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सुहागरात और हनीमून

पापा और मेरी सुहागरात मालदीव्स में 5

· Online Admin

पापा अनन्या मम्मी को जोर-जोर से चोद रहे थे। उनके हर झटके के साथ अनन्या मम्मी की चीखें कमरे में गूँज रही थीं।

अनन्या मम्मी हाँफते हुए बोलीं,
“कब आने वाला है… आह्ह्ह्ह!!! बहुत देर हो गई… जaldi निकालो ना…”

पापा ने उनकी कमर को और कसकर पकड़ते हुए कहा,
“40 मिनट बाद आएगा… अभी दर्द हो रहा है क्या? जaldi करूँ?”

अनन्या मम्मी चीखते हुए बोलीं,
“हाँ… दर्द हो रहा है… लेकिन मत रुको… आह्ह्ह्ह!!! और तेज… तेज करो… मैं सह लूँगी!!!”

पापा ने स्पीड बढ़ा दी। अब वे बहुत तेज और गहरे झटके मार रहे थे। कमरा “धप्प्… धप्प्… धप्प्…” की आवाजों से भर गया था।

बीच-बीच में पापा बोले,
“ये ड्राई फ्रूट वाला दूध पीकर आज बहुत मजा आ रहा है… लंड एकदम स्टील जैसा हो गया है…”

अनन्या मम्मी चीख रही थीं,
“हाँ… बहुत जोर से चोद रहे हो… आह्ह्ह्ह!!! मेरी चूत फाड़ दो… आज पूरा निकाल दो… आह्ह्ह्ह!!!”

मैं ग्लास के पास खड़ी यह सब देख रही थी। मेरी चूत इतनी गर्म और गीली हो चुकी थी कि मैं बार-बार उँगलियाँ अंदर डाल रही थी। 4-5 बार मेरा पानी निकल चुका था, लेकिन फिर भी गर्मी कम नहीं हो रही थी।

पापा ने तेज झटके मारते हुए कहा,
“जिया का भाई होता तो कितना अच्छा रहता…”

अनन्या मम्मी हाँफते हुए बोलीं,
“हाँ… वो तो है…”

पापा ने मुस्कुराते हुए पूछा,
“कर दूँ प्रेग्नेंट?”

अनन्या मम्मी ने तुरंत कहा,
“नहीं… मैं नहीं हो सकती… मेरी उम्र हो गई है। प्रिया भी मना कर रही है।”

प्रिया मम्मी बगल में लेटी हुई बोलीं,
“हाँ जी… अभी नहीं।”

अनन्या मम्मी ने पापा की पीठ पर नाखून गाड़ते हुए कहा,
“कोई बात नहीं… घर जाकर सोचते हैं। अभी सिर्फ enjoy करो… आह्ह्ह्ह!!! और तेज… और तेज चोदो मुझे!!!”

पापा ने स्पीड और बढ़ा दी। अब वे पूरी ताकत से अनन्या मम्मी को चोद रहे थे। अनन्या मम्मी की चीखें बहुत तेज हो गई थीं —

“आह्ह्ह्ह!!! विक्रम… बहुत तेज है… आह्ह्ह्ह!!! फाड़ दोगे… हाँ… हाँ… इसी तरह… मेरी चूत को निचोड़ो… आह्ह्ह्ह!!! बहुत मजा आ रहा है!!!”

काफी देर तक (लगभग 25-30 मिनट) पापा बिना रुके जोर-जोर से चोदते रहे। अनन्या मम्मी कई बार झड़ चुकी थीं, लेकिन पापा का अभी तक नहीं निकला था। वे लगातार तेज रफ्तार में चोद रहे थे।

अनन्या मम्मी थककर चीख रही थीं,
“आह्ह्ह्ह!!! कितनी देर… निकालो ना… मेरी चूत फट गई है… आह्ह्ह्ह!!! बहुत दर्द हो रहा है अब… लेकिन मत रुको… हाँ… हाँ!!!”

