया। आधा लंड अंदर चला गया। दीदी का शरीर बेड पर तड़पने लगा। उसने जीजू की छाती को धक्का देना शुरू कर दिया।
“नहीं… नहीं… फट गई… आआह्ह्ह… माँ… बचाओ…”
जीजू ने उसके दोनों हाथ पकड़कर सिर के ऊपर दबा दिए। फिर एक लंबा और जोरदार धक्का मारा। पूरा १२ इंच लंड एक साथ दीदी की चूत में समा गया। दीदी की चीख कमरे में गूँज गई।
“आआआआह्ह्ह!!!!!!!!!!! मर गई!!!!!!!!!!! पूरा अंदर!!!!!!!!!!! दर्द!!!!!!!!!!! बहुत दर्द!!!!!!!!!!!”
दीदी की आँखों से आँसू बहने लगे। उसका पूरा शरीर काँप रहा था। चूत के मुँह से हल्की खून की धार भी दिख रही थी। जीजू ने पूरा लंड अंदर रोक रखा था। दीदी की चूत उस मोटे लंड को जबरदस्ती फैलाए हुए थी। उसका पेट हल्का सा उभर आया था।
“निकालो… प्लीज निकालो… मैं सह नहीं पा रही… आआह्ह…” दीदी रो-रोकर कह रही थी।
जीजू ने उसके चेहरे को चूमा और बोला, “अब निकलना शुरू होगा। तू बस साँस ले।”
उसने धीरे-धीरे लंड बाहर खींचना शुरू किया। लगभग पूरा बाहर आया, सिर्फ सिर अंदर बचा, फिर जोर से पूरा अंदर धकेल दिया। दीदी फिर से चीख पड़ी।
“आआह्ह्ह… दर्द… बहुत दर्द… धीरे… प्लीज धीरे…”
जीजू अब नियमित गति से चोदने लगा। हर धक्के के साथ दीदी की चीख निकलती। कभी वो “नहीं” बोलती, कभी सिर्फ रोती। उसके आँसू तकिए को भिगो रहे थे। जीजू के धक्के धीरे-धीरे तेज होने लगे। पूरा लंड हर बार जड़ तक अंदर जा रहा था और बाहर निकलते समय दीदी की चूत उसे कसकर पकड़ने की कोशिश कर रही थी।
दीदी की टाँगें काँप रही थीं। उसने जीजू की पीठ में नाखून गड़ा दिए।
“बहुत गहरा… पेट में लग रहा है… आआह्ह्ह… निकालो… मैं मर जाऊँगी…”
जीजू ने उसकी टाँगें अपने कंधों पर रख लीं। इससे लंड और भी गहराई तक जाने लगा। दीदी की चीखें और तेज हो गईं। वो अब पागलों की तरह सिर इधर-उधर पटक रही थी।
“नहीं… नहीं… फट गई… खून आ गया… आआह्ह्ह… माँ… दीदी… कोई बचाओ…”
मैं छेद से यह सब देख रही थी। मेरा शरीर काँप रहा था। दीदी इतनी तड़प रही थी कि मुझे खुद रोना आ रहा था। लेकिन मैं वहीं खड़ी रही। जीजू बिना रुके दीदी को चोदता जा रहा था। उसके शरीर पर पसीना चमक रहा था। दीदी के स्तन हर धक्के के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे।
लगभग बीस-पच्चीस मिनट तक जीजू इसी तरह मिशनरी स्टाइल में जोर-जोर से मारता रहा। दीदी की आवाज अब बैठने लगी थी। वो बस सिसकियाँ ले रही थी और कभी-कभी जोर से चीख पड़ती जब लंड बहुत गहरा जाता।
फिर जीजू ने अचानक रफ्तार बढ़ा दी। उसके धक्के बहुत तेज और छोटे हो गए। दीदी की चीखें फिर से तेज हो गईं।
“आह… आह… आह… बहुत तेज… दर्द… आआह्ह्ह…”
जीजू ने आखिरी कुछ धक्के बहुत जोर से मारे और फिर पूरा लंड अंदर धँसाए रखकर निकलने लगा। दीदी की चूत में गर्म तरल महसूस हुआ। उसने जोर से सिसकी भरी। जीजू कुछ देर और अंदर रहा, फिर धीरे से लंड बाहर निकाला।
दीदी की चूत पूरी तरह खुली और लाल थी। हल्का खून और सफेद तरल मिलकर बह रहा था। दीदी बेड पर तिरछी लेटी हुई जोर-जोर से रो रही थी। उसका शरीर अभी भी काँप रहा था। आँखें बंद थीं और आँसू बहते जा रहे थे।
जीजू उसके पास लेट गया। उसने दीदी के बालों को सहलाते हुए कहा, “पहला राउंड खत्म। आराम कर ले… अभी और बाकी हैं।”
दीदी सिर्फ रो रही थी। वो कुछ बोल नहीं पा रही थी। कमरे में सिर्फ उसकी सिसकियाँ गूँज रही थीं।
मैं छेद के पीछे खड़ी यह सब देखती रही। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। दीदी की हालत देखकर मेरे भी आँसू निकल आए थे। पहला राउंड खत्म हो चुका था… लेकिन जीजू कह चुका था कि आज रात ४-५ राउंड मारेगा।
जीजू ने लंड बाहर निकाल लिया था। दीदी बेड पर लेटी हुई अभी भी हल्की-हल्की सिसकियाँ ले रही थी। उसकी आँखें लाल थीं और गाल आँसुओं से भीगे हुए थे। मैं छेद से देख रही थी तो मन में एक बात बार-बार आ रही थी — जीजू इतने आराम से, इतने पूरे तरीके से दीदी को चोद रहा था, जैसे उसने पहले भी कई लड़कियों के साथ ऐसा किया हो। उसकी हरकतें बहुत अनुभवी लग रही थीं। वो बिल्कुल नहीं घबराया, न ही जल्दबाजी की। लग रहा था कि ये उसके लिए नई बात नहीं है।
जीजू उठा और बेड के किनारे रखे टॉवल से दीदी की चूत को धीरे-धीरे साफ करने लगा। हल्का खून और उसका पानी मिला हुआ था। दीदी ने शर्म से अपनी जाँघें मिलाने की कोशिश की, लेकिन जीजू ने धीरे से रोक दिया और साफ करता रहा। जब थोड़ा साफ हो गया तो उसने टॉवल一边 रख दिया और दीदी के पास लेट गया।
दोनों कुछ देर चुप रहे। फिर दीदी ने सिसकते हुए कहा,
“मम्मी-पापा ने… मेरी चीखें सुन ली होंगी… घर में सबको पता चल जाएगा…”
जीजू ने उसके बालों में हाथ फेरा और हल्के से मुस्कुराया।
“वो सुनकर भी अनसुना कर देते हैं। शादी की रात होती है तो सबको पता होता है। वो जानबूझकर सोने का नाटक करते हैं। तुझे ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं।”
दीदी की आँखों में फिर से आँसू आ गए। वो धीमी आवाज में बोलती रही,
“बहुत दर्द हो रहा था… मैंने सोचा नहीं था कि इतना होगा… तूने बहुत जोर से किया…”
जीजू ने उसके गाल पर हाथ रखा और बोला,
“पहली बार में होता है। धीरे-धीरे आदत हो जाएगी। तूने पहले कभी नहीं किया ना… इसलिए ज्यादा लगा।”
थोड़ी देर और बातें होती रहीं। दीदी कभी चुप हो जाती, कभी हल्की सिसकी ले लेती। जीजू उसके शरीर को धीरे-धीरे सहला रहा था — पीठ, कमर, जाँघें। उसका हाथ धीरे-धीरे फिर से दीदी की छाती पर पहुँच गया और स्तनों को हल्के से दबाने लगा। दीदी ने उसका हाथ पकड़ने की कोशिश की लेकिन जीजू ने हटा दिया।
कुछ देर बाद जीजू ने दीदी के कान में धीरे से कहा,
“एक और राउंड करते हैं।”
दीदी ने तुरंत सिर हिलाया और बोली,
“नहीं… प्लीज नहीं… अभी बहुत जलन हो रही है… मैं नहीं सह पाऊँगी… बाद में करना…”
जीजू ने उसका चेहरा अपनी तरफ किया। उसकी आँखों में फिर से वही वासना थी।
“आज रात ४-५ राउंड कह चुका हूँ। एक हो गया। अब दूसरा होगा। तू मेरी बीवी है… मना मत कर।”
दीदी की आँखों में फिर से डर आ गया। वो रोते हुए बोली,
“दर्द होगा… बहुत दर्द होगा… प्लीज छोड़ दे आज…”