पापा हाँफते हुए बोले,
“अभी आ रहा है… थोड़ा और सह ले…”

वे और तेज हो गए। कमरा उनकी चुदाई की आवाजों और अनन्या मम्मी की चीखों से भर गया था।

पापा अनन्या मम्मी को बेरहमी से चोद रहे थे। उनके तेज झटके अब और भी गहरे और तेज हो गए थे। अनन्या मम्मी की चूत पूरी तरह लाल और सूजी हुई थी, लेकिन पापा रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।

अनन्या मम्मी हाँफते हुए चीखीं,
“बस… बस… थोड़ी देर और… आह्ह्ह्ह!!! बहुत हो गया… दर्द हो रहा है अब… जaldi करो विक्रम… आह्ह्ह्ह!!!”

पापा ने उनकी कमर को और कसकर पकड़ लिया और बोले,
“बस थोड़ी देर… बस थोड़ी देर और… आ रहा है…”

वे अब फुल स्पीड में चोद रहे थे। हर झटके पर अनन्या मम्मी का पूरा शरीर हिल रहा था। उनकी चीखें अब दर्द और मजा के मिश्रण में बदल चुकी थीं।

“आह्ह्ह्ह!!! जaldi… जaldi निकालो… मेरी चूत फट गई है… आह्ह्ह्ह!!! बहुत दर्द हो रहा है… प्लीज… आह्ह्ह्ह!!!”

लगभग 4-5 मिनट और तेज चुदाई के बाद पापा की साँसें बहुत तेज हो गईं। उन्होंने अचानक लंड बाहर निकाला।

अनन्या मम्मी हाँफ रही थीं। पापा ने तुरंत उनका सिर पकड़ा और उन्हें घुटनों के बल बैठा दिया। उनका 12 इंच का मोटा, सूजा हुआ लंड अनन्या मम्मी के मुँह के सामने था।

पापा ने लंड को उनके होंठों पर रखा और कहा,
“मुँह खोलो… पूरा ले लो…”

अनन्या मम्मी ने मुँह खोला। पापा ने लंड अंदर डाला और जोर से झड़ने लगे।

“आह्ह्ह्ह!!! ले… ले… पूरा ले…!!!”

गर्म-गर्म, मोटी-मोटी धारें अनन्या मम्मी के मुँह में छूटने लगीं। इतना ज्यादा वीर्य था कि उनका मुँह भर गया। कुछ बूँदें उनके होंठों से बाहर निकलकर ठोड़ी और स्तनों पर गिरने लगीं।

अनन्या मम्मी आँखें बंद करके पूरा वीर्य निगलने की कोशिश कर रही थीं। उनके गाल फूल गए थे। पापा ने लंड को उनके मुँह में ही दबाए रखा और आखिरी बूँद तक निकाल दिया।

जब पापा ने लंड बाहर निकाला तो अनन्या मम्मी के मुँह से वीर्य की एक धार बाहर निकली और उनके स्तनों पर गिर गई। वे हाँफते हुए बैठी थीं, मुँह और ठोड़ी वीर्य से सनी हुई थी।

पापा थककर बेड पर लेट गए। अनन्या मम्मी भी उनके बगल में लेट गईं। उनका पूरा शरीर पसीने और वीर्य से चिपचिपा हुआ था।

प्रिया मम्मी बगल में लेटी हुई सब देख रही थीं।

 

पापा ने आखिरी झटके के साथ अपना पूरा वीर्य अनन्या मम्मी के मुँह में उड़ेल दिया। अनन्या मम्मी के गाल फूल गए थे, कुछ वीर्य उनके होंठों के कोनों से बाहर निकलकर ठोड़ी और बड़े-बड़े स्तनों पर गिर रहा था।

पापा ने लंड बाहर निकाला। अनन्या मम्मी हाँफती हुई बेड पर लेट गईं। उनका पूरा चेहरा, होंठ, ठोड़ी और स्तन वीर्य से सने हुए थे। वे थककर आँखें बंद किए पड़ी थीं।

थोड़ी देर शांति रही। सिर्फ तीनों की तेज साँसें सुनाई दे रही थीं।

फिर पापा ने छोटी मम्मी प्रिया की तरफ देखा। उनकी आँखों में अभी भी भूख बाकी थी। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा,

“प्रिया… अब तुम्हारी बारी आएगी। अभी तैयार रहना।”

प्रिया मम्मी शर्मा गईं। उनकी चूत अभी भी सूजी हुई थी। उन्होंने धीरे से कहा,
“जी… ठीक है…”

बड़ी मम्मी अनन्या ने थकी हुई आवाज में कहा,
“गांड़ की बारी भी तो है… प्रिया की गांड़ अभी बाकी है।”

पापा ने हँसते हुए अनन्या मम्मी की सूजी हुई गांड़ पर हाथ फेरा और बोले,
“आज नहीं। आज बस दोनों का एक-एक राउंड। गांड़ कल देखेंगे। आज रात काफी हो गई।”

प्रिया मम्मी ने राहत की साँस ली। अनन्या मम्मी ने भी हल्के से सिर हिलाया।

पापा ने दोनों मम्मियों को अपनी बाहों में खींच लिया और बोले,
“आज दोनों को अच्छे से चोदा… बहुत मजा आया। अब सो जाओ। कल फिर से continue करेंगे।”

तीनों एक-दूसरे से चिपके हुए लेट गए। कमरे में candles की हल्की रोशनी अभी भी जल रही थी। बाहर समुद्र की लहरें शांत आवाज में बज रही थीं।

अनन्या मम्मी और प्रिया मम्मी दोनों थककर पापा की छाती पर सिर रखकर लेट गईं। पापा ने दोनों की पीठ पर हाथ फेरते हुए कहा,
“7 दिन अभी बाकी हैं… बहुत कुछ बाकी है।”

मैं ग्लास वॉल के पास खड़ी सब देख रही थी। मेरी चूत अभी भी गर्म थी, लेकिन अब थकान भी हो रही थी। मैं धीरे से अपने बेड पर लेट गई।

रात के अंधेरे में तीनों सो गए, लेकिन कमरे में अभी भी सेक्स की गर्मी बाकी थी।

 

तीनों थककर बेड पर लेट गए। पापा बीच में थे, बड़ी मम्मी अनन्या उनकी बाईं तरफ और छोटी मम्मी प्रिया दाईं तरफ। कमरे में candles की हल्की रोशनी अभी भी जल रही थी।

पापा ने दोनों मम्मियों को अपनी बाहों में खींच लिया। अनन्या मम्मी पापा की छाती पर सिर रखकर लेटी हुई थीं, उनकी सूजी हुई गांड अभी भी दर्द कर रही थी। प्रिया मम्मी भी पापा से सटी हुई थीं, उनकी चूत अभी भी गर्म और सूजी हुई थी।

थोड़ी देर चुप रहने के बाद पापा ने धीरे से कहा,

“आज रात तो कमाल की थी… दोनों को अच्छे से चोदा।”

अनन्या मम्मी थकी हुई आवाज में बोलीं,
“बहुत जोर से चोदा था आपने… मेरी गांड और चूत दोनों सूज गई हैं।”

प्रिया मम्मी ने शर्माते हुए कहा,
“मेरी भी हालत खराब है… कल सुबह balcony में करेंगे ना? जिया के उठने से पहले।”

पापा ने दोनों की पीठ पर हाथ फेरते हुए मुस्कुराकर कहा,
“हाँ… कल सुबह balcony में खूब मजा करेंगे। जिया उठने से पहले। आज रात काफी हो गई। अब सो जाओ।”

तीनों एक-दूसरे से चिपके हुए लेटे रहे। पापा ने दोनों मम्मियों को चूम लिया और बोले,

“कल सुबह balcony में दोनों को फिर से चोदूँगा… तैयार रहना।”

अनन्या मम्मी और प्रिया मम्मी दोनों थकान से आँखें बंद कर चुकी थीं। पापा भी उनकी गरदनों में चेहरा छिपाकर लेट गए।