लेकिन जीजू पहले ही उसके ऊपर उठने लगा था। दीदी ने दोनों हाथों से उसकी छाती को धक्का देना शुरू कर दिया, लेकिन जीजू उसके हाथ पकड़कर बेड पर दबा रहा था। कमरे में फिर से तनाव बढ़ गया था।
मैं छेद के पीछे खड़ी यह सब सुन और देख रही थी। दीदी की मनाही साफ सुनाई दे रही थी, लेकिन जीजू रुकने वाला नहीं लग रहा था।
दीदी अभी भी रो रही थी। उसके आँसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। वो बेड पर लेटी हुई दोनों हाथों से अपनी छाती और नीचे का हिस्सा ढकने की कोशिश कर रही थी। जीजू उसके ऊपर उठ चुका था। उसका लंड फिर से पूरी तरह खड़ा हो चुका था — मोटा, लंबा और चमकदार।
“नहीं… प्लीज नहीं… बहुत दर्द हो रहा है अभी भी… छोड़ दो…” दीदी सिसकते हुए बोल रही थी।
जीजू ने उसके दोनों हाथ पकड़कर सिर के ऊपर दबा दिए।
“आज रात तू मेरी है। मना करने का कोई हक नहीं। दूसरा राउंड शुरू होता है।”
दीदी ने सिर इधर-उधर हिलाना शुरू कर दिया। उसकी टाँगें बंद करने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन जीजू ने अपने घुटनों से उन्हें अलग कर दिया। उसने बिना किसी प्रस्तावना के अपना १२ इंच का लंड दीदी की अभी भी सूजी और संवेदनशील चूत पर लगाया और एक जोरदार धक्के के साथ आधा अंदर कर दिया।
दीदी की चीख इस बार और भी तेज निकली —
“आआआआह्ह्ह!!!!!!!!!!! नहीं!!!!!!!!!!! दर्द!!!!!!!!!!! निकालो!!!!!!!!!!! फट गई!!!!!!!!!!!”
जीजू ने दूसरा धक्का मारा। पूरा लंड एक साथ अंदर धँस गया। दीदी का शरीर बेड पर तड़प उठा। उसके मुँह से निकलने वाली आवाज अब चीख और रोने का मिश्रण बन चुकी थी। आँखों से आँसू धारा की तरह बह रहे थे।
“आआह्ह्ह… माँ… बचाओ… बहुत दर्द… आआह्ह्ह… निकालो… प्लीज…”
जीजू ने उसके हाथ छोड़े और दोनों हाथों से उसके कूल्हों को पकड़ लिया। फिर बिना रुके तेज-तेज धक्के मारने लगा। हर धक्का पूरा और गहरा था। दीदी की चूत अभी भी पहले राउंड से सूजी हुई थी, इसलिए हर घुसाई पर उसका चेहरा दर्द से मुड़ जाता। वो जोर-जोर से रो रही थी और बीच-बीच में चीख पड़ती।
“धीरे… प्लीज धीरे… बहुत जोर से… आआह्ह्ह… मैं मर जाऊँगी…”
जीजू ने उसकी बात अनसुनी कर दी। उसने दीदी की दोनों टाँगें उठाकर अपने कंधों पर रख लीं। इससे लंड और भी गहराई तक जाने लगा। दीदी की चीखें अब नियंत्रण से बाहर हो चुकी थीं। वो पागलों की तरह सिर पटक रही थी और जीजू की पीठ में नाखून गड़ा रही थी।
“नहीं… नहीं… बहुत गहरा… पेट में लग रहा है… आआआह्ह्ह… दर्द… बहुत दर्द…”
जीजू की रफ्तार बढ़ती जा रही थी। बेड जोर-जोर से हिल रहा था। दीदी के स्तन हर धक्के के साथ उछल रहे थे। उसका पूरा शरीर पसीने से तरबतर हो चुका था। आँसू, पसीना और थूक सब मिलकर उसके चेहरे को गीला किए हुए थे। वो अब सिर्फ रो रही थी — लंबी-लंबी सिसकियाँ और बीच-बीच में तेज चीखें।
मैं छेद से यह सब देख रही थी। मेरा शरीर काँप रहा था। दीदी इतनी तड़प रही थी कि मुझे खुद पर नियंत्रण रखना मुश्किल हो रहा था। लेकिन मैं वहीं खड़ी रही। जीजू बिल्कुल नहीं रुक रहा था। उसकी साँसें तेज थीं और माथे पर पसीना चमक रहा था। वो दीदी को ऐसे चोद रहा था जैसे कोई मशीन हो।