धीरे-धीरे तीनों की साँसें सामान्य हो गईं और वे गहरी नींद में सो गए।

मैं ग्लास वॉल के पास खड़ी यह सब देख रही थी। मेरी चूत अभी भी गर्म थी, लेकिन अब थकान भी बहुत हो रही थी। मैंने पर्दा बंद कर दिया और अपने बेड पर लेट गई।

रात के अंधेरे में समुद्र की लहरें शांत आवाज में बज रही थीं, और तीनों का बेडरूम अब शांत हो चुका था।

रात भर मैं सो नहीं पाई। बार-बार ग्लास वॉल से झाँकती रही। तीनों गहरी नींद में सो रहे थे। पापा दोनों मम्मियों को अपनी बाहों में लिए हुए थे। कमरे में अभी भी हल्की candles की रोशनी बाकी थी।

सुबह होने वाली थी। मैं जानती थी कि पापा ने प्लान बनाया है — सुबह balcony में दोनों मम्मियों को चोदना। मुझे ये बिल्कुल पसंद नहीं था। मैंने मन में ठान लिया — “मुझे बस उनका प्लान खराब करना है।”

सुबह 6:30 बजे मैं जानबूझकर उठ गई। मैंने एक छोटा सा शॉर्ट्स और टॉप पहना, जिसमें मेरे स्तन आधे बाहर दिख रहे थे। फिर मैंने अपना रूम का दरवाजा खोला और जानबूझकर जोर से आवाज की।

“पापा…! मम्मी…! उठिए ना… बाहर समुद्र बहुत सुंदर लग रहा है।”

मैं जानबूझकर उनके रूम के पास गई और दरवाजा हल्का-हल्का खटखटाया।

अंदर से पापा की नींद टूटी। उन्होंने अनन्या मम्मी और प्रिया मम्मी को हिलाया। तीनों की नींद खुल गई। पापा ने झुंझलाते हुए कहा, “जिया… इतनी सुबह क्या हो गया?”

मैंने innocent स्वर में कहा,
“पापा, बाहर balcony में coffee पीते हैं ना? समुद्र देखने का बहुत मन कर रहा है। प्लीज उठिए ना… मैं अकेली घूमना नहीं चाहती।”

पापा ने दोनों मम्मियों की तरफ देखा। दोनों की आँखों में frustration साफ दिख रहा था। वे सुबह-सुबह balcony में चुदाई का प्लान बना रहे थे, लेकिन मैं उनके बीच में आ गई थी।

अनन्या मम्मी ने थकी हुई आवाज में कहा,
“जिया बेटा… थोड़ा और सो लेते… रात को देर हो गई थी।”

मैंने तुरंत जवाब दिया,
“नहीं मम्मी, मैं अकेली नहीं घूम सकती। पापा ने कहा था ना कि हम साथ रहेंगे। प्लीज… उठिए ना।”

पापा ने मजबूरन कहा, “ठीक है… उठते हैं।”

तीनों को उठना पड़ा। उनका प्लान पूरी तरह खराब हो गया। वे तीनों थके हुए और नाराज़ दिख रहे थे। प्रिया मम्मी ने मुझे देखकर हल्के से मुस्कुराने की कोशिश की, लेकिन उनकी आँखों में गुस्सा था।

मैं मन ही मन बहुत खुश थी।
“मेरा प्लान काम कर गया… आज सुबह उनका celebration नहीं होने वाला।”

हम चारों balcony में coffee पीने बैठ गए। समुद्र की सुंदर सुबह थी, लेकिन तीनों का मूड खराब था। पापा बार-बार दोनों मम्मियों की तरफ देख रहे थे, लेकिन मेरी वजह से कुछ नहीं कर पा रहे थे।

मैंने जानबूझकर बातें शुरू कर दीं —
“पापा, आज हम कहाँ घूमने जाएंगे? मुझे पूरा दिन आपके साथ घूमना है।”

तीनों चुपचाप सुन रहे थे। उनका प्लान पूरी तरह बिगड़ चुका था।

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