करीब बीस-पच्चीस मिनट तक जीजू ने इसी मिशनरी पोजीशन में जबरदस्ती चोदा। दीदी की आवाज अब बैठने लगी थी। वो बस “आह… आह… नहीं…” करती जा रही थी। फिर जीजू ने अचानक लंड बाहर निकाला। दीदी ने राहत की साँस ली, लेकिन वो राहत ज्यादा देर नहीं चली।
जीजू ने दीदी को जबरदस्ती पलटा। उसे घुटनों के बल कर दिया। दीदी ने विरोध किया, बेड पर रेंगने की कोशिश की, लेकिन जीजू ने उसकी कमर पकड़कर खींच लिया। अब दीदी चारों हाथ-पैरों पर थी। उसकी गांड पीछे उठी हुई थी और चूत साफ दिख रही थी — लाल, सूजी हुई और गीली।
“नहीं… इस तरह नहीं… प्लीज…” दीदी रोते हुए बोली।
जीजू ने जवाब नहीं दिया। उसने लंड का सिर चूत पर लगाया और एक जोरदार धक्के के साथ पूरा अंदर कर दिया। दीदी की चीख इस बार और भी भयंकर निकली। उसने चेहरा तकिए में दबा लिया, लेकिन आवाज दब नहीं पाई।
“आआआह्ह्ह!!!!!!!!!!! बहुत जोर से!!!!!!!!!!! दर्द!!!!!!!!!!! आआह्ह्ह… निकालो… निकालो…”
जीजू ने उसके बाल पकड़ लिए और पीछे खींचते हुए तेज-तेज धक्के मारने लगा। हर धक्के के साथ दीदी की गांड काँप रही थी। आवाज “थप-थप-थप” की तेज गूँज के साथ मिल रही थी। दीदी अब लगभग बेहोशी की हालत में चीख रही थी। उसके आँसू तकिए को पूरी तरह भिगो चुके थे।
जीजू कभी उसके बाल खींचता, कभी उसकी गांड पर थप्पड़ मारता। दीदी की चीखें हर थप्पड़ के साथ और तेज हो जातीं। वो बार-बार कह रही थी —
“माँ… पापा… कोई बचाओ… बहुत दर्द… आआह्ह्ह… मैं सह नहीं पा रही…”
लेकिन कोई नहीं आया। घर में सन्नाटा था। जीजू लगभग आधे घंटे तक इस डॉगी स्टाइल में बेरहमी से चोदता रहा। दीदी का शरीर अब ढीला पड़ने लगा था। उसकी टाँगें काँप रही थीं और वो बार-बार आगे गिरने लगती, लेकिन जीजू उसे कमर से पकड़कर संभाल लेता।
आखिर में जीजू की रफ्तार बहुत तेज हो गई। उसने दीदी की कमर को दोनों हाथों से जकड़ लिया और बहुत गहरे-गहरे धक्के मारने लगा। दीदी की आवाज अब सिर्फ सिसकियों में बदल चुकी थी। जीजू ने आखिरी जोरदार धक्कों के साथ पूरा लंड अंदर धँसाए रखा और जोर से निकलने लगा। दीदी की चूत में फिर से गर्म तरल भर गया। उसने एक लंबी, काँपती हुई सिसकी भरी
और बेड पर ढेर हो गई।
जीजू ने लंड बाहर निकाला। दीदी की चूत से सफेद तरल और हल्का खून मिलकर बह रहा था। वो बेड पर मुँह के बल गिरी हुई जोर-जोर से रो रही थी। उसका पूरा शरीर काँप रहा था। आँसू नहीं रुक रहे थे।
जीजू उसके पास बैठ गया। उसने पसीना पोंछते हुए कहा,
“दूसरा राउंड भी हो गया। आराम कर ले… अभी दो-तीन और बाकी हैं।”
दीदी ने सिर्फ सिर हिलाया और रोती रही। वो कुछ बोलने की स्थिति में नहीं थी। कमरे में सिर्फ उसकी सिसकियाँ और भारी साँसें गूँज रही थीं।
मैं छेद के पीछे खड़ी यह सब देखती रही। मेरी अपनी आँखें भी नम हो चुकी थीं। दीदी की हालत बहुत खराब थी। दूसरा राउंड जबरदस्ती और बहुत बेरहमी से हुआ था… और जीजू अभी भी रुकने वाला नहीं लग रहा था।
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